मुंबई: महाराष्ट्र में भाषा को लेकर चल रहा विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। इस बीच, पालघर जिला प्रशासन द्वारा गुजराती भाषा में जारी की गई एक अधिसूचना (नोटिफिकेशन) ने इस आग में घी डालने का काम किया है। इस कदम की विपक्षी दलों ने कड़ी निंदा की है और इसे राज्य में गुजराती भाषा थोपने की कोशिश करार दिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद 19 और 20 जनवरी को वधवान बंदरगाह (Vadhavan Port) के विरोध में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) द्वारा आयोजित मोर्चे से जुड़ा है। इस प्रदर्शन के चलते मुंबई-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग-48 (NH-48) पर वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाना जरूरी हो गया था। इसी संदर्भ में जिला प्रशासन द्वारा अधिसूचना जारी की गई थी, लेकिन इसके गुजराती भाषा में होने के कारण राज्य में एक नया राजनीतिक बवंडर खड़ा हो गया है।
विपक्ष के तीखे तेवर
इस मामले पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजय वडेट्टीवार ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे एक गंभीर शुरुआत बताते हुए कहा, “यह सिर्फ शुरुआत है। पालघर से गुजराती थोपने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अगर बीजेपी को मुंबई मेयर का पद मिलता है, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि शहर का शासन किसके इशारों पर चलेगा।”
वहीं, शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने भी इस मुद्दे को बेहद गंभीर बताया और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से स्पष्टीकरण की मांग की। राउत ने सवाल उठाते हुए कहा, “सभी दलों को इस पर गंभीरता से विचार करना होगा। क्या पालघर महाराष्ट्र का हिस्सा है या इसे बुलेट ट्रेन और वधवान बंदरगाह के बहाने पड़ोसी राज्य से जोड़ा जा रहा है? महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को सार्वजनिक रूप से पालघर का नक्शा जारी करना चाहिए।”
प्रशासन की सफाई: “मराठी का अपमान नहीं”
विवाद बढ़ता देख पालघर जिला समाहरणालय (कलेक्ट्रेट) के वरिष्ठ अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। एक वरिष्ठ जिला अधिकारी ने स्पष्ट किया, “मराठी के अपमान या किसी भी प्रकार के भ्रम की कोई गुंजाइश नहीं है। राजमार्ग पर वाहनों की आवाजाही रोकने का मूल आदेश मराठी भाषा में ही जारी किया गया था।”
अधिकारी ने तर्क दिया कि मुंबई-अहमदाबाद राजमार्ग पर बड़ी संख्या में वाहन चालक गुजरात से आते हैं। उन्हें यातायात प्रतिबंधों की जानकारी देना आवश्यक था, इसलिए यह कदम उठाया गया।
उन्होंने आगे कहा, “गुजरात से आने वाले मोटर चालकों की सुविधा के लिए, गुजरात की तरफ के अधिकारियों ने आदेश का गुजराती में अनुवाद किया और इसे सीमावर्ती गांवों में प्रदर्शित किया। ऐसा लगता है कि इसी वजह से यह गलतफहमी पैदा हुई है।”
स्थानीय लोगों की अलग व्यथा
भले ही प्रशासन ने सफाई दे दी हो, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि गुजरात के अधिकारियों द्वारा उन्हें ऐसी ही सुविधा नहीं दी जाती। स्थानीय निवासियों के अनुसार, गुजरात के भिलाड में रेलवे अंडरपास 18 जनवरी से बंद है। वहां एक नई सीमेंट सुरंग का निर्माण कार्य चल रहा है, जिसके कारण यह मार्ग बाधित है।
पालघर जिले के मराठी भाषी ड्राइवर इस मार्ग का बड़े पैमाने पर उपयोग करते हैं, लेकिन इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन ने मराठी में कोई ट्रैफिक एडवाइजरी (यातायात सलाह) जारी नहीं की है।
पुराना है भाषा विवाद
महाराष्ट्र में ‘मराठी बनाम गुजराती’ भाषा का विवाद काफी लंबे समय से सुलग रहा है। पिछले साल जुलाई में, राज ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के कार्यकर्ताओं ने ठाणे और पालघर जिलों में राजमार्ग के किनारे स्थित कई गुजराती होटलों से जबरन गुजराती साइनबोर्ड हटा दिए थे। उनकी मांग थी कि राज्य में साइनबोर्ड केवल मराठी भाषा में ही होने चाहिए।
ताज़ा घटनाक्रम ने इस संवेदनशील मुद्दे को एक बार फिर हवा दे दी है, जिससे राज्य का सियासी पारा चढ़ गया है।
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