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गुजरात: ‘पेपर मैरिज’ का नया गढ़ बने गुमनाम गांव, हजारों फर्जी विवाह प्रमाण पत्रों के बड़े रैकेट का पर्दाफाश

| Updated: December 29, 2025 19:34

50 लाख की कमाई और 2000 फर्जी शादियां: एक वायरल वीडियो ने कैसे खोली गुजरात के 'पेपर मैरिज' रैकेट की पोल?

वडोदरा: पंचमहल जिले के जिन गांवों में कल तक सन्नाटा पसरा रहता था, आज वे अचानक ‘पेपर मैरिज’ (कागजी शादियों) के केंद्र बनकर उभरे हैं। जिले के कई तालुका अब जांच के दायरे में हैं, जहां विवाह पंजीकरण का एक विशाल और संदिग्ध रैकेट चल रहा था।

इस घोटाले की पहली परत मई 2024 में शेहरा तालुका के भद्रला गांव में खुली। यहां गुजरात के बाहर और यहां तक कि जिले के बाहर के जोड़ों को संदिग्ध विवाह प्रमाण पत्र जारी किए जाने का मामला सामने आया। शुरुआत में यह एक गांव के तलाटी से जुड़ा एक मामूली मामला लग रहा था, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर पंचमहल में फैला एक बड़ा अपराध नेटवर्क सामने आ गया।

आरटीआई ने खोली पोल

मामले ने तूल तब पकड़ा जब घर से भागकर शादी करने वाले जोड़ों के माता-पिता ने आरटीआई (RTI) के जरिए जानकारी मांगनी शुरू की। दरअसल, इन बच्चों ने अपने विवाह प्रमाण पत्र के जरिए परिवार को शादी की सूचना दी थी। शेहरा के तालुका विकास अधिकारी (TDO) पार्थ पटेल के पास कई आरटीआई अपीलें पहुंचीं, क्योंकि भद्रला गांव के तलाटी ने या तो जवाब नहीं दिया या गोलमोल उत्तर दिए।

दाल में कुछ काला नजर आने पर पार्थ पटेल ने खुद रिकॉर्ड खंगाले और चौंकाने वाली अनियमितताएं पाईं। उनकी जांच में खुलासा हुआ कि भद्रला में लगभग 550 विवाह प्रमाण पत्र अधूरे या संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर जारी किए गए थे।

यूपी से लेकर नागालैंड तक के तार

सबसे हैरान करने वाली बात इन जोड़ों का भौगोलिक विस्तार था। पंजीकरण कराने वालों में उत्तर प्रदेश, नागालैंड, राजस्थान और मध्य प्रदेश के जोड़ों के अलावा गुजरात के दूरदराज के जिलों जैसे कच्छ और सूरत के लोग भी शामिल थे। ये सभी प्रमाण पत्र एक ही तलाटी, पी.एम. परमार द्वारा जारी किए गए थे, जिन्हें बाद में निलंबित कर दिया गया।

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, परमार द्वारा उन गांवों में जारी किए गए प्रमाण पत्रों पर भी सवाल उठे जहां वह पहले तैनात थे। कुल मिलाकर, भद्रला, कलोल तालुका के मालव गांव और घोघंबा तालुका के पल्ली गांव से जारी करीब 2,000 विवाह प्रमाण पत्रों को जांच के लिए चिह्नित किया गया है।

वायरल वीडियो ने मचाया हड़कंप

अभी पहले मामले की धूल जमी भी नहीं थी कि इस महीने की शुरुआत में एक और घटना ने पंचमहल को झकझोर दिया। जांबुघोड़ा तालुका के कांजीपानी गांव के तलाटी अर्जुन मेघवाल का एक वीडियो सोशल वडोदरा वायरल हो गया। वीडियो में वह बेखौफ होकर यह दावा करता नजर आ रहा है कि उसने करीब 2,000 विवाह प्रमाण पत्र जारी करके 50 लाख रुपये कमाए हैं और उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। वीडियो में मेघवाल रिकॉर्डिंग करने वाले व्यक्ति को वीडियो बनाते रहने की चुनौती देता भी दिख रहा है।

इस वायरल क्लिप के बाद, कांजीपानी सहित उन पांच गांवों में नए सिरे से जांच शुरू की गई जहां मेघवाल ने काम किया था। जांच का नेतृत्व कर रहे उप जिला विकास अधिकारी (DDO) धवल संगदा ने बताया कि अब तक 1,116 प्रमाण पत्रों के दस्तावेज जमा किए गए हैं। संगदा ने कहा, “कुछ मामलों में विसंगतियां पहले ही मिल चुकी हैं। रिकॉर्ड की भारी संख्या को देखते हुए फर्जी प्रमाण पत्रों की सही संख्या का पता लगाने में समय लगेगा।”

असंभव यात्रा: 250 किमी की दूरी और दस्तावेजों का खेल

प्रारंभिक जांच के नतीजे चिंताजनक हैं। सूत्रों के मुताबिक, कई प्रमाण पत्रों में बुनियादी शर्तें पूरी नहीं की गई हैं—कुछ में दूल्हा या दुल्हन की तस्वीरें गायब हैं, तो कुछ में अनिवार्य शुल्क ही नहीं भरा गया।

एक लड़की के पिता द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर में चौंकाने वाली विसंगतियां सामने आईं। उनकी बेटी ने उनकी मर्जी के खिलाफ शादी की थी। पता चला कि शादी के लिए शपथ पत्र (एफिडेविट) उत्तर गुजरात के ऊंझा में (जो करीब 250 किमी दूर है) दोपहर 2:30 बजे खरीदे गए और उसी दिन शाम 4 बजे कांजीपानी में जमा भी कर दिए गए। हैरानी की बात यह है कि दो अलग-अलग शपथ पत्रों में शादी की दो अलग-अलग जगह बताई गईं—एक में हारिज और दूसरे में खुद कांजीपानी।

परिवार से बचने के लिए दूरदराज के गांवों का सहारा

जांचकर्ताओं का मानना है कि अधिकांश संदिग्ध प्रमाण पत्र उन जोड़ों से जुड़े हैं जिन्होंने अपने परिवारों की मर्जी के खिलाफ शादी की है। एक सूत्र ने बताया, “ऐसे जोड़े पकड़े जाने के डर से अपने मूल स्थान से बहुत दूर शादी पंजीकृत कराना पसंद करते हैं। यह सब बड़ी लापरवाही की वजह से हुआ या इसमें अधिकारियों की मिलीभगत थी, हम इसकी जांच कर रहे हैं।” माता-पिता की ओर से आरटीआई के बढ़ते आवेदन इस पैटर्न की पुष्टि करते हैं।

भद्रला मामले का पर्दाफाश करने वाले पार्थ पटेल ने कहा कि दस्तावेज साफ दिखाते हैं कि दूर-दराज के लोग शादी के पंजीकरण के लिए इन गुमनाम गांवों को चुन रहे थे। उन्होंने कहा, “उन्होंने इन्हीं गांवों को क्यों चुना, यह मैं नहीं कह सकता। हमने केवल रिकॉर्ड के आधार पर कार्रवाई की है।”

कानून क्या कहता है?

अधिकारी कहां चूक गए?

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अपने मूल निवास के बाहर शादी करना अवैध नहीं है। डीडीओ संगदा ने कहा, “कानून उस जगह पर विवाह पंजीकरण की अनुमति देता है जहां शादी संपन्न हुई हो, भले ही दूल्हा या दुल्हन कहीं के भी रहने वाले हों।” हालांकि, पंचमहल में मुख्य समस्या बिना उचित सत्यापन (वेरिफिकेशन) के प्रमाण पत्र जारी करना है। उन्होंने जोड़ा, “यदि प्रक्रियाओं का पालन किया जाता और दस्तावेज पूरे होते, तो ये शादियां कानूनी रूप से मान्य होतीं।”

शपथ पत्र की भूमिका

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इनमें से अधिकांश पंजीकरण मुख्य रूप से शपथ पत्रों (एफिडेविट) पर निर्भर थे। आम तौर पर जोड़े, पुजारी और गवाहों की ओर से तीन या अधिक शपथ पत्र दिए जाते हैं।

वडोदरा के प्रमुख वकील हितेश गुप्ता ने बताया, “ये शपथ पत्र दूल्हे, गवाहों और पुजारी को सुरक्षित रखने के लिए बनवाए जाते हैं, ताकि अगर लड़की परिवार के दबाव में आकर दूल्हे के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करे तो बचाव हो सके। इसका उद्देश्य यह दिखाना होता है कि पंजीकरण वाली जगह पर विवाह समारोह पहले ही हो चुका है।”

उन्होंने यह भी कहा कि विशेष विवाह अधिनियम (Special Marriage Act) के तहत होने वाली लंबी प्रक्रिया से बचने के लिए यह एक आम तरीका बन गया है।

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