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सबरीमाला ‘आदिया शिष्टम’ घी बिक्री घोटाला: केरल हाईकोर्ट की सख्ती के बाद विजिलेंस ने गठित की SIT

| Updated: January 15, 2026 16:16

36 लाख रुपये की हेराफेरी का शक: हाईकोर्ट की फटकार के बाद SP महेश कुमार करेंगे जांच, जानिए क्या है 'आदिया शिष्टम' विवाद

कोच्चि/तिरुवनंतपुरम: विश्व प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में ‘आदिया शिष्टम’ घी (Adiya Sishtam Ghee) की बिक्री में हुई कथित वित्तीय गड़बड़ी के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। केरल हाईकोर्ट द्वारा दिखाई गई सख्ती और स्पष्ट निर्देशों के बाद, विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (VACB) ने मामले की गहराई से जांच करने के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया है। इस जांच दल का नेतृत्व पुलिस अधीक्षक (SP) महेश कुमार करेंगे।

यह फैसला ऐसे संवेदनशील समय में आया है जब पहाड़ी पर स्थित यह पवित्र धर्मस्थल पहले से ही सोने की चोरी के एक मामले के कारण सुर्खियों में है। अब घी बिक्री में घोटाले की खबरों ने सबरीमाला में वित्तीय नियंत्रण और आंतरिक निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हाईकोर्ट ने लिया था स्वतः संज्ञान

विजिलेंस विभाग की यह कार्रवाई हाईकोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान (suo motu) लिए गए एक मामले का परिणाम है। सबरीमाला के विशेष आयुक्त द्वारा सौंपी गई एक रिपोर्ट के आधार पर सुनवाई करते हुए, जस्टिस राजा विजयराघवन वी. और जस्टिस के.वी. जयकुमार की खंडपीठ ने विस्तृत विजिलेंस जांच का आदेश दिया था।

जजों ने मंदिर के काउंटरों पर घी की बिक्री से प्राप्त धन के संभावित गबन (misappropriation) पर गहरी चिंता व्यक्त की थी।

अधिकारियों की मंशा पर उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत ने त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड (TDB) के कुछ अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। पीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों से ऐसा प्रतीत होता है कि मंदिर के राजस्व में जानबूझकर हेराफेरी की गई है।

कोर्ट ने यह भी देखा कि कुछ कर्मचारी संस्थान और भक्तों के हितों की रक्षा करने की अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय, खुद को समृद्ध करने में अधिक रुचि ले रहे थे। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह की लापरवाही पहली बार नहीं हुई है, बल्कि पहले भी ऐसे मुद्दों को उठाया जा चुका है।

अदालत ने जोर देकर कहा कि वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता, जवाबदेही और तकनीक का उपयोग अब कोई विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्य आवश्यकता है। जजों ने चेतावनी दी कि यदि लापरवाही जारी रही, तो यह माना जाएगा कि वरिष्ठ अधिकारी या तो उदासीन हैं या इन गड़बड़ियों में उनकी मिलीभगत है।

लाखों रुपये की हेराफेरी का खुलासा

कोर्ट के निर्देश पर विजिलेंस विभाग ने एक प्रारंभिक सत्यापन किया था, जिसमें कुल 36.24 लाख रुपये की संदिग्ध अनियमितता सामने आई। इसमें से लगभग 13 लाख रुपये सीधे तौर पर 13,679 पैकेट ‘आदिया शिष्टम’ घी की बिक्री से जुड़े थे। आरोप है कि इन पैकेटों की बिक्री से प्राप्त राशि को देवस्वम बोर्ड के खाते में जमा ही नहीं किया गया।

बोर्ड ने पहले ही अदालत को सूचित किया था कि घी बिक्री के पर्यवेक्षण के प्रभारी अधिकारी, सुनील कुमार पोट्टी को आंतरिक जांच में खामियां पाए जाने के बाद निलंबित कर दिया गया है। अब गठित की गई एसआईटी (SIT) हाईकोर्ट की निगरानी में वित्तीय रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर, बिक्री डेटा और इसमें शामिल अधिकारियों की भूमिका की विस्तृत जांच करेगी।

भक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़

भगवान अयप्पा को समर्पित सबरीमाला मंदिर दुनिया के सबसे बड़े वार्षिक तीर्थ स्थलों में से एक है। केरल के पश्चिमी घाट के जंगलों में स्थित यह मंदिर अपनी अनूठी परंपराओं के लिए जाना जाता है, जिसमें तीर्थयात्रा से पहले भक्तों द्वारा 41 दिनों का ‘व्रत’ रखना शामिल है।

हर साल मंडल-मकरविलक्कू सीजन और अन्य उत्सवों के दौरान अनुमानित 3 से 4 करोड़ श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं। इतनी भारी भीड़ के कारण मंदिर को दान, नकद चढ़ावे (कणिक्का), प्रसादम की बिक्री और सोने-चांदी जैसी कीमती वस्तुओं के रूप में भारी राजस्व प्राप्त होता है, जो कई सौ करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है।

इन निधियों का उद्देश्य मंदिर के संचालन और तीर्थयात्रियों की सुविधाओं के लिए होता है, यही कारण है कि सबरीमाला में वित्तीय अनियमितता के आरोपों को जनता के विश्वास और आस्था पर एक गंभीर चोट माना जा रहा है।

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