बीजेपी ने न्यूज़क्लिक पर साधा निशाना, कहा उनका एकमात्र एजेंडा है भारत को बदनाम करना

| Updated: July 18, 2021 7:07 pm

भारतीय जनता पार्टी  ने रविवार को न्यूज़क्लिक वेबपोर्टल पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका एकमात्र एजेंडा भारत को बदनाम करना है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने रविवार शाम को एक प्रेस कॉन्फरन्स को संबोधित करते हुए कहा की न्यूज़क्लिक एक ऐसा पोर्टल है जो ‘खुद को एक मीडिया हाउस के रूप में चित्रित करने की कोशिश करता है’।

संबित पात्रा ने कहा की “इन तथाकथित पोर्टलों और न्यूज़क्लिक का एकमात्र एजेंडा एक विदेशी राष्ट्र का प्रचार प्रसार करना और भारत को बदनाम करना है। कुछ विदेशी शक्तियों और भारतीय राजनेताओं ने मिलकर अशांति फैलाई है। यह एक अंतरराष्ट्रीय टूलकिट का हिस्सा है,”

भाजपा नेता ने यह भी आरोप लगाया कि न्यूज़क्लिक को भारत की सिस्टम को विफल दिखाने और भारत में विदेशी प्रोपागेनडा फैलाने के उद्देश्य से संदिग्ध तरीके से विदेशों से करोड़ों रुपये प्राप्त हुए।

उन्होंने आगे यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को अंजाम देने की अनुमति दे दी है, लेकिन फिर भी कुछ लोग प्रोजेक्ट को नीचा दिखाने के अपने एजेंडे को आगे बढ़ाते रहे जो केवल विदेशी फंडिंग के कारण है।

इससे पहले 7 जुलाई को, दिल्ली उच्च न्यायालय ने न्यूज़क्लिक के एडिटर इन चीफ  प्रबीर पुरकायस्थ और इसके डिरेक्टर प्रांजल पांडे को विदेशी फंडिंग से संबंधित दिल्ली पुलिस की एफआईआर के संबंध में गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की थी और उन्हें जांच में शामिल होने का निर्देश दिया था।

दिल्ली पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग द्वारा दर्ज एफआईआर में आरोप यह है कि पीपीके न्यूज़क्लिक स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड ने कानून के उल्लंघन में वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान वर्ल्डवाइड मीडिया होल्डिंग्स एलएलसी यूएसए से 9.59 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्राप्त किया।

हालांकि, प्रबीर पुरकायस्थ की ओर से पेश वरिष्ठ एडवोकेट कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि यूएस-आधारित कंपनी से फंडिंग न्यूज़क्लिक को उस वर्ष प्राप्त हुई थी जब डिजिटल समाचार मीडिया में एफडीआई पर कोई प्रतिबंध नहीं था।

दर्ज  एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि एक डिजिटल समाचार वेबसाइट में एफडीआई की 26% की कथित सीमा से बचने के लिए कंपनी के शेयरों का बहुत अधिक मूल्य निर्धारण करके निवेश किया गया था। आगे यह भी आरोप लगाया गया था कि इस निवेश का 45% से अधिक वेतन/परामर्श, किराए और अन्य खर्चों के भुगतान के लिए डायवर्ट किया गया था, जिसका भुगतान कथित तौर पर गलत उद्देश्यों के लिए किया हुआ था।

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