नई दिल्ली। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और एआईसीसी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शक्तिसिंह गोहिल ने संसद के उच्च सदन में मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने 13 मार्च 2026 को जारी एक बयान के अनुसार, केंद्र सरकार पर योजनाबद्ध तरीके से भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नष्ट करने और अपने मित्र उद्योगपति गौतम अडानी को फायदा पहुंचाने का गंभीर आरोप लगाया है।
गोहिल ने कहा कि जहां महात्मा गांधी मानते थे कि भारत की असली आत्मा गांवों में बसती है, वहीं मौजूदा सरकार उसी आत्मा का दम घोंटने पर आमादा है, जबकि आज भी देश की 68 प्रतिशत आबादी गांवों में ही निवास करती है।
मनरेगा के बजट में 56,000 करोड़ की भारी कटौती
ग्रामीण विकास और मनरेगा के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए गोहिल ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी के कार्यकाल को याद किया, जब ग्रामीण आय को सुरक्षित करने और मजबूरी में होने वाले पलायन को रोकने के लिए मनरेगा की शुरुआत की गई थी।
उन्होंने सदन में चौंकाने वाले आंकड़े पेश करते हुए बताया कि साल 2025-26 में मनरेगा के लिए 86,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था, जिसे 2026-27 के बजट में 56,000 करोड़ रुपये घटाकर मात्र 30,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
उन्होंने केंद्र सरकार के उस दावे को हास्यास्पद बताया जिसमें बजट कटौती का बोझ राज्य सरकारों पर डालने की बात कही गई है, क्योंकि गुजरात जैसी राज्य सरकारें खुद भारी कर्ज और ओवरड्राफ्ट से जूझ रही हैं।
गोहिल ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा ने मनरेगा को गुजरात की अंतिम संस्कार परंपरा “राम बोलो भाई राम” में तब्दील कर दिया है और गरीबों की इस जीवन रेखा को एक प्रतीकात्मक शोक संदेश बनाकर रख दिया है।
गुजरात में मनरेगा कार्यों में भ्रष्टाचार का आरोप
गोहिल ने दाहोद जिले के धानपुर ब्लॉक के पिपेरो गांव में मनरेगा के तहत हुई कथित अनियमितताओं का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया।
उन्होंने सदन को बताया कि सर्वे नंबर 115 पर गुजरात के पूर्व भाजपा मंत्री बाहुभाई खाबड़ के स्वामित्व वाली निजी जमीन पर कुछ ही महीनों के भीतर मनरेगा के तहत झील, वृक्षारोपण, जमीन समतल करने और एक नहर परियोजना का काम पूरा कर लिया गया। इस मामले में दाहोद में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और सीबीआई जांच कर रही है।
उन्होंने भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की उन टिप्पणियों का भी जिक्र किया जिनमें बिना उचित सामाजिक ऑडिट के राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम का लाभ अपात्रों को मिलने और योग्य नागरिकों के वंचित रहने की बात कही गई है।
ग्रामीण योजनाओं के बजट में कटौती और बढ़ता स्वास्थ्य संकट
कांग्रेस नेता ने सरकार पर ग्रामीण क्षेत्रों की अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं के बजट में भारी कटौती का भी आरोप लगाया। आंकड़ों के अनुसार, जल जीवन मिशन के बजट को 66,000 करोड़ रुपये से घटाकर 17,000 करोड़ रुपये, राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान को 1,064 करोड़ रुपये से 850 करोड़ रुपये, और प्रधानमंत्री आवास योजना को 54,832 करोड़ रुपये से घटाकर 32,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
इसके अलावा, अनुसूचित जनजाति विकास कार्यक्रम में 5,082 करोड़ से 1,580 करोड़ रुपये और मिशन वात्सल्य में 600 करोड़ रुपये की कटौती की गई है।
इन कटौतियों का सीधा असर सामाजिक संकेतकों पर पड़ रहा है, जिसका उदाहरण देते हुए गोहिल ने बताया कि गुजरात में 68 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं और लगभग 60 प्रतिशत किशोर खून की कमी (एनीमिया) के शिकार हैं, जो पूरे भारत में सबसे ज्यादा है।
कृषि मंत्री को ‘कंस’ मामा न बनने की नसीहत
उन्होंने कहा, एक तरफ ग्रामीण योजनाओं के बजट में कटौती हो रही है, तो दूसरी तरफ सरकार कृषि भूमि, चरागाह और गांवों की साझा जमीन को औद्योगिक परियोजनाओं के लिए अडानी समूह को सौंपने पर आमादा है, जिससे ग्रामीण पारिस्थितिकी तंत्र ढह रहा है।
रसोई गैस की उपलब्धता पर व्यंग्य करते हुए गोहिल ने पूछा कि क्या अब गांव वाले अपनी रोटियां नालियों और गटर से निकलने वाली गैस से पकाएंगे, जो प्रधानमंत्री मोदी के उस पुराने दावे पर एक तंज था जिसमें उन्होंने गटर की गैस से चाय बनाने की बात कही थी। कठोर कृषि कानूनों के खिलाफ संघर्ष में जान गंवाने वाले पंजाब और हरियाणा के किसानों को भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए उन्होंने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी नसीहत दी।
गोहिल ने उनसे आग्रह किया कि वे किसानों के लिए एक अच्छे “मामा” बनें और भगवान कृष्ण के उस क्रूर मामा ‘कंस’ की तरह न बनें जिसे इतिहास में सिर्फ अन्याय और अत्याचार के लिए याद किया जाता है।
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