NCERT की कक्षा 8 की किताब से जुड़े हालिया विवाद और सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देशों के बाद, आईआईटी (IIT) गांधीनगर ने एक अहम फैसला लिया है। संस्थान की एक स्थायी समिति अब अपने गेस्ट प्रोफेसर मिशेल दानिनो की भूमिका और उनकी नियुक्ति की समीक्षा करेगी।
गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय ने सरकारों के साथ-साथ सभी सार्वजनिक संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे उस पाठ्यपुस्तक को तैयार करने में शामिल तीन लोगों से खुद को अलग करें। इस किताब को “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” से जुड़े एक विवादित हिस्से के कारण हाल ही में वापस ले लिया गया है।
इस पूरे मामले पर आईआईटी गांधीनगर के निदेशक प्रोफेसर रजत मूना ने संस्थान का रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ध्यान में रखते हुए एक फैकल्टी स्थायी समिति इस नियुक्ति की विस्तार से जांच करेगी और उसके विचार-विमर्श के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
प्रोफेसर मूना ने आगे जानकारी दी कि मिशेल दानिनो पिछले साल जनवरी के अंत तक संस्थान में विजिटिंग फैकल्टी के तौर पर जुड़े हुए थे। इसके बाद उन्हें जरूरत के आधार पर आईआईटी गांधीनगर आने के लिए गेस्ट फैकल्टी के रूप में नियुक्त किया गया था, लेकिन वे तब से संस्थान नहीं आए हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि दानिनो की नियुक्ति अभी भी वैध है, लेकिन अतिथि संकाय सदस्यों को केवल उनके द्वारा दिए गए समय के लिए ही भुगतान किया जाता है और आवश्यकता पड़ने पर ही उन्हें आमंत्रित किया जाता है।
यह कार्रवाई बुधवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी किए गए उन निर्देशों के बाद हो रही है, जिनमें केंद्र, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक संस्थानों से कहा गया था कि वे अब वापस ली जा चुकी कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की किताब में न्यायपालिका पर अध्याय लिखने वाले तीन सदस्यों से दूरी बना लें।
न्यायालय का यह निर्देश तब आया जब एनसीईआरटी के निदेशक डी पी सकलानी ने एक हलफनामे में मिशेल दानिनो, सुपर्णा दिवाकर और आलोक प्रसन्ना कुमार के नामों का आधिकारिक तौर पर खुलासा किया।
हलफनामे में बताया गया कि यह विवादित अध्याय दानिनो की अध्यक्षता वाली टीम द्वारा ही तैयार किया गया था। इस मामले पर प्रतिक्रिया जानने के लिए जब मिशेल दानिनो से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला।
69 वर्षीय मिशेल दानिनो सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तकें विकसित करने वाले पाठ्यचर्या क्षेत्र समूह के अध्यक्ष रहे हैं। अपनी इस भूमिका में उन्होंने कक्षा 6 से 8 तक की सामाजिक विज्ञान की किताबों के निर्माण में एक प्रमुख सदस्य के रूप में काम किया है।
मूल रूप से फ्रांस में जन्मे दानिनो ने अपनी शुरुआती शिक्षा वहीं से पूरी की और साल 1977 में वे भारत आ गए। साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें साल 2017 में भारत के प्रतिष्ठित पद्मश्री पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।
आईआईटी गांधीनगर के साथ दानिनो का एक लंबा और गहरा नाता रहा है। वे साल 2011 में यहां एक अतिथि प्रोफेसर के रूप में शामिल हुए और बाद में जनवरी 2025 तक विजिटिंग प्रोफेसर के पद पर अपनी सेवाएं दीं।
इस संस्थान में वे मुख्य रूप से ‘भारतीय ज्ञान प्रणाली’ (इंडियन नॉलेज सिस्टम्स) पाठ्यक्रम से जुड़े थे और उन्होंने वहां एक पुरातत्व विज्ञान केंद्र स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण मदद की थी।
इससे पहले दानिनो आईआईटी कानपुर में स्कॉलर-इन-रेजिडेंस के तौर पर भी काम कर चुके हैं। उन्होंने साल 2010, 2011 और 2014 में आईआईटी कानपुर में कई विशेष व्याख्यान दिए थे। उनके ये व्याख्यान “सिंधु-सरस्वती सभ्यता”, भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के शुरुआती विकास, और भारतीय सभ्यता की खोज जैसे विषयों पर केंद्रित थे।
उनके इन विचारों और व्याख्यानों ने आईआईटी गांधीनगर सहित देश के अन्य प्रमुख संस्थानों के संकाय सदस्यों के बीच भी काफी ध्यान आकर्षित किया था।
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