ओमान के तट के पास मार्शल द्वीप समूह के ध्वज वाले तेल और रासायनिक टैंकर ‘एमटी लियाकी फ्रीडम’ पर शुक्रवार देर रात संदिग्ध अमेरिकी मिसाइल हमले की खबरें सामने आई हैं। इन शुरुआती खबरों में चालक दल के चार भारतीय सदस्यों की मौत का दावा किया गया था, जिससे एक ही हफ्ते में भारतीय क्रू वाले जहाजों पर यह चौथा कथित हमला माना जा रहा था। हालांकि, भारत सरकार ने इन दावों की गहराई से जांच करने के बाद इन्हें पूरी तरह से खारिज कर दिया है।
समुद्री यातायात पर नजर रखने वाले डेटा के अनुसार, यह कथित घटना उस समय की बताई जा रही थी जब यह टैंकर ओमान के खोर फक्कन से शिनास बंदरगाह की ओर बढ़ रहा था। इस खबर के आते ही हड़कंप मच गया क्योंकि 10 जून से अब तक ईरान पर अमेरिकी नाकेबंदी के दौरान विभिन्न सैन्य ऑपरेशन्स में कथित तौर पर जान गंवाने वाले भारतीय नाविकों की कुल संख्या सात पहुंचने की आशंका जताई जाने लगी थी।
एक विचलित करने वाले ऑडियो कॉल के हवाले से दावा किया गया था कि वाराणसी के रहने वाले एक नाविक ने अपने सहयोगियों के शवों को जहाज के डीप फ्रीजर में रखने की बात कही थी। उसने इस भयावह हमले के पीछे अमेरिकी कार्रवाई को जिम्मेदार ठहराया था। लेकिन इस संवेदनशील मामले पर आधिकारिक बयानों ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है।
विदेश मंत्रालय ने किया दावों का खंडन
भारत के विदेश मंत्रालय ने इस संबंध में त्वरित कार्रवाई करते हुए इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। सरकारी सूत्रों और आधिकारिक बयानों के अनुसार, भारतीय अधिकारियों ने सीधे तौर पर ‘एमटी लियाकी फ्रीडम’ के कैप्टन से संपर्क साधा। जहाज के कैप्टन ने स्पष्ट शब्दों में पुष्टि की है कि जहाज पर मौजूद चालक दल के सभी सदस्य पूरी तरह सुरक्षित हैं और हमले से जुड़ी यह खबर पूरी तरह काल्पनिक और झूठी है।
भले ही लियाकी फ्रीडम पर हमले की यह विशिष्ट खबर गलत साबित हुई हो, लेकिन पिछले एक सप्ताह के दौरान खाड़ी क्षेत्र में हुए अन्य वास्तविक हमलों ने नई दिल्ली की चिंताओं को जरूर बढ़ा रखा है। इससे पहले बुधवार को पलाऊ के ध्वज वाले ‘एमटी सेटेबेलो’ को ओमान तट के पास निशाना बनाया गया था। उस हमले में मुख्य अभियंता पटनाला सुरेश, इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया और डेक कैडेट आदित्य शर्मा सहित तीन भारतीय नाविकों की दर्दनाक मौत हो गई थी, जबकि उसी समय प्रभावित हुए एक अन्य जहाज ‘एमटी मारिवेक्स’ के सभी क्रू सदस्य सुरक्षित बच गए थे।
एक सप्ताह में बढ़े तनावपूर्ण घटनाक्रम
इस समुद्री मार्ग पर गहराते संकट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गुरुवार को भारतीय नौसेना ने कोच्चि के पास ‘ओलंपिक लाइफ’ नामक तेल टैंकर पर मिले एक जीवित मिसाइल वारहेड को सफलतापूर्वक निष्क्रिय किया था। इसके अलावा, उसी दिन गिनी-बिसाऊ के ध्वज वाले ‘एमटी जलवीर’ के इंजन रूम पर भी दो हेलफायर मिसाइलें दागी गई थीं। उस घटना में ओमान के अधिकारियों के समन्वय से सभी 20 भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया था।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी में अपनी इस सैन्य घेराबंदी को एक सोची-समझी दबाव रणनीति का हिस्सा बताया है। सेंटकॉम का कहना है कि वे ईरान को अमेरिकी शांति प्रस्ताव स्वीकार करने के लिए मजबूर कर रहे हैं। उनके अनुसार, यह नाकेबंदी किसी भी देश के ध्वज या नाविकों की राष्ट्रीयता को देखे बिना समान रूप से लागू की जा रही है, जिसके तहत अब तक नियमों का उल्लंघन करने वाले नौ जहाजों को रोका गया है।
इस पूरे घटनाक्रम पर भारत सरकार बेहद गंभीर है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर सुरक्षित और निर्बाध नौवहन की मांग दोहराते हुए गहरी चिंता व्यक्त की है। भारत ने एक वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक को तलब कर अपना कड़ा विरोध भी दर्ज कराया है, जबकि नौवहन महानिदेशालय ने सभी भारतीय नाविकों को इस क्षेत्र में अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी है।
दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने भारतीय क्रू वाले जहाजों पर हो रही इन कार्रवाइयों को ‘राज्य प्रायोजित समुद्री डकैती’ बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। वैश्विक मर्चेंट नेवी में लगभग 10 प्रतिशत की बड़ी हिस्सेदारी रखने वाले भारतीय नाविकों के लिए यह भू-राजनीतिक टकराव एक बड़ी मानवीय चुनौती बन गया है।
यह भी पढ़ें-











