नई दिल्ली। लोकसभा में बुधवार को भारी हंगामे के बीच पेपर लीक से जुड़े मामलों में सख्त सजा और त्वरित सुनवाई का प्रावधान करने वाला विधेयक ध्वनि मत से पारित हो गया। सदन में यह बवाल तब शुरू हुआ जब राहुल गांधी सहित तमाम विपक्षी सांसदों ने 20 जुलाई को छात्रों के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान हुई पुलिसिया कार्रवाई पर सरकार से जवाब की मांग की।
हंगामे से पहले सदन में एंटी-पेपर लीक बिल पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच काफी जोरदार चर्चा हुई। करीब आठ घंटे तक बिना किसी खास रुकावट के दोनों पक्षों ने अपने विचार रखे और एक-दूसरे पर जमकर आरोप-प्रत्यारोप भी लगाए। लेकिन सदन का माहौल उस वक्त पूरी तरह से गरमा गया जब राहुल गांधी ने पुलिस द्वारा छात्रों पर ‘फायरिंग’ करने का गंभीर आरोप मढ़ दिया।
राहुल गांधी ने शुरुआत में आरोप लगाया कि गृह मंत्री के इशारे पर छात्रों पर पैलेट गन चलाई गई। इसके बाद उन्होंने अपना हमला और तेज करते हुए यहां तक कह दिया कि गृह मंत्री ने सीधे फायरिंग का आदेश दिया था। इस दौरान उन्होंने भाजपा नेतृत्व पर निशाना साधने के लिए कई बार असंसदीय शब्दों का भी इस्तेमाल किया, जिससे सदन में तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।
सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026 को पेश करने वाले कार्मिक मंत्री जितेंद्र सिंह ने विपक्ष के इन हमलों का कड़ा जवाब दिया। उन्होंने बताया कि सरकार ने नीट (NEET) पेपर लीक मामले में बेहद तेजी से कार्रवाई की है। उन्होंने जानकारी दी कि साल 2024 में एंटी-पेपर लीक कानून लागू होने के बाद से अब तक कुल 52 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। मंत्री ने राहुल गांधी पर संसदीय मर्यादाओं और सरकारी कामकाज की समझ न होने का भी तंज कसा।
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने इसी बीच निर्दोष बच्चों पर अत्याचार और दमन का आरोप लगाया था। इसका जवाब देते हुए मंत्री जितेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि प्रशासन ने बहुत संयम बरता था। उन्होंने कहा कि पुलिस ने यह सुनिश्चित किया कि इस कार्रवाई में किसी की जान न जाए। विधेयक पारित होने के दौरान हुए इस शोर-शराबे पर मंत्री ने निराशा जताते हुए कहा कि विपक्ष इस गंभीर मुद्दे पर सुझाव देने के बजाय सिर्फ राजनीति कर रहा है।
नए संशोधन विधेयक 2026 के अनुसार, अब पेपर लीक मामलों की जांच हर हाल में दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी। परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने या पेपर लीक में शामिल पाए जाने वाले व्यक्तियों को न्यूनतम पांच साल और अधिकतम 10 साल तक की जेल हो सकती है। इसके साथ ही दोषियों पर 50 लाख रुपये तक का भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा।
संगठित अपराधों के मामले में यह नया बिल और भी ज्यादा सख्त है। इसके तहत माफिया या गिरोह को कम से कम सात साल की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस कानून के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट गठित करने का अधिकार भी दिया गया है।
राजग (NDA) सरकार के कार्यकाल में शिक्षा क्षेत्र में गिरावट के दावों को सिरे से खारिज करते हुए जितेंद्र सिंह ने सदन में आंकड़े भी पेश किए। उन्होंने बताया कि देश में विश्वविद्यालयों की संख्या 760 से बढ़कर 1,293 हो गई है, जबकि उच्च शिक्षण संस्थानों की संख्या 51,534 से बढ़कर 64,896 तक पहुंच गई है।
प्रियंका गांधी वाड्रा द्वारा 152 पेपर लीक घटनाओं का दावा किए जाने पर मंत्री ने सवाल उठाते हुए पूछा कि इस आंकड़े का स्रोत आखिर क्या है। अंत में उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष से कहीं ज्यादा सरकार को ऐसी घटनाओं के कारण होने वाली मौतों का दुख है और सख्त कदमों के कारण अब पेपर लीक से जुड़ी आत्महत्या की दर में भी कमी आई है।
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