अमेरिका के पेंसिल्वेनिया राज्य में एक बड़े ड्रग तस्करी और हवाला रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। इस मामले में कम से कम 10 गुजरातियों को गिरफ्तार किया गया है। पेंसिल्वेनिया के अटॉर्नी जनरल कार्यालय के अनुसार, यह गिरोह पूरे राज्य में अवैध टीएचसी (टेट्राहाइड्रोकैनाबिनोल) और मारिजुआना (गांजा) उत्पादों की आपूर्ति कर रहा था।
इसके अलावा, अवैध कमाई के करोड़ों डॉलर हवाला के जरिए इधर-उधर करने का भी आरोप है। इस बड़े ड्रग नेटवर्क की जांच दिसंबर 2024 में शुरू हुई थी।
इस मामले में पकड़े गए आरोपियों की पहचान धर्मेश पटेल, मितुल पटेल, अंकित पटेल, केतन पटेल, रोशनी पटेल, पलक पटेल, दिव्येश पटेल, नीरव पटेल, माधव पटेल और अल्बीना पटेल के रूप में हुई है। अधिकारियों ने इन सभी पर भ्रष्ट संगठन चलाने, नियंत्रित पदार्थों की तस्करी करने और उन्हें बेचने के इरादे से अपने पास रखने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
अदालती दस्तावेजों से पता चलता है कि यह गिरोह कई ‘लिमिटेड लायबिलिटी कंपनियों’ (एलएलसी) की आड़ में काम कर रहा था। उन्होंने वेस्टमोरलैंड और एलेघेनी काउंटी में वेयरहाउस बना रखे थे, जिनमें प्लम स्थित एक बड़ा गोदाम भी शामिल था। इन गोदामों से स्थानीय वेप शॉप्स के जरिए पूरे राज्य में टीएचसी उत्पादों की सप्लाई की जाती थी। जांचकर्ताओं के मुताबिक सबसे चिंताजनक बात यह है कि ये नशीले उत्पाद स्कूली बच्चों तक भी पहुंच रहे थे।
तस्करी के अलावा, जांच में एक बड़े वित्तीय नेटवर्क का भी खुलासा हुआ है। ड्रग्स की बिक्री से मिलने वाले पैसे को विभिन्न व्यापारिक संस्थाओं और बैंकों के जरिए घुमाया जाता था। जांचकर्ताओं ने पाया कि आरोपियों से जुड़ी कंपनियों के करीब 37 वित्तीय संस्थानों में खाते थे। अदालत में पेश किए गए दस्तावेजों के मुताबिक, केवल एक खाते में जनवरी से मई 2025 के बीच दो करोड़ डॉलर (लगभग 20 मिलियन डॉलर) का लेन-देन दर्ज किया गया। अधिकारी इस मामले में हवाला और अनौपचारिक चैनलों के जरिए नकदी की हेराफेरी के एंगल से भी जांच कर रहे हैं।
इस अवैध कारोबार के पैमाने का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सितंबर 2025 में जब अधिकारियों ने गोदामों पर छापेमारी की, तो वहां से करीब 1.4 लाख अवैध नशीले आइटम जब्त किए गए। अकेले प्लम के गोदाम से ही 12,000 प्रतिबंधित वस्तुएं बरामद हुईं। जब्त किए गए माल में टीएचसी मिली हुई कैंडीज (गमीज), अवैध वेप उत्पाद और मारिजुआना जॉइंट्स शामिल हैं।
इस जब्ती से पहले जांचकर्ताओं ने एक अंडरकवर ऑपरेशन भी चलाया था, जिसके तहत गोदामों से सीधे खरीदारी की गई थी। जांच में सामने आया है कि कुछ चुनिंदा सदस्य गोदाम का कामकाज संभालते थे, जबकि गाड़ियों और अन्य लोगों के जरिए माल पेंसिल्वेनिया के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचाया जाता था।
इन उच्च क्षमता वाले नशीले उत्पादों के खतरों का अंदाजा एक दिल दहला देने वाली घटना से लगता है। वेस्टमोरलैंड काउंटी की एक महिला ने ग्रैंड जूरी को बताया कि उसकी चार साल की बच्ची को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। बच्ची ने गलती से स्थानीय वेप शॉप से खरीदी गई टीएचसी वाली कैंडी खा ली थी।
आरोपियों में क्रैनबेरी के दिव्येश पटेल व पलक पटेल और पिट्सबर्ग की अल्बीना पटेल पर भ्रष्ट संगठन संचालित करने का मामला दर्ज हुआ है। मुनहॉल के माधव व नीरव, हंटिंगडन वैली के अनिल पटेल और बेनसालेम के धर्मेश पर भी इस मामले में आरोप तय किए गए हैं। वहीं, बेनसालेम के केतन और हंटिंगडन वैली की रोशनी पर आपराधिक साजिश रचने के अतिरिक्त आरोप लगे हैं।
गिरफ्तारी के बाद माधव, नीरव, अंकित, पलक और दिव्येश को वेस्टमोरलैंड काउंटी जेल भेज दिया गया। जानकारी के मुताबिक, ये आरोपी एक लाख डॉलर से लेकर पांच लाख डॉलर तक का बांड नहीं भर पाए, जिसके चलते वे हिरासत में हैं। दूसरी तरफ अल्बीना, केतन, धर्मेश और रोशनी को बिना सुरक्षित बांड (अनसिक्योर्ड बांड) के रिहा कर दिया गया है। मामले की प्राथमिक सुनवाई 23 सितंबर को तय की गई है।
अटॉर्नी जनरल कार्यालय ने बताया कि इस पूरी जांच और कार्रवाई में वेस्टमोरलैंड काउंटी ड्रग टास्क फोर्स, बक्स काउंटी के जासूस और पेंसिल्वेनिया राज्य पुलिस की अहम भूमिका रही है। फिलहाल अधिकारी इस नेटवर्क के वित्तीय लेन-देन और अन्य गतिविधियों की गहराई से जांच कर रहे हैं।
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