लंदन: ब्रिटेन में भारतीय मूल के एक युवा ने इतिहास रच दिया है। महज 20 साल की उम्र में देश के सबसे कम उम्र के भारतीय मूल के पार्षद बनने वाले तुषार कुमार अब तीन साल बाद ब्रिटेन के सबसे युवा भारतीय मूल के मेयर बन गए हैं। उन्होंने पार्षद से लेकर डिप्टी मेयर और फिर शीर्ष पद तक का सफर बेहद कम समय में तय किया है।
हरियाणा के रोहतक में जन्मे तुषार 10 साल की उम्र तक वहीं रहे। पिछले सप्ताह ही उन्हें एल्सट्री और बोरहमवुड टाउन काउंसिल का मेयर चुना गया है। शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले उनके माता-पिता 13 साल पहले रोहतक से ब्रिटेन आकर बस गए थे।
मई 2023 में जब तुषार पहली बार पार्षद बने थे, तब वे किंग्स कॉलेज लंदन में राजनीति विज्ञान (बीएससी पॉलिटिक्स) के द्वितीय वर्ष के छात्र थे। उन्होंने लेबर पार्टी के उम्मीदवार के रूप में 832 वोट हासिल किए थे।
रिकाउंटिंग के बाद उन्होंने कंजर्वेटिव पार्टी के उम्मीदवार को मात्र एक वोट के अंतर से हराया था। यह जीत इसलिए भी खास थी क्योंकि कंजर्वेटिव पार्टी ने तीन दशकों तक इस सीट पर अपना कब्जा जमाए रखा था।
तुषार अपनी इस सफलता का मुख्य प्रेरणास्रोत अपनी मां परवीन रानी को मानते हैं। उनकी मां ने भी हर्ट्समियर बरो काउंसिल में चुनाव लड़ा और जीत हासिल की, जिसके बाद वे वहां की डिप्टी मेयर भी बनीं।
मेयर के रूप में तुषार एक महत्वपूर्ण नागरिक भूमिका निभाएंगे। वह विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे, समुदाय का प्रतिनिधित्व करेंगे और स्थानीय चैरिटी व समूहों का समर्थन करेंगे। इस युवा मेयर का कहना है कि वह जनता के लिए हमेशा आसानी से उपलब्ध रहना चाहते हैं और खुद को आम लोगों से “ऊपर” नहीं मानते।
स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद तुषार वर्तमान में फुल-टाइम नौकरी कर रहे हैं। उनकी योजना इस सितंबर में यूसीएल (UCL) से पॉलिटिकल इकोनॉमी में मास्टर डिग्री शुरू करने की है। अपनी उच्च शिक्षा हासिल करने के दौरान भी वह मेयर के पद पर बने रहेंगे। उनका कहना है कि वे युवाओं को सामुदायिक जीवन और सार्वजनिक सेवा से जुड़ने के लिए प्रेरित करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं।
तुषार स्कूलों और विश्वविद्यालयों में भाषण देने के लिए अक्सर भारत आते रहते हैं। उनका कहना है कि वह भारत से बहुत गहराई से जुड़े हुए हैं। उनकी मां ने उन्हें अपनी संस्कृति और जड़ों से जुड़े रहना सिखाया है। तुषार ने ही काउंसिल में पहली बार दिवाली समारोह का आयोजन करवाया था, जो अब वहां का एक वार्षिक कार्यक्रम बन चुका है।
पांच ‘ए’ लेवल और 21 ‘जीसीएसई’ (GCSE) की योग्यता रखने वाले तुषार बताते हैं कि भारत में उनके परिवार का कोई राजनीतिक बैकग्राउंड नहीं रहा है। वह खुद को अपने मूल देश की राजनीति में शामिल होते हुए नहीं देख पाते। उनका मानना है कि भारत की राजनीति बहुत अलग है और उसमें प्रवेश करना काफी मुश्किल है, जबकि यूके में उनके लिए अधिक अवसर मौजूद हैं।
तुषार की मां ‘हिंदी शिक्षा परिषद यूके’ की संस्थापक हैं, जो लोगों को मुफ्त में हिंदी भाषा की कक्षाएं प्रदान करती है। समय मिलने पर तुषार भी वहां अपनी स्वैच्छिक सेवाएं देते हैं।
अगर करियर की महत्वाकांक्षाओं की बात करें, तो तुषार भविष्य में यूके का प्रधानमंत्री बनने का सपना देखते हैं। उनका कहना है कि ऋषि सुनक को देश का प्रधानमंत्री बनते देखना निश्चित रूप से उनके लिए एक बहुत बड़ी प्रेरणा थी।
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