27 अप्रैल की दोपहर करीब 1 बजे, सूरत के वराछा रोड स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की शाखा में तीन मोटरसाइकिलों पर सवार सात बदमाश दाखिल हुए। उन्होंने बैंक में मौजूद छह कर्मचारियों और सात ग्राहकों के मोबाइल फोन छीन लिए और उन सभी को एक कोने के कमरे में बंधक बना दिया।
इसके बाद अपराधियों ने बैंक प्रभारी किरण भोगे के सिर पर बंदूक तानकर उन्हें जान से मारने की धमकी दी। बदमाशों ने कहा, “वॉल्ट रूम की चाबी दे, नहीं तो मुंह में गोली मार दूंगा।”
उस वक्त बैंक मैनेजर शाखा में मौजूद नहीं थे, जिसके कारण लुटेरों को तिजोरी की चाबी नहीं मिल सकी। कोई और विकल्प न देख बदमाशों ने बैंक में रखे करीब 50 लाख रुपये नकद लूटे और वहां से फरार हो गए।
इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच करते हुए सूरत क्राइम ब्रांच ने उत्तर प्रदेश के गोंडा से दो आरोपियों शुभम ठाकुर (24) और विक्रम सिंह राजपूत (30) को गिरफ्तार कर लिया। इन दोनों को 7 मई को अदालत में पेश किया गया।
जांच आगे बढ़ने पर जल्द ही इस लूट के असली मास्टरमाइंड का खुलासा हो गया। यह पूरी साजिश 29 वर्षीय कुंदन कुमार उर्फ कुंदन भगत ने रची थी, जो पिछले छह महीने से पटना की बेउर जेल में बंद है। पुलिस और जांचकर्ताओं के अनुसार, कुंदन नागालैंड से लेकर गुजरात तक फैले रंगदारी, डकैती और हथियारों की तस्करी के एक बड़े नेटवर्क से जुड़ा है।
सूरत बैंक डकैती से पहले भी बिहार पुलिस उस पर कम से कम पांच मामले दर्ज कर चुकी थी। इसके अलावा, राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) ने भी उसे आतंकवाद से जुड़ी एक जांच में आरोपी बनाया है। कुंदन को जेल के भीतर से ही अपना क्राइम सिंडिकेट चलाने में माहिर माना जाता है।
सूरत जांच दल के अधिकारियों ने बताया कि कुंदन को कीमती धातुओं, रत्नों और आभूषणों का भारी शौक है। दिलचस्प बात यह है कि उसका यह शौक उसके नाम ‘कुंदन’ को भी सार्थक करता है, जिसका अर्थ शुद्ध सोना या आभूषण डिजाइन करने की एक खास तकनीक होता है।
कुंदन साल 2023 में उत्तराखंड के देहरादून के एक ज्वेलरी शोरूम में हुई 14 करोड़ रुपये के सोने की डकैती का भी मुख्य संदिग्ध है। बिहार पुलिस ने उसे 2025 में लूटे गए माल के एक हिस्से के साथ गिरफ्तार किया था।
अधिकारियों के मुताबिक, कुंदन ने गुजरात की आर्थिक राजधानी सूरत को इसलिए अपना निशाना बनाया क्योंकि वह वहां के फलते-फूलते हीरा व्यापार से बहुत अच्छी तरह वाकिफ था। उसे यह भी जानकारी थी कि SBI की वराछा शाखा सूरत में गोल्ड लोन पास करने वाली दूसरी सबसे बड़ी शाखा है। उसे पूरी उम्मीद थी कि इस बैंक की तिजोरियों में उसे भारी मात्रा में सोना मिलेगा।
शुक्रवार को गुजरात पुलिस की एक टीम ने सूरत की अदालत द्वारा जारी किया गया प्रोडक्शन वारंट बेउर जेल के अधीक्षक को सौंपा। वे 27 अप्रैल की डकैती के सिलसिले में कुंदन की कस्टडी हासिल करना चाहते हैं।
सोमवार को पटना में अदालती औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें कुंदन की कस्टडी मिलने की उम्मीद थी। वराछा के पुलिस इंस्पेक्टर ए आर वाला ने बताया कि कुंदन भगत एक कुख्यात और कट्टर अपराधी है जिस पर कई मामले दर्ज हैं। उन्होंने कहा कि बिहार पुलिस की मदद से उसे जल्द ही सूरत लाया जाएगा।
बेउर की आदर्श सेंट्रल जेल के अधीक्षक जितेंद्र कुमार ने जानकारी दी कि कुंदन भगत पिछले कई महीनों से उनके पास है और वर्तमान में एक उच्च सुरक्षा वाली सेल में बंद है।
उन्होंने बताया कि सूरत पुलिस द्वारा लाए गए प्रोडक्शन वारंट के दस्तावेज स्थानीय अदालत में जमा कर दिए गए हैं और अब वे आदेश का इंतजार कर रहे हैं। अदालत से अनुमति मिलते ही कुंदन की कस्टडी सूरत पुलिस को सौंप दी जाएगी।
इंस्पेक्टर वाला के मुताबिक, कुंदन से पूछताछ के बाद इस बैंक डकैती को अंजाम देने वाले गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचने में काफी मदद मिलेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुंदन ही इस वारदात का मुख्य साजिशकर्ता है और उसने ही इस अपराध के लिए अलग-अलग अपराधियों को काम पर रखा था। इस बैंक डकैती में शामिल पांच आरोपी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।
जांच के सिलसिले में 8 मई को सूरत पुलिस गोंडा से गिरफ्तार किए गए शुभम ठाकुर और विक्रम राजपूत को सूरत शहर के उत्तर में किम टाउन के पास कन्यास गांव ले गई थी। डकैती में इस्तेमाल की गई तीनों बाइकें आरोपियों ने यहीं लावारिस छोड़ दी थीं। पुलिस के अनुसार, वारदात में इस्तेमाल किए गए हथियार भी उसी जगह छिपाए गए थे।
जब पुलिस टीम हथियारों की बरामदगी के लिए वहां पहुंची, तो आरोपी शुभम ठाकुर ने एक पत्थर के नीचे से लोडेड पिस्तौल निकाली और पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। अधिकारियों ने बताया कि इस घटना में कोई भी पुलिसकर्मी घायल नहीं हुआ। जवाबी कार्रवाई में सूरत क्राइम ब्रांच के सहायक पुलिस आयुक्त के आई मोदी ने अपनी सर्विस रिवॉल्वर से गोली चलाई, जो ठाकुर के पैर में जा लगी।
मुजफ्फरपुर जिले के बिशंभरपुर गांव के रहने वाले एक सीमांत किसान के बेटे कुंदन को 16 नवंबर 2025 को बिहार पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने गिरफ्तार किया था। यह गिरफ्तारी 2023 की देहरादून डकैती और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) तथा आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज NIA के एक मामले के सिलसिले में हुई थी। वह पिछले साल 18 नवंबर से बेउर जेल में बंद है।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, कुंदन ने 2019 में उत्तर बिहार स्थित छोटू राणा-आशुतोष राणा गैंग के जरिए अपराध की दुनिया में कदम रखा था। बाद में वह सुबोध गैंग से जुड़ गया।
यह गैंग कई राज्यों में सोने की डकैती और तस्करी के बड़े मामलों में शामिल रहा है, जिसमें देहरादून की 14 करोड़ रुपये की डकैती भी शामिल है। बिहार के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि एक छोटे से आपराधिक गिरोह से शुरुआत करने वाले कुंदन ने बाद में हथियारों के एक बड़े रैकेट का रूप ले लिया।
इस साल 15 अप्रैल को, NIA ने अवैध हथियारों की तस्करी से जुड़े 2024 के एक मामले में कुंदन के खिलाफ चार्जशीट दायर की है। NIA के मुताबिक, कुंदन नागालैंड से प्रतिबंधित बोर के हथियारों की अवैध खरीद और तस्करी में सक्रिय रूप से शामिल था।
ये अत्याधुनिक हथियार बिहार में नक्सलियों और अपराधियों को सप्लाई किए जाते थे। इस मामले की शुरुआत बिहार पुलिस द्वारा लेंस के साथ एक AK-47 राइफल की जब्ती से हुई थी। इस गंभीर मामले में कुंदन चार्जशीट किया गया छठा आरोपी है।
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