गुजरात के मोरबी से एक रूह कंपा देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक बेबस पिता और पति ने इंसानियत की सारी हदें पार कर दीं। हर महीने महज़ 2,000 रुपये का मकान किराया न चुका पाने की एवज में इस शख्स ने अपनी ही पत्नी और 13 साल की मासूम बेटी को मकान मालिक और उसके रिश्तेदार के हवाले कर दिया। आरोपी पति का कहना है कि वह काम की तलाश में गुजरात आया था, लेकिन पिछले कुछ समय से उसके पास न तो कोई काम था और न ही पैसे आ रहे थे।
यह खौफनाक मामला 1 मई को मोरबी सिटी ए डिवीजन पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी किरायेदार पति और 55 वर्षीय मकान मालिक दोनों को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, इस घिनौने अपराध में शामिल मकान मालिक का रिश्तेदार और उसकी मदद करने वाले परिवार के अन्य सदस्य फिलहाल फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस सरगर्मी से जुटी हुई है।
कर्ज का जाल और एक प्रवासी परिवार की बेबसी
पीड़ित परिवार करीब छह महीने पहले काम की तलाश में गुजरात के बाहर से मोरबी आया था। मोरबी शहर सिरेमिक और घड़ी निर्माण का एक बहुत बड़ा केंद्र है, जहां पूरे भारत से प्रवासी मजदूर काम की तलाश में आते हैं। यह परिवार भी उन्हीं हजारों मजदूरों में से एक था जो फैक्ट्रियों के आस-पास किराये के छोटे कमरों में अपना गुजर-बसर करते हैं।
पति ने 2,000 रुपये प्रति माह पर मकान किराये पर लिया था। लेकिन जैसे-जैसे काम मिलना कम हुआ या उसकी कमाई अपर्याप्त साबित हुई, वह किराया नहीं चुका सका और उस पर कर्ज का बोझ बढ़ता गया। पीड़ितों की मां और दादी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, बकाया किराया बढ़ने के बाद मकान मालिक ने वसूली का एक बेहद खौफनाक और अमानवीय रास्ता निकाला।
बार-बार लूटी गई आबरू
पति की सहमति मिलने के बाद, मकान मालिक ने 13 साल और 7 महीने की नाबालिग बेटी के साथ बार-बार दुष्कर्म किया। यह कोई एक बार की घटना नहीं थी। आरोपी मकान मालिक ने नाबालिग को अपनी हवस का शिकार अलग-अलग जगहों पर बनाया।
इनमें उसका अपना घर, किराये का कमरा और मोरबी से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित टंकारा शहर शामिल हैं। इसके अलावा, मकान मालिक के रिश्तेदार पर अलग से महिला (पत्नी) के साथ बलात्कार करने का आरोप है।
इस मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि पुलिस में शिकायत पत्नी या बेटी ने नहीं, बल्कि महिला की मां यानी नाबालिग पीड़िता की नानी ने दर्ज कराई है। यह महत्वपूर्ण तथ्य इस बात को दर्शाता है कि खुद उस परिवार के मुखिया ने ही उन्हें इस नरक में धकेल दिया था और उन बेचारी महिलाओं को बचाने वाला वहां कोई नहीं था।
पुलिस कार्रवाई और कानूनी धाराएं
पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम की कई गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। चूंकि घटना के समय बच्ची नाबालिग थी, इसलिए पोक्सो एक्ट लागू किया गया है। इस एक्ट के तहत समयबद्ध जांच और पीड़िता की पहचान पूरी तरह से गुप्त रखने का सख्त प्रावधान है।
आरोपी किरायेदार पति को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। 55 वर्षीय मकान मालिक को अदालत में पेश किया गया था, जहां से उसे शुरुआत में पूछताछ और सबूत जुटाने के लिए एक दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया। रिमांड अवधि पूरी होने के बाद उसे भी न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
मोरबी सिटी ए डिवीजन के पुलिस इंस्पेक्टर वाई बी जडेजा ने पुष्टि की है कि क्राइम सीन का पंचनामा पूरा कर लिया गया है। दोनों पीड़िताओं और आरोपियों का मेडिकल परीक्षण भी हो चुका है और जरूरी वैज्ञानिक सबूत इकट्ठा कर लिए गए हैं। पुलिस की एक टीम फरार रिश्तेदार और इस अपराध में मदद करने वाले अन्य आरोपियों की सरगर्मी से तलाश कर रही है।
प्रवासी मजदूरों का दर्द और सिस्टम की नाकामी
यह मामला केवल कुछ व्यक्तियों के आपराधिक आचरण तक सीमित नहीं है। यह प्रवासी मजदूरों की उस गहरी मजबूरी और सामाजिक बेबसी को भी उजागर करता है जिस पर शायद ही कभी ध्यान दिया जाता है। मोरबी के सिरेमिक उद्योग में हजारों की संख्या में प्रवासी मजदूर काम करते हैं, जो ज्यादातर उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और ओडिशा से आते हैं।
ये मजदूर अक्सर फैक्ट्रियों के क्वार्टर या अनौपचारिक बस्तियों में किराये पर रहते हैं। उनके पास स्थानीय निवासी होने का कोई दस्तावेज नहीं होता, न ही उनकी कोई राजनीतिक आवाज होती है।
ज्यादातर मामलों में ट्रेड यूनियन का समर्थन भी उन्हें नहीं मिलता और मकान मालिक-किरायेदार का कोई ऐसा कानूनी ढांचा नहीं है जो उन्हें प्रभावी रूप से सुरक्षा दे सके। जब काम मौसमी होता है या वेतन रोक लिया जाता है, तो उन पर कर्ज बढ़ना स्वाभाविक है और ऐसे में इन मजदूरों के पास कोई रास्ता नहीं बचता।
मात्र 2,000 रुपये का किराया इस पूरी त्रासदी की भयावहता को बयां करता है। यह रकम अहमदाबाद के किसी अच्छे रेस्टोरेंट में दो लोगों के खाने के बिल से भी कम है। लेकिन इसी मामूली रकम के लिए एक व्यक्ति ने अपनी ही पत्नी और बच्ची का सौदा कर दिया।
कानूनी पहलू और सजा का प्रावधान
पोक्सो एक्ट के तहत, 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चे के साथ विश्वास या अधिकार के पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा किया गया यौन उत्पीड़न एक बेहद गंभीर और ‘एग्रेवेटेड’ अपराध माना जाता है। मकान मालिक होने के नाते आरोपी परिवार के सिर की छत छिनने के अधिकारिक स्थिति में था। इन कड़े प्रावधानों के तहत दोषी पाए जाने पर कम से कम 20 साल की सजा का प्रावधान है, जिसे आजीवन कारावास या मौत की सजा तक भी बढ़ाया जा सकता है।
पति की आपराधिक जिम्मेदारी भी बेहद संगीन है। बीएनएस के तहत, दुष्कर्म और वह भी एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म के लिए उकसाने पर कड़ी सजा मिलती है। पिता ने न केवल अपनी सहमति दी, बल्कि मकान मालिक को अपनी पत्नी और बेटी तक आसानी से पहुंचने दिया। कानून की नजर में वह अपने ही परिवार के खिलाफ हुए इस जघन्य अपराध में बराबर का भागीदार और सह-साजिशकर्ता है।
पीड़िता की नानी द्वारा शिकायत दर्ज कराना यह बताता है कि पीड़ित महिलाएं डर के कारण या कानूनी विकल्पों की जानकारी न होने के कारण खुद आगे नहीं आ सकीं। यह ऐसे मामलों में आम है जहां पीड़ित आरोपियों के खौफ में जीते हैं। अभियोजन पक्ष के लिए नानी की गवाही बेहद अहम होगी, क्योंकि उनकी गवाही उनकी बेटी और नातिन द्वारा बताई गई आपबीती पर आधारित होगी।
जांच की वर्तमान स्थिति
शुक्रवार, 16 मई तक यह जांच अभी शुरुआती चरण में है। पंचनामा पूरा हो चुका है और फोरेंसिक सबूत जुटा लिए गए हैं, जो अदालत में काफी अहम साबित होंगे क्योंकि आरोपी इन आरोपों को खारिज करने की पूरी कोशिश करेंगे। पीड़िताओं की मेडिकल रिपोर्ट इस केस में अभियोजन पक्ष का सबसे मजबूत आधार बनेगी।
पुलिस इंस्पेक्टर जडेजा ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच एक साथ कई मोर्चों पर चल रही है। हमलों की संख्या, अलग-अलग घटनास्थल और एक से अधिक आरोपियों की मिलीभगत इसे एक बेहद जटिल मामला बनाती है। फरार आरोपियों (मकान मालिक के रिश्तेदार और परिवार के सदस्यों) की गिरफ्तारी के बाद ही इस पूरी साजिश की कड़ियां जुड़ सकेंगी।
पोक्सो एक्ट और पत्रकारिता के नियमों का पूरी तरह से पालन करते हुए इस रिपोर्ट में पीड़िताओं के नाम गुप्त रखे गए हैं।
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