गुजरात जैसे ड्राई स्टेट के व्यापारिक केंद्र अहमदाबाद में शराब तस्कर अक्सर पुलिस को चकमा दे जाते हैं। लेकिन सरखेज पुलिस की हालिया कार्रवाई में कम से कम एक ‘आरोपी’ घटनास्थल पर ही छूट गया, और वह है एक मोटरसाइकिल।
रविवार को सरखेज पुलिस ने शराबबंदी कानून के तहत एक मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई पुराने वंझर गांव के पास साबरमती नदी के तल में चल रही एक शराब भट्टी पर की गई थी।
यहां से एक कथित शराब तस्कर पुलिस के हत्थे चढ़ने से चंद पल पहले ही घनी झाड़ियों में गायब हो गया। भागते समय वह अपनी लाल धारियों वाली काले रंग की मोटरसाइकिल वहीं छोड़ गया।
सहायक कांस्टेबल कनकसिंह लखधीरसिंह द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के अनुसार, दोपहर के समय पुलिस टीम इलाके में गश्त कर रही थी। तभी उन्हें गुप्त सूचना मिली कि नदी के तल में शराब बनाई जा रही है।
पंच गवाहों और पुलिस स्टाफ के साथ अधिकारी संकरे रास्तों और झाड़ियों से होते हुए आगे बढ़े, जहां उन्हें एक जगह से धुआं उठता हुआ दिखाई दिया।
मौके पर पहुंचने पर पुलिस ने कथित तौर पर एक व्यक्ति को चालू शराब भट्टी के पास मोटरसाइकिल पर बैठे देखा। लेकिन इससे पहले कि पुलिस टीम उसे पकड़ पाती, संदिग्ध ने उन्हें दूर से ही देख लिया। वह अपनी मोटरसाइकिल को उसके हाल पर छोड़कर वहां से तेजी से भाग निकला।
इस मामले की सबसे हैरान करने वाली बात एफआईआर में दर्ज विवरण है। पुलिस ने कानूनी कार्रवाई के लिए ‘लाल धारियों वाली ब्लैक हीरो स्प्लेंडर मोटरसाइकिल’ को ही ‘आरोपी’ के रूप में नामजद कर दिया है।
इस अजीबोगरीब स्थिति पर एक पुलिस सूत्र का कहना है कि जब कोई आरोपी फरार हो जाता है, तो कुछ पुलिस स्टेशन मौके पर मिली चीजों को ही आरोपी बना देते हैं। सूत्र के मुताबिक, यह रवैया सिर्फ पुलिस की लापरवाही और सुस्त कार्यप्रणाली को दर्शाता है।
एफआईआर में मोटरसाइकिल का रजिस्ट्रेशन नंबर, इंजन नंबर और चेसिस नंबर सावधानीपूर्वक दर्ज किया गया है। वहीं, असल शराब तस्कर आधिकारिक तौर पर अभी भी “अज्ञात” ही है।
छापे के दौरान पुलिस ने 240 लीटर देसी शराब और शराब बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला करीब 1,100 लीटर ‘वॉश’ जब्त करने का दावा किया है। यह वॉश लोहे के ड्रमों और प्लास्टिक लगे गड्ढों में जमा किया गया था। इसके अलावा मौके से एल्यूमीनियम के बर्तन, मापने वाले उपकरण और एक लॉक किया हुआ मोबाइल फोन भी बरामद हुआ है।
पुलिस ने जब्त की गई हर वस्तु का बाजार मूल्य तय किया है। कुल मुद्दमाल (जब्त सामग्री) की कीमत 1.12 लाख रुपये आंकी गई है। इसमें 30,000 रुपये की कीमत वाली वह मोटरसाइकिल भी शामिल है, जो अब इस शराबबंदी मामले की अहम गवाह बन गई है।
एफआईआर में इस बात का भी जिक्र है कि ‘तकनीकी खराबी’ के कारण पुलिस के ई-साक्ष्य (e-Sakshya) प्लेटफॉर्म के तहत मौके पर ई-पंचनामा पूरा नहीं किया जा सका। इसलिए इस कानूनी प्रक्रिया को बाद में पुलिस स्टेशन ले जाकर पूरा किया गया।
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