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अहमदाबाद में सड़क हादसों का खौफनाक सच: पैदल चलने वाले और साइकिल सवार सबसे ज्यादा असुरक्षित

| Updated: May 8, 2026 17:17

NCRB रिपोर्ट 2024 का चौंकाने वाला खुलासा: अहमदाबाद में सड़क हादसों का सबसे बड़ा शिकार बन रहे हैं पैदल यात्री और साइकिल सवार

साल 2024 में अहमदाबाद शहर ने सड़क दुर्घटनाओं के मामले में एक बेहद चिंताजनक रिकॉर्ड बनाया है। भारत भर में सड़क हादसों के दौरान सबसे अधिक असुरक्षित माने जाने वाले पैदल यात्रियों और साइकिल सवारों की मौत के प्रतिशत में यह शहर पहले स्थान पर रहा है।

आंकड़ों के मुताबिक, इस साल शहर में कुल 410 लोगों ने सड़क हादसों में अपनी जान गंवाई। इनमें से ठीक आधे यानी 50 प्रतिशत (205) लोग पैदल चलने वाले या साइकिल सवार थे। दुखद बात यह है कि जान गंवाने वालों में 180 पैदल यात्री और 25 साइकिल सवार शामिल थे।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने बुधवार को ‘भारत में दुर्घटना से होने वाली मौतें और आत्महत्याएं’ (एडीएसआई) नाम से अपनी रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट में देश के 53 प्रमुख शहरों को शामिल किया गया था, जिनमें इन दो श्रेणियों में मौतों का सबसे अधिक 50 प्रतिशत हिस्सा अकेले अहमदाबाद का रहा।

यह आंकड़ा इसलिए भी डराने वाला है क्योंकि यह पैदल यात्रियों और साइकिल सवारों की मौत के 21 प्रतिशत के राष्ट्रीय औसत के दोगुने से भी काफी अधिक है।

अगर अन्य प्रमुख महानगरों से अहमदाबाद की तुलना करें, तो स्थिति की गंभीरता साफ समझ आती है। इन दो श्रेणियों में सड़क हादसों में होने वाली मौतों का आंकड़ा चेन्नई में 37 प्रतिशत, बेंगलुरु में 29 प्रतिशत और कोलकाता में 25 प्रतिशत दर्ज किया गया।

वहीं मुंबई में यह 11 प्रतिशत और दिल्ली में महज 8 प्रतिशत रहा। रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात के अन्य शहरों में राजकोट (33 प्रतिशत) और सूरत (44 प्रतिशत) ने भी राष्ट्रीय औसत से अधिक मौतें दर्ज कीं। हालांकि, वडोदरा में यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत से कम, 14 प्रतिशत रहा।

अहमदाबाद में सड़क हादसों में जान गंवाने वालों की अन्य प्रमुख श्रेणियों पर नजर डालें, तो दोपहिया वाहन चालकों की संख्या 171 (42 प्रतिशत) रही। इसके अलावा एसयूवी और कार हादसों में 20 (5 प्रतिशत) लोगों की मौत हुई।

इस पूरे डरावने परिदृश्य में एकमात्र राहत की बात यह रही कि शहर में कुल सड़क हादसों में होने वाली मौतों की संख्या में पिछले साल के मुकाबले कमी आई है। साल 2023 में यह आंकड़ा 535 था, जो इस बार घटकर 410 हो गया।

पूरे गुजरात राज्य के आंकड़े शहर के रुझान से थोड़े अलग नजर आते हैं। राज्य भर में कुल 7,717 घातक सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें सबसे ज्यादा 3,765 मौतें दोपहिया वाहन चालकों की हुईं, जो कुल मौतों का 49 प्रतिशत है। राज्य में अन्य प्रमुख श्रेणियों में 1,710 (22 प्रतिशत) पैदल यात्री, 1,032 (13 प्रतिशत) एसयूवी या कार सवार और 540 (7 प्रतिशत) ट्रक से जुड़े हादसों के शिकार लोग शामिल थे।

अहमदाबाद के सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ अमित खत्री का मानना है कि खासकर शहरों में पैदल चलने वाले और साइकिल सवार सबसे अधिक जोखिम में रहते हैं। उन्होंने इसके कई कारण गिनाए, जिनमें फुट ओवरब्रिज की कमी, इस्तेमाल के लायक फुटपाथ का न होना और पैदल चलने को बढ़ावा देने वाले बुनियादी ढांचे का अभाव शामिल है।

खत्री के अनुसार, इन मौतों को कम करने के लिए सब्जी मंडियों जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों का स्पष्ट सीमांकन होना चाहिए। साथ ही वाहन-मुक्त क्षेत्र और पैदल यात्रियों के अनुकूल बुनियादी ढांचे का विकास एक अच्छी शुरुआत हो सकती है। इस बीच, अन्य विशेषज्ञों ने भी संबंधित अधिकारियों से घातक सड़क दुर्घटनाओं का बेहतर और गहराई से विश्लेषण करने का आग्रह किया है।

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