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गुजरात: अधिकारी बनकर साइबर ठगों ने उड़ाई 45 लाख रुपये की सरकारी रकम, महाप्रबंधक पर गिरेगी गाज

| Updated: May 6, 2026 16:40

व्हाट्सएप पर बॉस की डीपी लगाकर ठगों ने उड़ाए 45 लाख रुपये, बिना कागजी कार्रवाई के सरकारी फंड ट्रांसफर करने वाले पीजीवीसीएल अधिकारी पर विभागीय जांच के आदेश।

गुजरात में सार्वजनिक क्षेत्र की एक बिजली वितरण कंपनी को निशाना बनाकर किए गए साइबर फर्जीवाड़े ने सरकारी धन के ट्रांसफर में बरती जाने वाली गंभीर लापरवाही की पोल खोल दी है। इस घटना से न केवल सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा है, बल्कि बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के इतनी बड़ी रकम भेजे जाने पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

राजकोट सिटी साइबर क्राइम ब्रांच ने सोमवार को एक सरकारी कर्मचारी का रूप धरने और धोखाधड़ी करने के आरोप में अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

पश्चिम गुजरात विज कंपनी लिमिटेड (PGVCL) के 54 वर्षीय महाप्रबंधक (वित्त) किंटुकुमार शशिकांत मलकान ने साइबर अपराधियों के खाते में 45.60 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए थे। इन ठगों ने खुद को उनका बॉस और पीजीवीसीएल का प्रबंध निदेशक (एमडी), आईएएस अधिकारी के पी जोशी बताया था।

पुलिस के अनुसार, मलकान ने केवल एक व्हाट्सएप संदेश के आधार पर यह भारी-भरकम रकम ट्रांसफर कर दी। पुलिस और बैंक की फुर्ती से 43 लाख रुपये फ्रीज करने में सफलता जरूर मिली, लेकिन तब तक जालसाज 2.5 लाख रुपये की सरकारी राशि निकाल चुके थे।

पीजीवीसीएल उन चार क्षेत्रीय बिजली वितरण कंपनियों में से एक है जो 1 अप्रैल 2005 से गुजरात ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (GUVNL) के तहत काम कर रही हैं। यह कंपनी राज्य के पूरे सौराष्ट्र-कच्छ क्षेत्र में बिजली आपूर्ति का जिम्मा संभालती है।

मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए डीसीपी (क्राइम) जगदीश बांगरवा ने बताया कि इन पैसों का लेन-देन पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में बैठे किसी व्यक्ति से जुड़ा है। उन्होंने आश्वस्त किया कि आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस की कोशिशें जोरों पर हैं।

साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में मलकान द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर के मुताबिक, 4 मई को दोपहर करीब 1 बजे उन्हें एक अनजान नंबर से व्हाट्सएप मैसेज आया था। इस नंबर की प्रोफाइल पिक्चर में उनके एमडी के पी जोशी की फोटो लगी थी। संदेश में लिखा था कि यह के पी जोशी का निजी नंबर है, इसे सेव कर लें और किसी के साथ साझा न करें।

मलकान ने बताया कि इसके बाद उन्हें उसी नंबर से कॉल आया जिसे वह उठा नहीं पाए। जब उन्होंने दोबारा कॉल किया तो उन्हें मैसेज मिला कि वे अभी एक मीटिंग में हैं और कॉल न करें।

अगले ही पल उसी नंबर से एक और मैसेज आया, जिसमें मनीषा मंडल नाम की किसी महिला के बैंक खाते में 45,60,904 रुपये ट्रांसफर करने को कहा गया।

मैसेज में निर्देश दिया गया था कि यह भुगतान तुरंत पीजीवीसीएल के खातों से किया जाए और बिना टीडीएस काटे यूटीआर नंबर भेजा जाए। बाकी सभी औपचारिकताएं बाद में पूरी करने का भी वादा किया गया था।

एफआईआर में बताया गया है कि मलकान ने तुरंत सटीक रकम का चेक काटा और अपने एक कर्मचारी को बैंक भेजकर पैसे ट्रांसफर करवा दिए। यह सब सरकारी फंड ट्रांसफर करने के लिए जरूरी किसी भी पूर्व कागजी कार्रवाई और दस्तावेजीकरण के बिना किया गया।

हैरानी की बात यह है कि ये दोनों अधिकारी राजकोट शहर के लक्ष्मीनगर स्थित एक ही मुख्यालय की इमारत में कुछ ही मीटर की दूरी पर बैठते हैं।

इसी दिन दोपहर 3:48 बजे मलकान को उसी व्हाट्सएप नंबर से एक और मैसेज मिला। इस बार नितिन नाम के व्यक्ति के बैंक खाते में 30,60,801 रुपये ट्रांसफर करने के लिए कहा गया था और वही पुराना बहाना बनाया गया कि मीटिंग के बाद सभी कागजी कार्रवाई पूरी कर ली जाएगी।

इस बार मलकान ने भुगतान की पुष्टि करने का फैसला किया और वह सीधे एमडी केतन जोशी से मिलने उनके कार्यालय पहुंच गए। एमडी ने उन्हें बताया कि जिस नंबर से उन्हें मैसेज आ रहे थे, वह उनका है ही नहीं। सच्चाई सामने आते ही तुरंत बैंक और पुलिस को सूचना दी गई, जिससे सरकारी धन के एक बड़े हिस्से को फ्रीज करने में कामयाबी मिल गई।

डीसीपी बांगरवा ने बताया कि 45.60 लाख रुपये कई बैंक खातों से होते हुए अंततः सिलीगुड़ी के एक खाते में पहुंचे। वहां से 2.5 लाख रुपये एटीएम और चेक के जरिए निकाल लिए गए, जबकि बाकी रकम पर रोक लगा दी गई है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता की कोई नकारात्मक भूमिका सामने नहीं आई है, लेकिन उन्होंने लोगों से अपील की है कि पैसे ट्रांसफर करने से पहले हमेशा पहचान की क्रॉस-चेकिंग जरूर करें।

पीजीवीसीएल के एमडी के पी जोशी ने इस पूरे घटनाक्रम पर कहा कि जब मलकान उनके पास 30 लाख रुपये के ट्रांसफर की बात लेकर आए, तब उन्हें इस फर्जीवाड़े का पता चला।

सार्वजनिक धन जारी करने की प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि इसके लिए बाकायदा एक वाउचर बनाना होता है और मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) से मंजूरी लेनी होती है।

बाद में मंजूरी (पोस्ट फैक्टो अप्रूवल) देने की संभावना को सिरे से खारिज करते हुए जोशी ने कहा कि उन्होंने अतीत में कभी भी अपने कर्मचारियों को ऐसा करने का निर्देश नहीं दिया है।

उन्होंने एक आधिकारिक नोट भी जारी किया है जिसमें सभी कर्मचारियों को कंपनी की प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि पीजीवीसीएल में इस तरह की यह पहली घटना है।

नुकसान की भरपाई और आंतरिक कार्रवाई के सवाल पर एमडी ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार अधिकारी से राशि वसूलने का प्रयास किया जाएगा और महाप्रबंधक (वित्त) के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू की जाएगी।

मुख्य अभियंता से इस पूरी घटना, प्रक्रिया और उसके पालन न होने के कारणों पर एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है, जिसके मिलने के बाद आगे की कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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