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वडोदरा की एमएस यूनिवर्सिटी में अब पढ़ाया जाएगा ‘मोदी तत्व’, नए पाठ्यक्रम में RSS और हिंदू धर्म भी शामिल

| Updated: May 2, 2026 13:58

महाराजा सयाजीराव (MS) यूनिवर्सिटी के समाजशास्त्र पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव। अब छात्रों को पीएम मोदी के नेतृत्व (मोदी तत्व), आरएसएस की जमीनी कार्यप्रणाली और स्वदेशी ज्ञान प्रणाली (BKS) के बारे में विस्तार से पढ़ाया जाएगा।

महाराजा सयाजीराव (एमएस) यूनिवर्सिटी, बड़ौदा ने अपने समाजशास्त्र (Sociology) पाठ्यक्रम में एक बड़ा बदलाव किया है। अब छात्रों को स्वदेशी ज्ञान प्रणाली, हिंदू धर्म और राष्ट्रवाद के साथ-साथ ‘मोदी तत्व’ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के जमीनी काम के बारे में पढ़ाया जाएगा। यह महत्वपूर्ण बदलाव नए शैक्षणिक सत्र यानी जून महीने से लागू होने जा रहा है।

इन नए विषयों को बीए समाजशास्त्र के चौथे वर्ष के 10 पेपरों और समाजशास्त्र में मास्टर्स प्रोग्राम के पहले वर्ष में शामिल किया गया है। इन मॉड्यूल्स का नाम ‘सोशियोलॉजी ऑफ भारत’, ‘हिंदू सोशियोलॉजी’ और ‘सोशियोलॉजी ऑफ पैट्रियटिज्म’ रखा गया है।

प्रत्येक कोर्स चार क्रेडिट का होगा। इस पूरी पहल का मुख्य उद्देश्य भारतीय सभ्यता के ज्ञान, समकालीन शासन और जमीनी सामाजिक वास्तविकताओं के साथ अकादमिक ढांचे को जोड़ना है।

इस नए पाठ्यक्रम की रूपरेखा एमएसयू के समाजशास्त्र विभाग के प्रमुख डॉ. वीरेंद्र सिंह ने तैयार की है। डॉ. सिंह विश्वविद्यालय के बोर्ड ऑफ स्टडीज के अध्यक्ष, नीति आयोग परियोजना का हिस्सा और ‘वडोदरा 2047’ योजना के सदस्य भी हैं।

उनका कहना है कि ‘सोशियोलॉजी ऑफ पैट्रियटिज्म’ के तहत पढ़ाया जाने वाला ‘मोदी तत्व’ दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का अध्ययन है। इसे जर्मन समाजशास्त्री मैक्स वेबर के “करिश्माई अधिकार” (charismatic authority) के सिद्धांत से प्रेरित होकर तैयार किया गया है।

डॉ. सिंह के अनुसार, ‘मोदी तत्व’ समकालीन राजनीतिक हस्ती के तौर पर पीएम मोदी के करिश्माई नेतृत्व, नीतिगत समझ और जनसंपर्क का एक समाजशास्त्रीय केस स्टडी है। राष्ट्रीय और वैश्विक राजनीति में प्रधानमंत्री मोदी की अपरिहार्य उपस्थिति को देखते हुए, विश्वविद्यालय चाहता है कि मौजूदा पीढ़ी उनके नेतृत्व का अध्ययन अभी करे, न कि 50 साल बाद इस पर चर्चा की जाए।

पाठ्यक्रम में आरएसएस को शामिल करने का विचार गुजरात के दूरदराज के गांवों में किए गए फील्डवर्क के दौरान आया। डॉ. सिंह ने बताया कि वहां छात्रों ने जमीनी स्तर पर संघ की गतिविधियों और प्रभाव को करीब से अनुभव किया।

यह कोर्स आरएसएस को सिर्फ एक विचारधारा के रूप में नहीं, बल्कि जमीनी संगठन, सामाजिक पहुंच और संवाद के मॉडल के तौर पर पेश करता है। संघ इस सिद्धांत पर काम करता है कि लोगों के बीच वैचारिक ‘मतभेद’ हो सकते हैं, लेकिन ‘मनभेद’ नहीं होना चाहिए।

इस पाठ्यक्रम में यह भी बताया गया है कि आरएसएस ने अपनी समावेशी विचारधारा के कारण कांग्रेस के दिग्गज नेता सरदार वल्लभभाई पटेल को भी अपनाया है। इसके अलावा, छात्रों को बड़ौदा के महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ तृतीय (1875-1939) के प्रगतिशील और जनकल्याणकारी नेतृत्व के बारे में विस्तार से पढ़ाया जाएगा।

उन्होंने लड़कियों के लिए अनिवार्य शिक्षा लागू की थी और बेटियों को स्कूल न भेजने वाले परिवारों पर जुर्माना भी लगाया था, जिसे डॉ. सिंह एक ‘सकारात्मक कराधान’ (positive taxation) मानते हैं।

इस नए मॉड्यूल में सरदार पटेल, डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर और मराठा योद्धा छत्रपति शिवाजी महाराज के दूरदर्शी विजन का भी गहराई से अध्ययन किया जाएगा। शिवाजी महाराज द्वारा बाहरी ताकतों से लड़ने के लिए मेवाड़ के शासकों को एकजुट करने के ऐतिहासिक प्रयासों को वर्तमान समय में आंतरिक एकता के महत्व से जोड़ा गया है।

वहीं, ‘भारतीय ज्ञान प्रणाली’ (BKS) ढांचे के तहत, ‘सोशियोलॉजी ऑफ भारत’ कोर्स में चिकित्सा, प्रौद्योगिकी और सामाजिक प्रणालियों के क्षेत्र में भारत के पारंपरिक ज्ञान की विस्तृत पड़ताल की जाएगी।

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