comScore अमेरिका में 16 साल से अवैध रूप से रह रहे गुजराती कारोबारी पर DHS का कड़ा एक्शन, 15 करोड़ रुपये का जुर्माना - Vibes Of India

Gujarat News, Gujarati News, Latest Gujarati News, Gujarat Breaking News, Gujarat Samachar.

Latest Gujarati News, Breaking News in Gujarati, Gujarat Samachar, ગુજરાતી સમાચાર, Gujarati News Live, Gujarati News Channel, Gujarati News Today, National Gujarati News, International Gujarati News, Sports Gujarati News, Exclusive Gujarati News, Coronavirus Gujarati News, Entertainment Gujarati News, Business Gujarati News, Technology Gujarati News, Automobile Gujarati News, Elections 2022 Gujarati News, Viral Social News in Gujarati, Indian Politics News in Gujarati, Gujarati News Headlines, World News In Gujarati, Cricket News In Gujarati

Vibes Of India
Vibes Of India

अमेरिका में 16 साल से अवैध रूप से रह रहे गुजराती कारोबारी पर DHS का कड़ा एक्शन, 15 करोड़ रुपये का जुर्माना

| Updated: May 2, 2026 14:13

मेक्सिको के रास्ते अमेरिका में की थी एंट्री, 16 साल से छिपकर चला रहा था बिजनेस; अब DHS ने ठोका 15 करोड़ का जुर्माना

अहमदाबाद: अमेरिका में पिछले 16 वर्षों से अवैध रूप से रह रहे एक गुजराती व्यवसायी पर भारी भरकम जुर्माना लगाया गया है। अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) ने डिपोर्टेशन (निर्वासन) के अंतिम आदेश का पालन न करने पर इस कारोबारी पर 1.8 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानी करीब 15 करोड़ रुपये का सिविल जुर्माना ठोका है।

यह व्यवसायी मूल रूप से मेक्सिको के रास्ते अमेरिका में दाखिल हुआ था। आव्रजन और राष्ट्रीयता अधिनियम (Immigration and Nationality Act) के प्रावधानों के तहत अप्रैल में जारी किए गए एक नोटिस में इस मामले का खुलासा हुआ है। इस नोटिस में आरोप लगाया गया है कि इस व्यक्ति ने सालों पहले निर्वासन का आदेश मिलने के बावजूद जानबूझकर अमेरिका छोड़ने से इनकार कर दिया।

इस बड़े जुर्माने की गणना नियमों के उल्लंघन की अवधि के दौरान प्रति दिन 998 अमेरिकी डॉलर (94,000 रुपये से अधिक) के हिसाब से की गई है। दस्तावेजों से पता चलता है कि यह व्यक्ति साल 2010 में अमेरिका-मेक्सिको सीमा के जरिए अमेरिका में घुसा था। प्रवेश के कुछ समय बाद ही उसे हिरासत में ले लिया गया था।

हालांकि कुछ हफ्तों के भीतर उसे रिहा कर दिया गया था, लेकिन अगले ही साल उसे देश छोड़ने का अंतिम आदेश थमा दिया गया। उस दौर के कई अन्य प्रवासियों की तरह, वह इसके बाद इमिग्रेशन अधिकारियों के सामने कभी पेश नहीं हुआ और छिपकर देश में ही रहने लगा।

इतने वर्षों में उसने अमेरिका में कई व्यवसाय स्थापित कर लिए और अपनी पत्नी तथा दो बच्चों को भी उसी अवैध रास्ते से वहां बुला लिया। दो साल पहले उसने यू-वीजा (U visa) के लिए आवेदन किया था। यह वीजा आमतौर पर कुछ विशेष अपराधों के पीड़ितों को दिया जाता है। इस आवेदन के आधार पर वर्तमान में उसके पास एक वैध वर्क परमिट और सोशल सिक्योरिटी नंबर मौजूद है।

उसके इस वीजा आवेदन के लंबित होने के बावजूद, DHS ने इस लंबे उल्लंघन का हवाला देते हुए अब नागरिक जुर्माना लगाने की सख्त कार्रवाई की है। नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यह व्यक्ति न तो अमेरिकी नागरिक है और न ही उसे वहां रहने के लिए कानूनी रूप से अधिकृत किया गया है। उस पर स्वेच्छा से देश न छोड़ने, यात्रा दस्तावेजों के लिए आवेदन न करने और बुलाए जाने पर खुद को प्रस्तुत न करने का आरोप है।

इस कारोबारी को आदेश के खिलाफ अपील करने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। ऐसा न करने पर इस आदेश को अंतिम मान लिया जाएगा और जुर्माने की वसूली की कार्यवाही शुरू कर दी जाएगी।

इस घटनाक्रम के बाद से यह गुजराती कारोबारी कानूनी मदद के लिए वकीलों के चक्कर लगा रहा है। एक वकील ने उसे कानूनी फीस के साथ एक कम राशि का भुगतान करके मामले को सुलझाने का सुझाव दिया है। वहीं, एक अन्य कानूनी विशेषज्ञ ने इस तरह के जुर्मानों को दी जा रही मौजूदा कानूनी चुनौतियों का हवाला देते हुए उसे फिलहाल इंतजार करने की सलाह दी है।

अमेरिका में मौजूद सूत्रों का कहना है कि हाल के महीनों में मुख्य रूप से लैटिन अमेरिकी प्रवासियों को ऐसे हजारों नोटिस जारी किए गए हैं। इन मामलों में भी जुर्माने की रकम अक्सर एक मिलियन डॉलर को पार कर जाती है। हालांकि, किसी गुजराती प्रवासी से जुड़े ऐसे मामले अभी भी दुर्लभ हैं, जो इस घटना को भारतीय समुदाय के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण बनाता है।

इस पूरे मामले से जुड़े जानकारों का कहना है कि सामूहिक रूप से इस तरह के अरबों डॉलर के जुर्माने तो लगाए गए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत थोड़ी अलग है। अभी तक इस बात को लेकर बहुत कम स्पष्टता है कि वास्तव में प्रशासन कितनी वसूली कर पाता है या क्या इस तरह के नोटिस जारी होने के बाद लोग सच में अपनी मर्जी से देश छोड़कर जाते हैं।

यह भी पढ़ें-

अहमदाबाद में पहली बार शुरू हुई बंदरों की गिनती: हमलों और शिकायतों के बाद वन विभाग का बड़ा फैसला

वडोदरा की एमएस यूनिवर्सिटी में अब पढ़ाया जाएगा ‘मोदी तत्व’, नए पाठ्यक्रम में RSS और हिंदू धर्म भी शामिल

Your email address will not be published. Required fields are marked *