अहमदाबाद के शेला इलाके में रहने वाले एक 35 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर के साथ एक बेहद हैरान करने वाला धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। पीड़ित के पास न तो कोई ओटीपी आया, न ही उसने किसी लेनदेन को मंजूरी दी और न ही फोन पर कोई अलर्ट मिला। इसके बावजूद तीन अलग-अलग बैंक खातों और तीन क्रेडिट कार्ड से कुल छह लेनदेन के जरिए करीब 6.8 लाख रुपये की भारी भरकम रकम उड़ा ली गई।
यह इंजीनियर बेंगलुरु की एक जानी-मानी टेक्नोलॉजी कंपनी के लिए ‘वर्क फ्रॉम होम’ करता है। इस रहस्यमयी चोरी का खुलासा तब हुआ जब वह 3 अगस्त को अपना बैंक स्टेटमेंट निकालने के लिए अपनी एक बैंक शाखा में पहुंचा। खातों की स्थिति देखकर उसके होश उड़ गए। फिलहाल पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि क्या उसकी जानकारी के बिना उसके बैंकिंग विवरण या डिजिटल उपकरणों के साथ किसी ने गुपचुप तरीके से छेड़छाड़ की है।
बोपल पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर के अनुसार, पहले बैंक स्टेटमेंट में पता चला कि उनके बचत खाते से 1.5 लाख रुपये काटे गए हैं। जब पीड़ित ने घबराकर अपने अन्य दो खातों की भी जांच की, तो वहां से भी क्रमशः 1.5 लाख और 1.5 लाख रुपये निकाले जाने की बात सामने आई।
इसके बाद जब उसने अपने क्रेडिट कार्ड के स्टेटमेंट खंगाले, तो तीन अन्य बड़े लेनदेन का भी पर्दाफाश हुआ। इन कार्ड्स के जरिए 95,000 रुपये, 49,975 रुपये और 90,000 रुपये की अवैध निकासी की गई थी।
शिकायतकर्ता ने पुलिस को दिए बयान में साफ कहा है कि उसने कभी भी अपने खाते या कार्ड का विवरण, पासवर्ड या वन-टाइम पासवर्ड (ओटीपी) किसी के साथ साझा नहीं किया था। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इनमें से किसी भी लेनदेन का कोई एसएमएस या मोबाइल नोटिफिकेशन जनरेट नहीं हुआ। इसी वजह से वह बैंक जाने तक इस पूरी ठगी से पूरी तरह अनजान रहा।
अपनी शिकायत में पीड़ित इंजीनियर ने अपने ही एक चचेरे भाई पर शक जताया है। दरअसल, यह रिश्तेदार चोरी का पता चलने से ठीक पहले चार दिनों तक उसके घर पर ही रुका हुआ था। पुलिस को बताया गया है कि जब तक पीड़ित को इस धोखाधड़ी की भनक लगी, तब तक उसका चचेरा भाई वहां से जा चुका था। ऐसे में उसे पूरा शक है कि शायद इसी रिश्तेदार ने उसकी गोपनीय वित्तीय जानकारी तक अपनी पहुंच बनाई हो।
बोपल पुलिस से संपर्क करने से पहले, सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर भी इस पूरी घटना की विधिवत रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
अब बोपल पुलिस इस पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुट गई है। जांच अधिकारी डिजिटल साक्ष्यों, ट्रांजैक्शन लॉग्स, डिवाइस एक्सेस और पैसों के ट्रेल की बारीकी से जांच कर रहे हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर शिकायतकर्ता की मंजूरी और किसी भी अलर्ट ट्रिगर के बिना इतनी बड़ी रकम खातों से कैसे गायब हो गई।
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