गुजरात की जेलों में कैदियों की बढ़ती हुई भीड़ प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। साल 2024 के हालात बताते हैं कि राज्य की जेलें अपनी तय क्षमता से कहीं अधिक बोझ उठा रही हैं। हाल ही में संसद में पेश किए गए आंकड़ों ने इस गंभीर होती समस्या की पूरी तस्वीर साफ कर दी है।
गांधीनगर से प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्तमान में गुजरात की जेलों में कुल 14,108 कैदियों को रखने की आधिकारिक मंजूरी है। हालांकि, जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है, क्योंकि इन जेलों में इस वक्त 17,766 कैदी बंद हैं। इसका सीधा अर्थ है कि जेलों में क्षमता से 3,658 कैदी अधिक हैं, जिसकी वजह से ऑक्युपेंसी रेट (कैदियों का दबाव) करीब 126 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
राज्यसभा में एक लिखित जवाब देते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में जेलों की क्षमता और कैदियों की संख्या के बीच का अंतर लगातार बढ़ा है। आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि कैदियों की बढ़ती संख्या के मुकाबले जेलों के बुनियादी ढांचे के विस्तार का काम बेहद सीमित रहा है।
वर्ष 2020 से लेकर 2024 के बीच गुजरात में जेलों की क्षमता में केवल 346 का ही मामूली इजाफा किया गया है। साल 2020 में जहां जेलों की कुल क्षमता 13,762 थी, वह 2024 में बढ़कर महज 14,108 तक ही पहुंच सकी। इसके विपरीत, इसी समयावधि में कैदियों की संख्या में 2,549 की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई।
पिछले पांच सालों के आंकड़े बताते हैं कि स्थिति हर साल लगातार खराब ही हुई है। साल 2020 में 15,217 कैदियों के साथ जेलों का ऑक्युपेंसी रेट 111 प्रतिशत पर था। अगले ही साल यानी 2021 में यह संख्या बढ़कर 16,597 हो गई और दबाव 119 प्रतिशत तक जा पहुंचा। वर्ष 2022 में 16,611 कैदियों के साथ यह आंकड़ा 118 प्रतिशत पर दर्ज किया गया।
कैदियों की संख्या बढ़ने का यह सिलसिला यहीं नहीं थमा। साल 2023 में जेलों में बंद बंदियों का आंकड़ा 17,265 पर पहुंच गया, जिससे जेलों की ऑक्युपेंसी 123 प्रतिशत हो गई। वहीं 2024 में यह संख्या 17,766 हो गई है, जो स्वीकृत क्षमता का लगभग 126 प्रतिशत है।
यह चिंताजनक स्थिति सिर्फ गुजरात तक ही सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी ऐसे ही हालात हैं। गृह मंत्रालय ने संसद को सूचित किया कि 31 दिसंबर 2024 तक पूरे देश में 609 जेलें अपनी तय क्षमता से अधिक कैदियों के साथ काम कर रही थीं।
मंत्रालय ने अंत में यह भी स्पष्ट किया कि जेलों का प्रशासन और बुनियादी ढांचे का विस्तार पूरी तरह से राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आता है। जेलों का निर्माण और उनका उचित रखरखाव संविधान के तहत एक राज्य का विषय है, इसलिए इस दिशा में कदम उठाने की जिम्मेदारी भी राज्यों की ही है।
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