comScore हरित ऊर्जा क्रांति में गुजरात की ऊंची छलांग: देश का दूसरा सबसे बड़ा बैटरी स्टोरेज मार्केट बना राज्य - Vibes Of India

Gujarat News, Gujarati News, Latest Gujarati News, Gujarat Breaking News, Gujarat Samachar.

Latest Gujarati News, Breaking News in Gujarati, Gujarat Samachar, ગુજરાતી સમાચાર, Gujarati News Live, Gujarati News Channel, Gujarati News Today, National Gujarati News, International Gujarati News, Sports Gujarati News, Exclusive Gujarati News, Coronavirus Gujarati News, Entertainment Gujarati News, Business Gujarati News, Technology Gujarati News, Automobile Gujarati News, Elections 2022 Gujarati News, Viral Social News in Gujarati, Indian Politics News in Gujarati, Gujarati News Headlines, World News In Gujarati, Cricket News In Gujarati

Vibes Of India
Vibes Of India

हरित ऊर्जा क्रांति में गुजरात की ऊंची छलांग: देश का दूसरा सबसे बड़ा बैटरी स्टोरेज मार्केट बना राज्य

| Updated: September 16, 2026 14:27

9.3 GWh की कुल राष्ट्रीय क्षमता में 20% की शानदार हिस्सेदारी के साथ गुजरात भारत का दूसरा सबसे बड़ा बैटरी एनर्जी स्टोरेज मार्केट बन गया है। जानिए भविष्य की पाइपलाइन परियोजनाओं में कैसे यह राज्य नंबर 1 पर है।

अहमदाबाद: स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में गुजरात ने एक और ऐतिहासिक मुकाम हासिल कर लिया है। स्थापित बैटरी एनर्जी स्टोरेज क्षमता (BESS) के मामले में गुजरात देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य बनकर उभरा है। एक ताजा शोध रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 तक देश की कुल 9.3 गीगावाट-घंटे (GWh) संचयी क्षमता में अकेले गुजरात की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत दर्ज की गई है।

इस सूची में राजस्थान 36 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ पहले पायदान पर बना हुआ है, जबकि महाराष्ट्र 5 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ तीसरे स्थान पर है। आंकड़े बताते हैं कि देश की कुल स्थापित बैटरी भंडारण क्षमता का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अकेले इन तीन राज्यों में केंद्रित है।

वर्तमान स्थापित क्षमता के अलावा, भविष्य की परियोजनाओं की कतार यानी प्रोजेक्ट पाइपलाइन में गुजरात की स्थिति सबसे ज्यादा मजबूत है। स्टैंडअलोन बैटरी स्टोरेज क्षमता की विकास पाइपलाइन के मामले में राज्य राजस्थान और आंध्र प्रदेश को पीछे छोड़ते हुए पूरे भारत में शीर्ष स्थान पर काबिज है।

गुजरात ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (GUVNL) की प्रबंध निदेशक शालिनी अग्रवाल (IAS) ने इस उपलब्धि पर कहा कि राज्य बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम में देश का नेतृत्व कर रहा है। गुजरात पहले से ही रूफटॉप सोलर क्षमता में देश में पहले और कुल सौर ऊर्जा में दूसरे स्थान पर है।

जैसे-जैसे नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार हो रहा है, चौबीसों घंटे निर्बाध बिजली की मांग भी बढ़ रही है। धूप केवल दिन में उपलब्ध होती है और पवन ऊर्जा में मौसम के अनुसार उतार-चढ़ाव आता है, इसलिए सौर, पवन और ऊर्जा भंडारण का सटीक समन्वय बेहद अनिवार्य हो गया है।

रिपोर्ट के विश्लेषण के मुताबिक, वर्ष 2026 की पहली छमाही में देश भर में ऊर्जा भंडारण संयंत्रों की स्थापना में तेज उछाल देखा गया। यह वृद्धि इसलिए संभव हुई क्योंकि बड़े पैमाने की स्टैंडअलोन बैटरी परियोजनाएं अब निविदाओं और नीतिगत घोषणाओं के चरण से निकलकर सीधे जमीन पर हकीकत का रूप ले रही हैं।

ऊर्जा क्षेत्र की विशेषज्ञ संस्था के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) राज प्रभु का मानना है कि सौर क्षमता में भारी इजाफे, दिन के समय अत्यधिक बिजली उत्पादन, ग्रिड कटौती की समस्या और शाम के पीक समय की मांग को पूरा करने के लिए स्टोरेज की जरूरत तेजी से बढ़ रही है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य की संभावनाएं बेहद मजबूत हैं, लेकिन यह विकास इस बात पर निर्भर करेगा कि टेंडर प्रक्रिया कितनी तेजी से नीलामी और अनुबंध आवंटन तक पहुंचती है, ग्रिड का बुनियादी ढांचा कितना मजबूत रहता है और परियोजनाओं की आर्थिक व्यवहार्यता कितनी टिकाऊ बनी रहती है।

भारत में ऊर्जा भंडारण की कुल विकास पाइपलाइन अब तक स्थापित क्षमता से आठ गुना से भी अधिक बड़ी हो चुकी है। इस आगामी पाइपलाइन में आधे से ज्यादा हिस्सा स्टैंडअलोन बैटरी स्टोरेज का है, जबकि सोलर-प्लस-स्टोरेज और सोलर-विंड हाइब्रिड स्टोरेज परियोजनाओं की हिस्सेदारी करीब 15-15 प्रतिशत है।

गुजरात सरकार इस गति को और तेज करने के लिए दीर्घकालिक रणनीति पर काम कर रही है। शालिनी अग्रवाल के अनुसार, तेजी से बढ़ते वाणिज्यिक और औद्योगिक राज्य के तौर पर गुजरात के लिए BESS और पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज दोनों ही प्राथमिकता में हैं।

पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं के निर्माण में अपेक्षाकृत अधिक समय लगता है, जबकि बैटरी स्टोरेज को काफी तेजी से तैनात किया जा सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य ने ‘विकसित गुजरात औद्योगिक नीति’ के तहत BESS को एक प्रमुख सेक्टर के रूप में चिन्हित किया है और भारी निवेश आकर्षित करने के लिए आकर्षक प्रोत्साहन प्रदान किए जा रहे हैं।

यह भी पढ़ें-

कॉमनवेल्थ गेम्स 2030: गुजरात में पहली बार होंगे दुनिया के सबसे कठिन फिटनेस इवेंट ‘हाइरॉक्स’ और ‘आयरनमैन ट्रायथलॉन’

ट्रंप प्रशासन को बड़ा झटका: विदेशी छात्रों और पत्रकारों के वीज़ा सीमित करने वाले नियम पर लगी राष्ट्रव्यापी रोक

Your email address will not be published. Required fields are marked *