इस बार दुर्गा पूजा के दौरान कोलकाता की सड़कों पर एक बड़ा और स्पष्ट बदलाव देखने को मिलेगा। दशकों पुराने सफेद और नीले रंग के लिबास से अलग, कोलकाता पुलिस के वॉलंटियर्स अब भीड़ प्रबंधन के लिए भगवा या चमकीले नारंगी रंग में नजर आएंगे। इस नई पहचान का मुख्य उद्देश्य त्योहार की भारी भीड़ के बीच इन स्वयंसेवकों की दृश्यता को बढ़ाना है।
लालबाजार पुलिस मुख्यालय ने इस नई पहल के लिए 89 लाख रुपये का टेंडर जारी किया है। इसके तहत तृतीया से दशमी तक तैनात रहने वाले 20,000 अस्थायी स्वयंसेवकों के लिए पूरी बांह की टी-शर्ट और मैचिंग पीक कैप तैयार की जाएगी। निविदा मूल्यांकन की प्रक्रिया 30 सितंबर को बंद होगी, जिसके लिए 1.8 लाख रुपये की बयाना राशि (ईएमडी) तय की गई है।
भीड़भाड़ वाले पंडालों और रास्तों पर इन कर्मियों को दूर से पहचाना जा सके, इसके लिए 12,000 टी-शर्ट गहरे नारंगी रंग की और 8,000 हल्के नारंगी रंग की होंगी। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह केवल कपड़ों का रंग बदलने की कवायद नहीं है, बल्कि एक सोची-समझी रणनीतिक चाल है। उत्सव के सप्ताह में जब सड़कें जनसैलाब में बदल जाती हैं, तब भटके हुए बच्चों, आम नागरिकों और वाहन चालकों के लिए दूर से ही सहायता कर्मियों को पहचानना काफी आसान हो जाएगा।
इस अस्थायी बल में एनसीसी कैडेट, स्काउट, नागरिक सुरक्षा कार्यकर्ता, छात्र और स्थानीय गैर-सरकारी संगठनों के सदस्य शामिल हैं। इनमें से ज्यादातर 20 साल से कम उम्र के युवा लड़के हैं। इन्हें शहर के प्रमुख चौराहों, मेट्रो गेटों और अत्यधिक भीड़भाड़ वाले रास्तों पर पैदल यात्रियों की आवाजाही को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए तैनात किया जाएगा।
दिशा-निर्देश देने के अलावा, ये वॉलंटियर्स मेडिकल इमरजेंसी में तुरंत मदद पहुंचाने, लोगों को पानी पिलाने और मनचलों की अवांछित हरकतों को रोकने का काम भी करेंगे। इसके साथ ही, भीड़ के घनत्व और ट्रैफिक डायवर्जन से जुड़े रियल-टाइम अपडेट्स को एफएम रेडियो प्रसारण के साथ जोड़ा जाएगा, ताकि दर्शनार्थियों को लगातार सही जानकारी मिलती रहे और पूरा आयोजन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।
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