वडोदरा में कॉलेज के पास सस्ते हॉस्टल की तलाश कर रही एक छात्रा के साथ धोखाधड़ी का अनोखा मामला सामने आया है। यहां एक गर्ल्स हॉस्टल को ऑटो के किराये के बारे में गलत जानकारी देना काफी महंगा पड़ गया। एमएस यूनिवर्सिटी की इस छात्रा ने जब उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाया, तो उसे वहां से एक बड़ी जीत हासिल हुई।
इस मामले में वडोदरा जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (मुख्य) ने छात्रा की शिकायत को बिल्कुल सही पाया है। अदालत ने कारेलीबाग स्थित जीविबा गर्ल्स हॉस्टल के प्रबंधन को आदेश दिया है कि वह छात्रा को मुआवजे और मुकदमे के खर्च के रूप में कुल 19,000 रुपये का भुगतान करे।
पूरा विवाद सितंबर 2022 का है, जब अंकलेश्वर की रहने वाली इस छात्रा ने हॉस्टल में अपने लिए एक कमरा बुक किया था। छात्रा का कहना है कि एडमिशन लेने से पहले उसने कॉलेज तक आने-जाने के लिए ट्रांसपोर्ट की सुविधा और खर्च के बारे में खास तौर पर पूछताछ की थी। उस समय हॉस्टल के कर्मचारियों ने उसे भरोसा दिया था कि कॉलेज तक का ऑटो-रिक्शा का किराया मात्र 10 से 20 रुपये के बीच लगेगा।
हालांकि, जब छात्रा हॉस्टल में शिफ्ट हुई तो उसे असलियत का पता चला। उसे मालूम हुआ कि कॉलेज तक जाने का वास्तविक किराया 60 से 80 रुपये के बीच है। इतना ही नहीं, अगर कोई ऐप के जरिए ऑटो बुक करता है, तो यह किराया 100 रुपये तक पहुंच जाता था।
रोज के सफर का यह खर्च उम्मीद से कहीं ज्यादा था, जिसके कारण छात्रा के लिए वहां रहना आर्थिक रूप से मुश्किल हो गया। ऐसे में उसने हॉस्टल प्रबंधन से अपना एडमिशन रद्द करने और एडवांस के तौर पर जमा किए गए 35,000 रुपये वापस करने का अनुरोध किया।
छात्रा ने हॉस्टल तो खाली कर दिया, लेकिन प्रबंधन ने उसकी रकम लौटाने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद अपने हक की लड़ाई लड़ने के लिए छात्रा ने सितंबर 2024 में उपभोक्ता आयोग का रुख किया और न्याय की गुहार लगाई।
सुनवाई के दौरान हॉस्टल के अधिकारियों ने अपनी सफाई में कहा कि छात्रा ने एडमिशन फॉर्म पर हस्ताक्षर किए थे। उनका तर्क था कि फॉर्म में सभी नियम और शर्तें स्पष्ट रूप से लिखी गई थीं, इसलिए वह किसी भी रिफंड की हकदार नहीं है। हॉस्टल प्रबंधन ने इस बात से भी पूरी तरह इनकार किया कि उन्होंने छात्रा को कम किराये का कोई आश्वासन दिया था।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद उपभोक्ता आयोग ने अपनी अहम टिप्पणी की। आयोग ने माना कि भले ही यह मामला हॉस्टल की मुख्य सेवाओं (जैसे रहना-खाना) में किसी कमी से नहीं जुड़ा था, लेकिन छात्रा ने एडमिशन लेते समय ट्रांसपोर्ट के बारे में दी गई जानकारी पर पूरा भरोसा किया था।
इस भ्रामक जानकारी के लिए हॉस्टल को ही जिम्मेदार ठहराया गया। उपभोक्ता फोरम ने हॉस्टल प्रबंधन को निर्देश दिया कि वह छात्रा को 15,000 रुपये मुआवजे के तौर पर दे। इसके साथ ही, मुकदमे के खर्च के लिए 2,000 रुपये और मानसिक परेशानी के लिए अतिरिक्त 2,000 रुपये चुकाने का भी सख्त आदेश दिया गया है।
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