राजस्थान उच्च न्यायालय ने एक नाबालिग से बलात्कार के मामले में स्वयंभू संत आसाराम बापू की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है। इसके साथ ही कोर्ट ने उनकी जमानत रद्द करते हुए उन्हें तत्काल आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। अदालत ने अपने फैसले में एक बेहद सख्त और ऐतिहासिक टिप्पणी करते हुए कहा कि आसाराम का गिरता स्वास्थ्य पीड़िता की उस आवाज़ को अनदेखा करने का आधार बिल्कुल नहीं बन सकता, जो पूरी तरह से “शांत, विनाशकारी और अकाट्य” है।
पिछले दो वर्षों में, दो अलग-अलग बलात्कार मामलों में दोषी ठहराए गए आसाराम ने अपने खराब स्वास्थ्य का हवाला देकर कम से कम 15 बार अदालती राहत प्राप्त की थी। इसमें चिकित्सा उपचार की अनुमति, आपातकालीन पैरोल और अंतरिम जमानत शामिल थीं। अंततः 27 मई, 2026 को अदालत ने राहत के इस लंबे सिलसिले पर पूरी तरह से विराम लगा दिया।
लगातार मिली अदालती राहत और मेडिकल ग्राउंड
अदालत के सख्त शब्दों के पीछे बेहद ठोस कारण थे। जब आसाराम ने 28 मई को सरेंडर किया, तब तक वह सात महीने से अंतरिम जमानत पर बाहर थे। इससे पहले भी वह मार्च 2024 से लंबी अवधि तक अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती रहे थे। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, 21 मार्च, 2024 और 25 मई, 2026 के बीच आसाराम को एक दर्जन से अधिक बार अदालत से चिकित्सकीय राहत प्राप्त हुई।
जनवरी 2024 में, राजस्थान हाई कोर्ट ने आसाराम के मेडिकल इतिहास को खंगालने के बाद उनकी सजा के निलंबन (सस्पेंशन ऑफ सेंटेंस) की चौथी याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि आम तौर पर 10 साल की सजा काट चुके दोषी को जमानत मिल जाती है, लेकिन आसाराम पर अपनी नाबालिग शिष्या के यौन उत्पीड़न का गंभीर आरोप है।
इसके अलावा, वह गुजरात में भी बलात्कार के एक अन्य मामले में दोषी करार दिए जा चुके हैं। इन तथ्यों को देखते हुए उनकी सजा निलंबित नहीं की जा सकती।
इसके ठीक बाद आसाराम के वकीलों ने बाईपास सर्जरी और एंजियोप्लास्टी की अनुमति मांगने के लिए एक नई याचिका अदालत में पेश की। फरवरी 2024 में अदालत ने आसाराम द्वारा सुझाई गई अस्पतालों की सूची को खारिज कर दिया और एम्स (AIIMS) जोधपुर की सिफारिश के आधार पर उन्हें एम्स, नई दिल्ली में इलाज कराने का सुझाव दिया।
मार्च 2024 में बचाव पक्ष के वकीलों ने हाई कोर्ट को बताया कि आसाराम पुलिस हिरासत में महाराष्ट्र के खोपोली स्थित माधवबाग मल्टीडिसिप्लिनरी कार्डियक केयर क्लिनिक में अपना इलाज कराने के इच्छुक हैं और इसके लिए वह पुलिस सुरक्षा का पूरा खर्च उठाने को भी तैयार हैं। माधवबाग अस्पताल ने भी अदालत को अवगत कराया कि आसाराम की हालत काफी गंभीर प्रतीत होती है, क्योंकि उन्हें हृदय रोग और किडनी की पुरानी बीमारी है।
हालांकि, रायगढ़ के जिला पुलिस अधीक्षक (जिनके अधिकार क्षेत्र में माधवबाग आता था) ने एक रिपोर्ट सौंपते हुए सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का हवाला दिया और आसाराम को वहां स्थानांतरित करना असुरक्षित बताया।
आखिरकार 21 मार्च, 2024 को उच्च न्यायालय ने आसाराम की उम्र और सही इलाज पाने के उनके मौलिक अधिकार को ध्यान में रखते हुए, उन्हें पुलिस हिरासत में जोधपुर के आरोग्यधाम आयुर्वेदिक केंद्र ले जाने की अनुमति दे दी। इसके साथ ही माधवबाग के डॉक्टरों को उनके इलाज की देखरेख करने की अनुमति भी दी गई।
जमानत शर्तों में ढील और सुप्रीम कोर्ट से राहत
आसाराम 25 मार्च, 2024 से 2 अप्रैल तक अस्पताल में रहे। स्वास्थ्य में सुधार का हवाला दिए जाने के बाद, अदालत ने 16 अप्रैल को उन्हें फिर से 7-10 दिनों के लिए जोधपुर केंद्र में भर्ती होने की इजाजत दे दी। 26 जुलाई को हाई कोर्ट ने सुरक्षा खर्च उठाने की वह शर्त यह कहते हुए हटा दी कि आम नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करना राज्य की ही जिम्मेदारी है।
13 अगस्त को आसाराम को एक और बड़ी राहत मिली जब हाई कोर्ट ने माधवबाग अस्पताल में इलाज के लिए उन्हें सात दिन की ‘आपातकालीन पैरोल’ दे दी। इसे अदालत ने उनकी उम्र, लंबी हिरासत अवधि और मेडिकल बोर्ड द्वारा की गई बाईपास सर्जरी (CABG) की सिफारिश के आधार पर मंजूर किया था। 3 सितंबर को इसी पैरोल को पांच दिनों के लिए और बढ़ा दिया गया।
7 नवंबर, 2024 को अदालत ने जमानत की शर्तों में बड़ी ढील दी। कोर्ट ने कहा कि आसाराम अस्पताल प्रशासन के विवेक के अनुसार आरोग्यधाम में एक बार में अधिकतम 30 दिनों तक रह सकते हैं। इसी क्रम में 10 दिसंबर को उन्हें 17 दिनों के लिए माधवबाग अस्पताल में इलाज की अनुमति मिली और इस अवधि में उन्हें वापस जेल ले जाने से भी छूट दी गई।
7 जनवरी, 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर चर्चा किए बिना केवल चिकित्सकीय आधार पर 31 मार्च तक के लिए आसाराम को अंतरिम जमानत दे दी। इसका पालन करते हुए राजस्थान और गुजरात उच्च न्यायालयों ने भी इसी अवधि और उसके बाद जून-जुलाई 2025 तक जमानत की मियाद बढ़ा दी।
इस दौरान शिकायतकर्ता के वकील पी.सी. सोलंकी ने अदालत में जोरदार तर्क दिया कि आसाराम जमानत की स्वतंत्रता का दुरुपयोग कर रहे हैं और जेल से बाहर रहकर अपने शिष्यों को प्रवचन दे रहे हैं।
इसके जवाब में अतिरिक्त महाधिवक्ता दीपक चौधरी ने दो कांस्टेबलों की गवाही पेश की, जो अंतरिम जमानत के दौरान आसाराम के साथ तैनात थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि कथित गॉडमैन ने कोई प्रवचन नहीं दिया है। हाई कोर्ट ने भी आसाराम के उस हलफनामे को स्वीकार कर लिया जिसमें उन्होंने किसी भी समूह से मिलने या उपदेश देने से साफ इनकार किया था।
छह महीने की जमानत और फिर अंतिम फैसला
तारीखों के विस्तार का यह सिलसिला लगातार चलता रहा। 13 अक्टूबर, 2025 को आरोग्यम आयुर्वेदिक अस्पताल द्वारा प्रस्तुत किए गए एक मेडिकल सर्टिफिकेट में बताया गया कि आसाराम हृदय रोग, किडनी रोग, ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों का कमजोर होना), सार्कोपेनिया और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ब्लीडिंग जैसी कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि वह बेहद कमजोर हैं, व्हीलचेयर पर निर्भर हैं और दैनिक कार्यों के लिए भी उन्हें दूसरों की मदद की जरूरत होती है।
इसे देखते हुए राजस्थान हाई कोर्ट ने आसाराम को सीधे छह महीने की अंतरिम जमानत दे दी। अदालत ने यह भी संज्ञान लिया कि 86 वर्षीय आसाराम छूट (रेमिशन) सहित कुल 12 साल, 11 महीने और 27 दिन की सजा काट चुके हैं, जिसमें उनकी वास्तविक हिरासत अवधि 11 साल, 6 महीने और 3 दिन है।
जमानत मिलने के ठीक दो महीने बाद, शिकायतकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। शिकायतकर्ता की वकील शोभा गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि आसाराम जमानत की शर्तों का घोर उल्लंघन करते हुए सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया के कई वीडियो में आसाराम को उज्जैन, अयोध्या और गुजरात जैसे तीर्थस्थलों की यात्रा करते हुए देखा गया है।
इस बीच आसाराम के वकील देवदत्त कामत के नेतृत्व में बचाव पक्ष ने सजा निलंबन की अपील पर फैसला आने तक जमानत जारी रखने की गुहार लगाई। अदालत ने पहले 29 अप्रैल, 2026 और फिर अंततः 25 मई तक के लिए जमानत बढ़ा दी।
आखिरकार 27 मई, 2026 को राजस्थान हाई कोर्ट ने अपना बहुप्रतीक्षित फैसला सुना दिया। उम्रकैद की सजा को बरकरार रखते हुए अदालत ने अपने आदेश में लिखा:
“अपीलकर्ता उस समय 73 वर्ष के थे। अब वह 86 वर्ष के हैं। वह उम्र और बीमारियों के बोझ तले दबे हुए हमारे सामने खड़े हैं… लेकिन उनकी इस शारीरिक दुर्बलता की आड़ में पीड़िता की शांत, विनाशकारी और अकाट्य आवाज़ को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। इसे नज़रअंदाज़ करना समाज के उस भरोसे को तोड़ना होगा जो आपराधिक न्याय प्रणाली पर टिका है। यह एक ऐसा गलत संदेश देगा जो कोई भी अदालत कभी नहीं देना चाहेगी, खासकर तब जब अपराधी एक स्वयंभू भगवान के चोले के पीछे छिपा हो।”
आसाराम के वकील निशांत बोरा ने स्पष्ट किया है कि वे जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर करेंगे। वहीं, पीड़िता के वकील सोलंकी ने इस फैसले और आजीवन कारावास की सजा को न्याय की एक बहुत बड़ी जीत करार दिया है।
15 बार मिली राहत: एक नज़र में पूरा घटनाक्रम
| तिथि | घटनाक्रम |
| 21 मार्च, 2024 | हाई कोर्ट ने आसाराम को आरोग्यधाम केंद्र, जोधपुर ले जाने की अनुमति दी; 2 अप्रैल तक रुके। |
| 16 अप्रैल, 2024 | हाई कोर्ट ने उन्हें 7-10 दिनों के लिए जोधपुर केंद्र में भर्ती होने की इजाजत दी। |
| 26 जुलाई, 2024 | हाई कोर्ट ने सुरक्षा खर्च उठाने की شرط हटा दी। |
| 13 अगस्त, 2024 | माधवबाग अस्पताल में इलाज के लिए 7 दिन की ‘आपातकालीन पैरोल’ मिली। |
| 3 सितंबर, 2024 | आपातकालीन पैरोल को 5 दिनों के लिए बढ़ा दिया गया। |
| 7 नवंबर, 2024 | जमानत की शर्तों में ढील; अस्पताल प्रशासन के अनुसार अधिकतम अवधि तक आरोग्यधाम में रुकने की अनुमति। |
| 10 दिसंबर, 2024 | 17 दिनों के लिए माधवबाग अस्पताल में इलाज की मंजूरी। |
| 7 जनवरी, 2025 | सुप्रीम कोर्ट ने इलाज के लिए 31 मार्च तक अंतरिम जमानत दी। |
| 14 जनवरी, 2025 | राजस्थान हाई कोर्ट ने 31 मार्च तक; गुजरात हाई कोर्ट ने 30 जून (बाद में 1 जुलाई तक) जमानत दी। |
| 7 अप्रैल, 2025 | राजस्थान हाई कोर्ट ने 1 जुलाई तक; गुजरात ने 7 जुलाई और राजस्थान ने 9 जुलाई तक जमानत बढ़ाई। |
| 8 जुलाई, 2025 | राजस्थान हाई कोर्ट ने जमानत 12 अगस्त तक बढ़ा दी। |
| 11 अगस्त, 2025 | गुजरात हाई कोर्ट द्वारा 21 अगस्त तक विस्तार के बाद, राजस्थान हाई कोर्ट ने 29 अगस्त तक जमानत दी। |
| 13 अक्टूबर, 2025 | आरोग्यम अस्पताल ने मेडिकल सर्टिफिकेट पेश कर कई गंभीर बीमारियों की पुष्टि की। |
| 29 अक्टूबर, 2025 | राजस्थान हाई कोर्ट ने आसाराम को छह महीने की अंतरिम जमानत दे दी। |
| 29 अप्रैल, 2026 | अपील पर फैसला आने या 25 मई (जो भी पहले हो) तक जमानत मिली। |
| 25 मई, 2026 | जमानत की अवधि 7 जुलाई तक बढ़ा दी गई। |
| 27 मई, 2026 | राजस्थान हाई कोर्ट ने जमानत रद्द कर दी और आत्मसमर्पण का आदेश दिया। |
यह भी पढ़ें-
साइबर ठगों पर गुजरात पुलिस की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: 2289 करोड़ के खुलासे के बाद ‘ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0










