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संघ के ‘पुराने सिपहसालार’ नगेंद्र नाथ त्रिपाठी को मिली बड़ी जिम्मेदारी, उपेक्षित बुजुर्ग कार्यकर्ताओं को मनाएगी भाजपा

| Updated: June 2, 2026 12:53

आरएसएस के कद्दावर नेता को मिली राष्ट्रीय संयोजक की कमान, दशकों तक संगठन को सींचने वाले लेकिन अब हाशिए पर जा चुके वफादार कार्यकर्ताओं को फिर से मुख्यधारा में लाएगी पार्टी।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं को फिर से मुख्यधारा में लाने के लिए एक बड़ा सांगठनिक कदम उठाया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ प्रचारक नगेंद्र नाथ त्रिपाठी को पार्टी ने एक नव-गठित और बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। सोमवार को उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय संयोजक (नेशनल ऑर्गनाइज़र) नियुक्त किया गया है, जिनका मुख्य काम ‘वरिष्ठ कार्यकर्ताओं से संपर्क और संवाद’ साधना होगा।

नगेंद्र नाथ त्रिपाठी का सांगठनिक करियर लगभग चार दशकों का रहा है, जिसमें उन्होंने आरएसएस, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और भाजपा में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है। भाजपा नेताओं के अनुसार, उनके इस लंबे अनुभव और संघ परिवार के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के बीच उनके मजबूत नेटवर्क का लाभ उठाने के लिए ही उन्हें यह नई भूमिका दी गई है।

इस अभियान का उद्देश्य उन अनुभवी कार्यकर्ताओं की पहचान करना और उन्हें वापस जोड़ना है, जिन्होंने दशकों तक संगठन के लिए अपना जीवन समर्पित किया, लेकिन वर्तमान में वे किसी सांगठनिक या प्रशासनिक पद पर नहीं हैं।

पार्टी के भीतर लंबे समय से यह महसूस किया जा रहा था कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के विस्तार और लगातार चुनावी तैयारियों में व्यस्त रहने के कारण कई बुनियादी कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे थे। इसी असंतोष को दूर करने और अपने मूल आधार को मजबूत करने के लिए भाजपा नेतृत्व ने त्रिपाठी को मोर्चे पर उतारा है।

71 वर्षीय नगेंद्र नाथ त्रिपाठी अब तक रांची में रहकर बिहार और झारखंड के क्षेत्रीय संगठन मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। इस नई नियुक्ति के बाद अब उनका केंद्र दिल्ली स्थानांतरित हो जाएगा, जहां से वे देश भर में संघ परिवार के पुराने और वफादार कार्यकर्ताओं के साथ संपर्क मजबूत करने की कमान संभालेंगे।

उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर जिले के मूल निवासी त्रिपाठी ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत आरएसएस के पूर्णकालिक प्रचारक के रूप में की थी। साल 1988 में जब वे आजमगढ़ में विभाग प्रचारक थे, तब उन्हें एबीवीपी की जिम्मेदारी देकर पूर्वी उत्तर प्रदेश भेजा गया था।

इसके बाद वे लगातार सांगठनिक सीढ़ियां चढ़ते गए और हिंदी पट्टी में संघ के एक प्रमुख चेहरे के रूप में उभरे। बाद में उन्हें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और बिहार का क्षेत्रीय संगठन मंत्री बनाया गया, जहां उन्होंने जमीन पर मजबूत पकड़ बनाई।

उनके करियर में एक बड़ा मोड़ साल 2002 में आया, जब संघ ने उन्हें भाजपा में प्रतिनियुक्ति पर भेजा और उन्हें उत्तर प्रदेश भाजपा का संगठन महासचिव बनाया गया। यह वह समय था जब उत्तर प्रदेश भाजपा में बड़ा ढांचागत बदलाव हुआ था। दरअसल, 1990 के दशक से यूपी भाजपा चार क्षेत्रों में बंटी हुई थी और हर क्षेत्र का एक अलग संगठन महासचिव होता था।

लेकिन 2002 में इस व्यवस्था को खत्म कर पूरे राज्य के लिए एक एकीकृत ढांचा बनाया गया और त्रिपाठी को पूरे उत्तर प्रदेश की कमान सौंप दी गई। भाजपा में यह पद बेहद रसूखदार माना जाता है क्योंकि यह दल और संघ के बीच सेतु का काम करता है।

नगेंद्र नाथ त्रिपाठी लगभग एक दशक तक उत्तर प्रदेश में इस पद पर रहे और पार्टी के संगठन को विस्तार देते रहे। हालांकि, इस दौरान साल 2002 के बाद भाजपा उत्तर प्रदेश की सत्ता में सीधे तौर पर साल 2017 में ही लौट सकी। इसके बाद, साल 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले त्रिपाठी को बिहार भेजकर वहां की सांगठनिक जिम्मेदारी दी गई, जिसमें बाद में झारखंड को भी जोड़ दिया गया।

हाल ही में 8 जनवरी को नितिन नवीन को भाजपा का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था, जिसके बाद यह माना जा रहा था कि आने वाली नई टीम में भाजपा और संघ परिवार के बीच बेहतर तालमेल और समन्वय देखने को मिलेगा।

त्रिपाठी की यह नियुक्ति इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। अब त्रिपाठी और उनकी वरिष्ठ पदाधिकारियों की टीम देश भर का व्यापक दौरा करेगी, पुराने कार्यकर्ताओं की समस्याओं को सुनेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि संगठन के प्रति उनके योगदान को पूरा सम्मान मिले।

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