गुवाहाटी: पड़ोसी राज्य नागालैंड में बादल फटने और लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने असम में भारी तबाही मचाई है। इस जलप्रलय के कारण बुधवार को कम से कम 25 लोगों की जान चली गई और 100 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। राज्य के 16 जिलों में करीब 8 लाख लोग इस भयानक बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। इसके साथ ही इस मानसूनी सीजन में मरने वालों का कुल आंकड़ा बढ़कर 35 तक पहुंच गया है।
सबसे ज्यादा तबाही शिवसागर जिले में देखने को मिली है, जहां 17 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। मृतकों में चार महिलाएं और दो बच्चे भी शामिल हैं। इसके अलावा चराईदेव में पांच, गोलाघाट में दो और जोरहाट में एक व्यक्ति को अपनी जान गंवानी पड़ी है। ये चारों जिले नागालैंड की सीमा से सटे हुए हैं।
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, इन इलाकों की नदियां उफान पर हैं, जिसके चलते सड़कें, खेत और घर पूरी तरह से जलमग्न हो चुके हैं।
हालात का जायजा लेने के लिए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने प्रभावित जिलों का दौरा किया। उन्होंने इस प्राकृतिक आपदा को ‘अभूतपूर्व’ करार दिया है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में जान गंवाने वालों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का भी ऐलान किया।
मुख्यमंत्री सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर जानकारी देते हुए बताया कि अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में बादल फटने से असाधारण रूप से भारी बारिश हुई है। वहां सामान्य से क्रमशः 141 और 181 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। इस वजह से असम की ओर बाढ़ के पानी का ऐसा अभूतपूर्व बहाव हुआ जिसने उन जिलों को भी डुबो दिया जहां हाल के वर्षों में कभी बाढ़ नहीं आई थी। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार हर प्रभावित व्यक्ति तक मदद पहुंचाने का प्रयास कर रही है।
कई इलाकों से संपर्क टूट जाने के कारण नुकसान का पूरा आकलन अभी तक नहीं हो पाया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि अकेले शिवसागर जिले से अब तक लगभग 100 लोगों के लापता होने की खबर है। इस जिले में सीधे तौर पर 3.6 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।
इसके अलावा चराईदेव, जोरहाट, विश्वनाथ, धेमाजी, डिब्रूगढ़, गोलाघाट, कामरूप, कामरूप मेट्रोपॉलिटन, कार्बी आंगलोंग, नगांव, शिवसागर और तिनसुकिया जिलों में भी करीब 5.6 लाख लोग बाढ़ की विभीषिका झेल रहे हैं। राहत सामग्री पहुंचने में हो रही देरी की शिकायतों को स्वीकार करते हुए सरमा ने कहा कि कई गांव अभी भी मुख्य मार्गों से कटे हुए हैं। हालांकि, उन्होंने सभी प्रभावित परिवारों को उचित पुनर्वास और आजीविका सहायता का भरोसा दिलाया है।
प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, 10 जिलों में 273 राहत शिविर और वितरण केंद्र चलाए जा रहे हैं, जहां 12,200 से अधिक विस्थापित लोगों को शरण दी गई है। मंगलवार से अब तक सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, अग्निशमन सेवा और पुलिस के जवानों ने चराईदेव, गोलाघाट, जोरहाट और शिवसागर में 6,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है।
शुरुआती अनुमानों से पता चलता है कि 872 गांव और 24,210 हेक्टेयर कृषि भूमि पूरी तरह से डूब गई है। इसके साथ ही तटबंधों, सड़कों, पुलों और अन्य सार्वजनिक संपत्तियों को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
जोरहाट के निमतीघाट में ब्रह्मपुत्र नदी अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जबकि इसकी सहायक नदियां बूढ़ी दिहिंग और धनसिरी ने भी लाल निशान पार कर लिया है। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक असम में आंधी-तूफान और भारी बारिश का पूर्वानुमान जताते हुए ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है।
हालांकि मध्य असम और नागालैंड के ऊपर बना चक्रवाती तंत्र अब थोड़ा कमजोर पड़ गया है, लेकिन मौसम कार्यालय ने चेतावनी दी है कि स्थानीय स्तर पर होने वाली भारी बारिश बाढ़ के हालात को और गंभीर बना सकती है।
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