गुजरात एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) में अतिरिक्त निदेशक के पद पर तैनात एक आईपीएस अधिकारी ने एक ‘बिल्डर’ दंपति पर धोखाधड़ी का गंभीर आरोप लगाया है। अधिकारी का दावा है कि इस दंपति ने उनसे और उनके दिवंगत पिता से फ्लैट और प्लॉट के नाम पर 70.3 लाख रुपये ठग लिए हैं।
आरोप है कि दंपति ने एक फ्लैट और दो आवासीय प्लॉट देने का झांसा देकर उनसे यह मोटी रकम वसूली थी। लेकिन पैसे लेने के बावजूद उन्होंने न तो कभी सेल डीड (बिक्री विलेख) बनाई और न ही पैसे वापस किए।
इस मामले में चांदखेड़ा पुलिस ने अमित जानी और उनकी पत्नी जिग्नाशा के खिलाफ बीएनएस (BNS) के तहत धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया है। अधिकारी ने दंपति पर उनके परिवार के खिलाफ जातिसूचक टिप्पणी करने का भी आरोप लगाया है, जिसके चलते पुलिस ने एससी/एसटी (SC/ST) एक्ट की धाराएं भी लगाई हैं।
अपनी शिकायत में आईपीएस अधिकारी प्रवीनसिंह माल ने बताया कि उनकी मुलाकात जानी दंपति से साल 2014 में हुई थी। उस समय वह साबरकांठा में पुलिस अधीक्षक (SP) के पद पर तैनात थे। तब इस दंपति ने दावा किया था कि अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा, राजकोट, जामनगर और हलोल में उनके कई रियल एस्टेट प्रोजेक्ट चल रहे हैं।
एफआईआर के अनुसार, साल 2014 से 2019 के बीच इस दंपति ने अधिकारी और उनके पिता से 61.2 लाख रुपये ले लिए। प्रवीनसिंह माल का कहना है कि उनके पिता ने दंपति के झूठे आश्वासनों पर भरोसा करते हुए अपनी पेंशन की बचत और कृषि से हुई आय का सारा पैसा उनके पास निवेश कर दिया था। आरोप यह भी है कि अमित ने इन पैसों के लेनदेन की कोई रसीद नहीं दी थी।
शिकायत के मुताबिक, बाद में दंपति ने पुरानी रकम को चुकाने के एवज में जगतपुर के गोदरेज गार्डन सिटी स्थित ‘बेलवेडियर’ (Belvedere) में अपना एक फ्लैट देने की पेशकश की। फरवरी 2019 में उन्होंने एक मौखिक समझौते के जरिए फ्लैट नंबर ए-302 (A-302) का कब्जा अधिकारी को सौंप दिया, लेकिन वे कागजी कार्रवाई को लगातार टालते रहे।
इसके बाद साल 2020 में अमित ने प्रवीनसिंह माल को दो अन्य प्लॉट खरीदने के लिए मना लिया। इसके लिए उसने अधिकारी से 9.1 लाख रुपये और ले लिए। एफआईआर में बताया गया है कि ये प्लॉट कभी भी अधिकारी के नाम पर ट्रांसफर नहीं किए गए और न ही उन्हें यह अतिरिक्त रकम वापस मिली।
काफी समय बीत जाने के बाद जब अधिकारी ने अपने स्तर पर मामले की पड़ताल की, तो उन्हें पूरी सच्चाई का पता चला। प्रवीनसिंह माल को ज्ञात हुआ कि अमित असल में कोई डेवलपर है ही नहीं और जिन प्लॉट्स का उसने दावा किया था, वे उसके पास कभी मौजूद ही नहीं थे।
यह भी पढ़ें-
हार्दिक पटेल को कोर्ट से मिली बड़ी राहत: सरकार ने वापस लिया 8 साल पुराना आपराधिक केस











