महाराष्ट्र की वालिव पुलिस ने एक सनसनीखेज मामले का खुलासा करते हुए वसई के मशहूर उद्योगपति मोहनसिंह लक्ष्मणसिंह परमार (46) की हत्या के प्रयास की गुत्थी सुलझा ली है। इस मामले में पुलिस ने मास्टरमाइंड सहित कुल सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि जीएसएम फॉइल्स कंपनी के चेयरमैन ने 32 करोड़ रुपये का कर्ज चुकाने से बचने और कंपनी पर पूर्ण नियंत्रण हासिल करने के लिए अपने ही मैनेजिंग डायरेक्टर (एमडी) की हत्या की खौफनाक साजिश रची थी।
मुख्य आरोपी की पहचान 33 वर्षीय सागर भानुशाली के रूप में हुई है, जो जीएसएम फॉइल्स का चेयरमैन है, जबकि पीड़ित मोहनसिंह परमार इसी कंपनी में एमडी के पद पर कार्यरत हैं। पुलिस के अनुसार, ईरान-इजरायल तनाव के बाद अमेरिकी शेयर बाजार में आई भारी गिरावट के कारण भानुशाली को करोड़ों रुपये का भारी नुकसान हुआ था। इस अंतरराष्ट्रीय आर्थिक झटके ने उसे कर्ज के भारी बोझ तले दबा दिया, जिससे बाहर निकलने के लिए उसने यह आपराधिक कदम उठाया।
अधिकारियों ने बताया कि भानुशाली ने परमार को कंपनी में अपनी हिस्सेदारी खरीदने के लिए राजी किया था और इसके एवज में उसे लगभग 32 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे। हालांकि, बाद में यह भारी-भरकम रकम चुकाने के बजाय उसने परमार को हमेशा के लिए रास्ते से हटाने की योजना बनाई। आरोपी को लगा कि एमडी की मौत के बाद उसकी सारी वित्तीय देनदारी खत्म हो जाएगी और वह पूरी कंपनी का इकलौता मालिक बन जाएगा। इसी क्रूर इरादे से उसने 30 लाख रुपये में हत्या का सौदा किया और कातिलों को 5 लाख रुपये एडवांस भी दिए।
यह जानलेवा हमला 24 जुलाई को वसई पूर्व के नवजीवन स्थित डायमंड इंडस्ट्रियल एस्टेट में कंपनी परिसर के ठीक बाहर हुआ। मोटरसाइकिल सवार दो हमलावरों ने मोहनसिंह परमार का रास्ता रोका और उन पर गोलियां चला दीं। पहली गोली परमार के कंधे में जा लगी। जब हमलावर ने दूसरी गोली चलाने की कोशिश की, तो उसकी पिस्तौल अचानक जाम हो गई। इसके बाद उसने घबराकर हथियार की मुठिया से परमार पर जोरदार वार किया और मौके से फरार हो गया।
पुलिस जांच में शुरुआत से ही भानुशाली मुख्य संदिग्ध के रूप में राडार पर था। तकनीकी खुफिया जानकारी और स्थानीय सूचनाओं के आधार पर वालिव पुलिस की एक विशेष टीम ने उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की मदद से भानुशाली को यूपी से धर दबोचा। इसके बाद छह अन्य आरोपियों को भी अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार कर लिया गया। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त संजय शिंत्रे ने पुष्टि की है कि मुख्य आरोपी ने अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजार में भारी निवेश किया था और वहां हुए बड़े नुकसान की भरपाई के लिए ही उसने इस हत्याकांड का ताना-बाना बुना था।
इस आपराधिक घटना का सीधा असर कंपनी के शेयरों पर भी देखने को मिला है। शुक्रवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर जीएसएम फॉइल्स का शेयर 20 प्रतिशत के निचले सर्किट (लोअर सर्किट) के साथ 192 रुपये पर बंद हुआ। कंपनी ने एनएसई को सूचित किया है कि वालिव पुलिस स्टेशन के अंतर्गत नाइकपाड़ा इलाके में यह हिंसक घटना हुई है। हालांकि, वरिष्ठ प्रबंधन टीम ने संचालन में निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए तत्काल आवश्यक कदम उठाए हैं।
फार्मास्युटिकल उद्योग के लिए ब्लिस्टर फॉयल और एल्युमिनियम फार्मा फॉयल बनाने वाली इस कंपनी ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल वसई और अहमदाबाद में कंपनी की विनिर्माण सुविधाएं सामान्य रूप से काम कर रही हैं। घटना के तुरंत बाद एमडी परमार को त्वरित चिकित्सा सहायता प्रदान की गई थी। फिलहाल गोलीबारी में घायल हुए परमार की हालत स्थिर बताई जा रही है और उनके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हो रहा है।
गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपियों में कथित शूटर सुजीत देवन्द्रभाई पांडे, यूपी से अवैध हथियार का इंतजाम करने वाला मनोज मूलचंद ठठेरा और हथियार की खरीद में मदद करने वाला गोकुल ओमप्रकाश गौतम शामिल हैं। इसके अलावा रेकी करने, मोटरसाइकिल चलाने, शूटर को भगाने और सबूत नष्ट करने की कोशिश के आरोप में अनूप वीरेंद्र प्रजापति तथा वाहन की व्यवस्था करने वाले विजयकुमार प्रजापत विश्वकर्मा को भी पकड़ा गया है।
पुलिस फिलहाल उस पिस्तौल के मुख्य स्रोत का पता लगाने में जुटी है जिसका इस्तेमाल हमले में किया गया था। जांचकर्ता वैज्ञानिक, तकनीकी, डिजिटल, वित्तीय और फॉरेंसिक साक्ष्यों की मदद से इस बात की भी गहराई से जांच कर रहे हैं कि कहीं इस साजिश के तार किसी बड़े वाणिज्यिक, वित्तीय या संगठित अपराध नेटवर्क से तो नहीं जुड़े हैं।
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