प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लगाने वाले ऑस्ट्रेलिया के फैसले की जमकर सराहना की थी। पीएम की इस टिप्पणी से प्रेरणा लेते हुए अब गुजरात सरकार भी हरकत में आ गई है। राज्य सरकार 16 वर्ष से कम आयु के स्कूली छात्रों के बीच सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग को नियंत्रित करने के लिए एक सख्त ढांचा तैयार करने पर विचार कर रही है।
राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की है कि इस दिशा में काम शुरू कर दिया गया है। बच्चों में लगातार बढ़ रहे स्क्रीन टाइम और एआई पर उनकी अत्यधिक निर्भरता के कारण उनके मानसिक विकास पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए अब सरकार यह तलाश रही है कि स्कूली बच्चों के बीच इन तकनीकों के उपयोग को कैसे सीमित किया जाए।
पिछले सप्ताह आयोजित हुए ऑस्ट्रेलिया-भारत शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि सूचना प्रौद्योगिकी और सोशल मीडिया से जुड़े कानूनों में सुधार के ऑस्ट्रेलिया के प्रयास पूरी दुनिया के लिए अत्यधिक प्रेरणादायक हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया था कि भारत इन महत्वपूर्ण कदमों से बहुत कुछ सीख रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि सरकार की यह पूरी कवायद सिर्फ सोशल मीडिया को नियंत्रित करने तक सीमित नहीं है। बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, ध्यान केंद्रित करने की क्षमता और उनके व्यवहार पर सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों के बारे में तो पहले से ही काफी साक्ष्य मौजूद हैं, लेकिन अब एआई संचालित उपकरणों पर छात्रों की तेजी से बढ़ती निर्भरता भी सरकार की रडार पर आ गई है।
इस बात को लेकर चिंता लगातार बढ़ती जा रही है कि एआई पर बहुत अधिक निर्भर रहने के कारण छात्रों की खुद से सोचने, तर्क करने और स्वतंत्र रूप से समस्याओं को हल करने की रचनात्मक क्षमता खत्म होती जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, जब नए नियम और दिशानिर्देश तैयार किए जाएंगे, तो इन सभी गंभीर पहलुओं का बारीकी से परीक्षण किया जाएगा।
राज्य का शिक्षा विभाग फिलहाल ऑस्ट्रेलिया और यूरोप के कुछ हिस्सों में अपनाए गए नियामक उपायों का गहराई से अध्ययन कर रहा है। इसके साथ ही, आंध्र प्रदेश और गोवा जैसे राज्यों द्वारा उठाए गए कदमों पर भी पैनी नजर रखी जा रही है, जिन्होंने पहले ही 16 साल से कम उम्र के बच्चों के बीच सोशल मीडिया के उपयोग को हतोत्साहित करने के लिए नियम बनाने शुरू कर दिए हैं।
हालांकि, अधिकारियों ने यह भी माना है कि इन नियमों को जमीनी स्तर पर लागू करना एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। घर में किसी विशेष डिजिटल उपकरण पर सोशल मीडिया का इस्तेमाल बच्चे कर रहे हैं या वयस्क, इसकी निगरानी करना काफी मुश्किल काम है। एक अधिकारी ने स्वीकार किया कि इस तंत्र को विकसित करने के लिए बेहद सोच-समझकर और सावधानीपूर्वक विचार-विमर्श करने की आवश्यकता होगी।
किसी भी अंतिम नियम या ढांचे को मंजूरी देने से पहले सरकार व्यापक स्तर पर रायशुमारी करेगी। इसके तहत अभिभावकों, शिक्षाविदों, बाल मनोवैज्ञानिकों, डिजिटल सुरक्षा विशेषज्ञों और अन्य सभी संबंधित पक्षों के साथ विस्तार से चर्चा की जाएगी ताकि एक संतुलित नीति बनाई जा सके।
सूत्रों के अनुसार, यह महत्वपूर्ण प्रस्ताव अभी अपने शुरुआती चरण में ही है। दिशानिर्देशों का अंतिम स्वरूप क्या होगा और इसे कैसे लागू किया जाएगा, इस पर अभी कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया है। वहीं दूसरी तरफ, केंद्र सरकार भी इसी तरह का कदम उठाने पर विचार कर रही है और राज्य सरकार इस मामले में लगातार उनके संपर्क में बनी हुई है।
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