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अहमदाबाद की नई पहचान: अब सिर्फ आसमानी, क्रीम और हल्के भूरे रंग में रंगेगा भारत का पहला वर्ल्ड हेरिटेज सिटी

| Updated: July 10, 2026 15:21

जयपुर और पेरिस की तर्ज पर अब अहमदाबाद का ऐतिहासिक परकोटा भी खास रंगों में नजर आएगा। विश्व धरोहर शहर में एकरूपता और सुंदरता बनाए रखने के लिए इमारतों को सिर्फ आसमानी, क्रीम और हल्के भूरे रंग में रंगने का नया नियम लागू किया गया है।

भारत के पहले यूनेस्को विश्व धरोहर शहर अहमदाबाद ने अब दुनिया के चुनिंदा रंग-आधारित ऐतिहासिक शहरों के खास क्लब में अपनी जगह बना ली है। अब तक आपने जयपुर को उसके मशहूर टेराकोटा गुलाबी रंग, पेरिस को ल्यूटेशियन क्रीम चूना पत्थर और वेनिस को उसके संरक्षित पेस्टल रंगों के लिए जाना होगा। लेकिन अब अहमदाबाद का ऐतिहासिक परकोटा (वॉल्ड सिटी) भी अपनी एक नई और आकर्षक पहचान पेश करने जा रहा है।

एक नई नीति के तहत अब अहमदाबाद के वॉल्ड सिटी और उसके 200 मीटर के बफर जोन में स्थित इमारतों को केवल तीन रंगों में रंगा जा सकेगा। ये तय किए गए रंग हल्का आसमानी (स्काई ब्लू), क्रीम और हल्का भूरा (लाइट ब्राउन) हैं। अहमदाबाद नगर निगम (एएमसी) ने इस इलाके में होने वाले नए विकास कार्यों में एकरूपता बनाए रखने के मकसद से यह अहम फैसला लिया है।

नगर निगम के एक अधिकारी के अनुसार, सभी नई सरकारी और निजी इमारतों के लिए इन्हीं तीन रंगों को अंतिम रूप दिया गया है। हालांकि, पुरानी और विरासत वाली इमारतों के मालिकों को मुख्य अग्रभाग (फेसाड) को छोड़कर, नक्काशी वाले अन्य हिस्सों पर अलग रंग इस्तेमाल करने की छूट दी गई है। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य हेरिटेज जोन की नई इमारतों में एकरूपता और आंखों को सुकून देने वाला दृश्य तालमेल बिठाना है।

रंगों के अलावा, निकाय ने वॉल्ड सिटी के 6 वर्ग किलोमीटर और 200 मीटर के बफर जोन में आने वाले 2 किलोमीटर के क्षेत्र में किसी भी नए प्रोजेक्ट के लिए सख्त नियम लागू किए हैं। अब यहां किसी भी सरकारी या निजी निर्माण को मंजूरी देने से पहले ‘हेरिटेज इम्पैक्ट असेसमेंट’ (एचआईए) यानी विरासत प्रभाव मूल्यांकन कराना अनिवार्य कर दिया गया है।

सूत्रों का कहना है कि इस नीति पर विचार इस साल मार्च में यूनेस्को की दो सदस्यीय टीम के दौरे के बाद शुरू हुआ। इस टीम ने वॉल्ड सिटी की जीवंत विरासत पर बड़े बुनियादी ढांचागत प्रोजेक्ट्स के संभावित प्रभाव का बारीकी से मुआयना किया था। टीम ने विशेष रूप से कालूपुर रेलवे स्टेशन पुनर्विकास, दानापीठ मल्टीलेवल पार्किंग और गीतामंदिर बस टर्मिनस प्रोजेक्ट का आकलन किया था।

चूंकि ये तीनों प्रमुख प्रोजेक्ट हेरिटेज बफर जोन में आते हैं, इसलिए पूरी उम्मीद है कि इन तीनों पर भी यही तीन नए स्वीकृत रंग लागू किए जाएंगे। यूनेस्को की यह टीम जल्द ही नगर निगम को अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने वाली है।

इस बीच, नगर निगम ने एचआईए (विरासत प्रभाव मूल्यांकन) करने के लिए 100 से अधिक आर्किटेक्ट्स को पंजीकृत किया है। इसके साथ ही, नए निर्माण कार्यों के लिए शहरी डिजाइन दिशानिर्देश, एक डिजाइन टूलकिट और एक नई एचआईए नीति भी पेश की गई है। वॉल्ड सिटी में गैर-विरासत इमारतों के लिए एचआईए आवेदनों की जांच में तेजी लाने के लिए हेरिटेज कंजर्वेशन कमेटी के तहत एक विशेष उप-समिति का गठन भी किया गया है।

शहर की ऐतिहासिक पोल (मोहल्लों) के दरवाजों के जीर्णोद्धार के लिए निगम ने एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी तैयार की है। निकाय सूत्रों के अनुसार, देशभर की ऐतिहासिक और विरासत संपत्तियों के संरक्षण और रखरखाव के लिए एक विशेष संस्थान स्थापित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी गई है।

गौरतलब है कि यूनेस्को ने 8 जुलाई 2017 को अहमदाबाद को ‘विश्व धरोहर शहर’ घोषित किया था। इस शहर में 2,692 सूचीबद्ध विरासत संपत्तियां हैं। इसके अलावा वॉल्ड सिटी के बाहर के क्षेत्रों में 382 संपत्तियां अस्थायी सूची में शामिल हैं।

इन ऐतिहासिक धरोहरों को उनके महत्व के आधार पर ग्रेड I, ग्रेड II-ए, ग्रेड II-बी और ग्रेड III में वर्गीकृत किया गया है और प्रत्येक श्रेणी के अनुसार अलग-अलग संरक्षण नियम लागू होते हैं। विरासत संपत्तियों के नवीनीकरण के लिए ‘हेरिटेज ट्रेडेबल डेवलपमेंट राइट्स’ योजना का भी बखूबी इस्तेमाल किया जा रहा है। अब तक 17,519 वर्ग मीटर में फैली 145 संपत्तियों ने इस शानदार योजना का लाभ उठाया है।

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