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डिजिटल क्रांति का नया गढ़ बनेगा गुजरात: मेटा लगाएगा महा-डेटा सेंटर, दिग्गज कंपनियों से मिले ₹8.5 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव

| Updated: July 10, 2026 15:12

नई नीति आते ही ₹8.5 लाख करोड़ के निवेश का रास्ता साफ; मेटा, रिलायंस और अडानी जैसी दिग्गज कंपनियां धोलेरा और जामनगर में लगाएंगी बड़े प्रोजेक्ट्स।

गांधीनगर: अमेरिकी टेक दिग्गज मेटा (Meta) ने गुजरात को अपने वैश्विक डेटा सेंटर मानचित्र पर शामिल कर लिया है। कंपनी ने राज्य में 168 मेगावाट (MW) क्षमता का एक बड़ा डेटा सेंटर स्थापित करने में गहरी दिलचस्पी दिखाई है।

दिलचस्प बात यह है कि राज्य सरकार द्वारा गुरुवार को अपनी नई डेटा सेंटर नीति की घोषणा करने के तुरंत बाद ही गुजरात को करीब 8.5 लाख करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश के प्रस्ताव मिल चुके हैं।

देश के बड़े बिजनेस घरानों और वैश्विक तकनीकी कंपनियों ने जिन परियोजनाओं का प्रस्ताव रखा है, वे सरकार के अपने तय लक्ष्यों से भी काफी आगे निकल गई हैं। नई नीति के तहत सरकार ने 7.5 गीगावाट (GW) क्षमता का लक्ष्य रखा था, जबकि कंपनियों के प्रस्ताव इससे कहीं अधिक हैं।

वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के अनुसार, निवेश की इच्छा जताने वाले प्रमुख दिग्गजों में मेटा के अलावा रिलायंस ग्रुप, अडानी ग्रुप, टाटा ग्रुप, टॉरेंट ग्रुप, CtrlS, नेक्सजेन (NexGen), वारि ग्रुप (Waaree Group), पेटीएम (Paytm), यूपीएल (UPL) और वेलस्पन (Welspun) शामिल हैं। सामूहिक रूप से ये सभी परियोजनाएं लगभग 8.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश का प्रतिनिधित्व करती हैं।

शीर्ष सूत्रों की मानें तो इन सभी प्रस्तावित सुविधाओं को साल 2029 तक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। इस समयसीमा के भीतर काम पूरा होने के बाद गुजरात देश में डिजिटल बुनियादी ढांचे (डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर) के सबसे बड़े केंद्रों में से एक बनकर उभरेगा।

मेटा के इस प्रोजेक्ट को लेकर सरकार ने धोलेरा (Dholera) को एक संभावित और बेहतर स्थान के रूप में सुझाया है। हालांकि, सोशल मीडिया और टेक क्षेत्र की इस दिग्गज कंपनी ने अभी तक अंतिम स्थान पर कोई फैसला नहीं लिया है।

दूसरी ओर, रिलायंस ग्रुप द्वारा जामनगर में अपना डेटा सेंटर कैंपस विकसित करने की उम्मीद है। वहीं अडानी ग्रुप, टाटा ग्रुप, वेलस्पन और कई अन्य कंपनियां अपने प्रोजेक्ट्स को धोलेरा में स्थापित कर सकती हैं, जो बड़े भूखंडों की उपलब्धता और सुनियोजित बुनियादी ढांचे के कारण हाइपरस्केल डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए एक पसंदीदा ठिकाना बन रहा है।

राज्य की किसी नीति को लेकर हाल के वर्षों में मिली यह सबसे बड़ी प्रतिक्रियाओं में से एक है। कुल 20 कंपनियों ने डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए अपनी रुचि व्यक्त (EOIs) की है, जिनकी कुल संयुक्त क्षमता 10.5 गीगावाट बैठती है। यह मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल द्वारा गुरुवार को गांधीनगर में घोषित ‘विकसित गुजरात डेटा सेंटर नीति 2026-29’ के 7.5 गीगावाट के लक्ष्य से काफी ज्यादा है।

अधिकारियों का कहना है कि उद्योगों का यह जबरदस्त भरोसा राज्य की उस रणनीति को सही साबित करता है, जिसके तहत गुजरात खुद को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) संचालित कंप्यूटिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर, क्लाउड सर्विसेज और हाइपरस्केल डेटा सेंटर्स के लिए सबसे बेहतरीन डेस्टिनेशन के रूप में पेश कर रहा है।

इस नई नीति के तहत एक विशेष प्रोत्साहन पैकेज तैयार किया गया है, जिसका उद्देश्य बड़े निवेश को आकर्षित करना है। इसमें बिजली की विश्वसनीय उपलब्धता, त्वरित मंजूरियां और मजबूत सहायक बुनियादी ढांचा शामिल है।

फिलहाल सरकारी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अब तक प्राप्त प्रस्ताव केवल रुचि अभिव्यक्ति (एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट) के रूप में हैं। इन्हें अब विस्तृत परियोजना योजना, भूमि आवंटन और आवश्यक वैधानिक मंजूरी की प्रक्रियाओं के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा।

इस नीति को लॉन्च करते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि गुजरात खुद को देश में डेटा सेंटर और डिजिटल बुनियादी ढांचे के लिए सबसे पहली पसंद बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि यह नीति राज्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ अगली पीढ़ी की तकनीकों के लिए एक बेहतरीन इकोसिस्टम तैयार करेगी।

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