अहमदाबाद: यह मौत के साथ सीधा और खौफनाक मुकाबला था। 45 वर्षीय मालधारी चरवाहे कालू परमार अच्छी तरह जानते थे कि उनकी एक छोटी सी गलती उनके लिए जानलेवा साबित हो सकती है। सोमवार सुबह पालीताणा तालुका के गराजिया गांव में एक युवा शेर ने उन्हें करीब 30 मिनट तक जमीन पर दबाए रखा। लेकिन इस खौफनाक मंजर के बीच भी कालू घबराए नहीं। उन्होंने शेर की आंखों में आंखें डालीं और बिल्कुल शांत रहे। अंततः मौत को ही अपने कदम पीछे खींचने पड़े।
कालू बताते हैं कि वह मौत को बिल्कुल करीब से देख रहे थे और हर बीतता सेकंड उनके लिए आखिरी लग रहा था। अपनी जान बचने को वह ईश्वर की कृपा मानते हैं। इस रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना का वीडियो वायरल होने के बाद, अब दुनिया भर में लोग उन्हें उस शख्स के रूप में जान रहे हैं जिसने एक खूंखार शिकारी का सामना बेहद शांति और सूझबूझ से किया।
उस भयानक घटना को याद करते हुए उन्होंने बताया कि वह अपनी गाय बांधकर आंगन में खड़े थे। जैसे ही वह घर के अंदर जाने के लिए मुड़े, पीछे से किसी भारी चीज ने उन पर छलांग लगा दी। जब तक वह कुछ समझ पाते, वह जमीन पर गिर चुके थे। कुछ ही सेकंड में उन्हें यह खौफनाक एहसास हो गया कि वह किसी और के नहीं बल्कि एक शेर के शिकंजे में हैं।
शुरुआती कुछ मिनटों तक शेर ने कालू के हाथ को अपने जबड़े में मजबूती से जकड़े रखा। संघर्ष करने या हाथ छुड़ाने की कोशिश करने के बजाय, कालू ने एक ऐसा फैसला लिया जिसने पल भर में माहौल की गर्माहट को कम कर दिया। हालांकि, वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक बेहद खतरनाक कदम हो सकता था। किसी भी जंगली शेर को प्यार से सहलाने की कोशिश को वह जानवर अपने लिए खतरा भी मान सकता है।
कालू ने सोचा कि अगर वह जानवर के सिर और गर्दन को हल्के हाथ से सहलाएंगे, तो शायद वह उनकी बांह छोड़ दे। उनकी यह तरकीब काम कर गई, लेकिन शेर पूरी तरह से वहां से हटने को तैयार नहीं था। कालू लगातार उसे सहलाते रहे ताकि उसे यह यकीन हो जाए कि उनसे कोई खतरा नहीं है। दोनों एक-दूसरे को देखते रहे और कालू ने पूरी कोशिश की कि वह एकदम शांत रहें।
उन खौफनाक 30 मिनटों के दौरान कालू की आंखों के सामने उनकी पत्नी, पांच बेटियों और एक बेटे का चेहरा घूम रहा था। उनके मन में बस यही खयाल आ रहा था कि उनकी मौत अस्पताल में होगी या फिर उसी जगह पर। लेकिन किस्मत उनके साथ थी और उस खूंखार जानवर ने उन्हें बख्श दिया।
विशेषज्ञों की मानें तो जंगली जानवरों के ऐसे हमलों के दौरान बचाव का कोई एक तय तरीका नहीं होता है। इसके परिणाम पूरी तरह से जानवर के व्यवहार और तत्कालीन परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं। लेकिन कालू के मामले में उनका शांत रहना उनके काम आया और वह केवल मामूली चोटों के साथ सुरक्षित बच निकले। आपको बता दें कि कालू हाल ही में एक बीमारी से उबरे थे। फ्लू के कारण अस्पताल में भर्ती रहने के बाद उन्हें महज 10 दिन पहले ही वहां से छुट्टी मिली थी।
गराजिया गांव के लोग अक्सर पास के जंगल से शेरों की दहाड़ सुनते रहते हैं, लेकिन किसी ने कभी गांव के अंदर शेर नहीं देखा था। कालू ने कहा कि उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था कि उनके अपने ही घर के आंगन में किसी शेर से इस तरह उनका आमना-सामना हो जाएगा।
इस बीच, वन विभाग ने मंगलवार को यह स्पष्ट किया कि कालू पर हमला करने वाला जानवर एक शेर था, न कि शेरनी जैसा कि शुरुआत में माना जा रहा था। वन रक्षकों और अधिकारियों की 32 सदस्यीय टीम ने इस युवा शेर को खोजने और रेस्क्यू करने के लिए गांव के आसपास के इलाकों में एक बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। माना जा रहा है कि भारी बारिश के कारण यह शेर पास के जंगल में चला गया है।
उप वन संरक्षक चिराग अमीन ने बताया कि इस रेस्क्यू अभियान का मुख्य उद्देश्य शेर की पहचान करना और यह पता लगाना है कि क्या उसे पहले भी कभी पकड़ा गया था। यदि यह पाया जाता है कि उस क्षेत्र में शेरों की आबादी पहले से ही बहुत अधिक है, तो वन विभाग इस जानवर को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने पर भी विचार कर सकता है।
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