अगर आप भी अक्सर ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करते हैं, तो अब आपको सावधान होने की जरूरत है। सरकार ऐसे आदतन अपराधियों को फिर से ड्राइविंग स्कूल भेजने की तैयारी कर रही है। सड़क परिवहन मंत्रालय ने एक ऐसी योजना का मसौदा तैयार किया है जिसके तहत बार-बार नियम तोड़ने वालों को अपना लाइसेंस रिन्यू कराने से पहले दोबारा ड्राइविंग टेस्ट पास करना होगा।
मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) में होने वाले व्यापक बदलावों का यह प्रस्ताव एक अहम पड़ाव पार कर चुका है। उम्मीद है कि इसे आगामी मानसून सत्र में संसद में पेश किया जा सकता है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व वाले मंत्रियों के एक अनौपचारिक समूह के समक्ष ये मसौदा संशोधन पिछले सप्ताह रखे गए थे, जिस पर इस पैनल ने अपनी सहमति दे दी है।
राज्यों और विभिन्न मंत्रालयों के साथ लगभग दो साल की लंबी चर्चा के बाद इसे अंतिम रूप दिया जा रहा है। अब मंत्रालय इस विधेयक की भाषा को परिष्कृत करके सांसदों के पास भेजने की तैयारी में है। इन सभी बदलावों का मुख्य उद्देश्य सड़कों को सुरक्षित बनाना और लापरवाह ड्राइवरों के साथ-साथ बिना बीमा वाले वाहनों पर भारी दबाव बनाना है।
सड़क हादसे के पीड़ितों के लिए अंतरिम मुआवजा
इन प्रस्तावों में सबसे बड़ा और दूरगामी फैसला सड़क दुर्घटना के पीड़ितों के परिवारों से जुड़ा है, जिन्हें अक्सर अपने दावों के निपटारे के लिए वर्षों तक इंतजार करना पड़ता है। नए प्रस्ताव के तहत मंत्रालय मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरणों (MACTs) को अंतरिम मुआवजा देने का अधिकार देना चाहता है।
इससे पीड़ितों को मामले के अंतिम फैसले तक इंतजार करने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा। नए प्लान के तहत न्यायाधिकरण अपने विवेक के अनुसार उचित अंतरिम राहत दे सकेगा, जिससे दुखी या घायल परिवारों को जल्द ही आर्थिक मदद मिल सकेगी।
एक वकील और सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ अमरजीत सिंह ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि न्यायाधिकरणों द्वारा अंतरिम मुआवजे की अनुमति देने का फैसला सराहनीय है, क्योंकि अक्सर ऐसे मामलों के अंतिम निपटारे में बहुत देरी होती है।
अपील करना अब होगा और भी महंगा
नए मसौदे में न्यायाधिकरण के आदेश को चुनौती देने वालों के लिए वित्तीय जोखिम भी काफी बढ़ाया गया है। फिलहाल, किसी अवार्ड का विरोध करने वाले बीमाकर्ता या दोषी पक्ष को केवल 25,000 रुपये या अवार्ड राशि का आधा हिस्सा (जो भी कम हो) पहले जमा करना होता है।
अब इस आंकड़े को बढ़ाकर 10 लाख रुपये या अवार्ड का 50 प्रतिशत (जो भी कम हो) करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसी तरह, हाई कोर्ट में मामला ले जाने की सीमा भी 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी जाएगी। इससे किसी भी विवाद को बिना वजह लंबा खींचना काफी महंगा साबित होगा।
थर्ड-पार्टी प्रीमियम तय करने का जिम्मा फिर से IRDAI को
नीतिगत स्तर पर बदलाव करते हुए मंत्रालय थर्ड-पार्टी बीमा प्रीमियम तय करने का काम वापस बीमा नियामक, IRDAI को सौंपना चाहता है। यह दरें वाहन की उम्र और उसके चालान इतिहास के आधार पर तय की जाएंगी। साल 2019 के संशोधन में यह शक्ति सड़क परिवहन मंत्रालय को दे दी गई थी, लेकिन अब यह जिम्मेदारी वापस बीमा नियामक को मिलने वाली है।
लाइसेंस रद्द होने पर तीन साल का कड़ा इंतजार
अपना लाइसेंस खोने के बाद जल्द ही दूसरा मौका पाने की उम्मीद करने वाले ड्राइवरों को अब निराशा हाथ लग सकती है। मंत्रालय ने प्रस्ताव दिया है कि जिस भी व्यक्ति का ड्राइविंग लाइसेंस रद्द होगा, उसे नया लाइसेंस बनवाने के लिए पूरे तीन साल तक इंतजार करना होगा। यह कड़ा नियम विशेष रूप से उन लोगों को ध्यान में रखकर बनाया गया है जो बार-बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करते हैं।
मेडिकल सर्टिफिकेट की उम्र सीमा में राहत
वर्तमान में, 40 वर्ष से अधिक उम्र के ड्राइवरों को नया लाइसेंस प्राप्त करने या मौजूदा लाइसेंस को रिन्यू कराने के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट की आवश्यकता होती है। नए नियमों में इस आयु सीमा को बढ़ाकर सीधे 60 वर्ष करने की तैयारी है। इससे युवा और अधेड़ उम्र के ड्राइवरों को लाइसेंस रिन्यूअल के समय एक बड़ी बाधा से मुक्ति मिल जाएगी।
सड़क सुरक्षा से कोई समझौता नहीं
सड़क सुरक्षा के जानकारों ने इन सुधारों की दिशा की काफी सराहना की है। दिल्ली के पूर्व उप परिवहन आयुक्त अनिल छिकारा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जीवन जीने में आसानी (ease of living) और व्यापार करने में आसानी (ease of doing business) के नाम पर, हमें उन बुनियादी मापदंडों के साथ बिल्कुल समझौता नहीं करना चाहिए जो सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए आवश्यक हैं।
कुछ प्रस्तावों पर उठ रहे हैं सवाल
हालांकि, हर प्रस्ताव की तारीफ नहीं हो रही है। अगर कोई व्यक्ति छह साल से कम उम्र के बच्चे को साथ लेकर वाहन चलाते समय ट्रैफिक नियम तोड़ता है, तो उस पर दोगुना जुर्माना या पेनल्टी लगाने की योजना ने लोगों का ध्यान खींचा है। विशेषज्ञों को डर है कि इस विशिष्ट प्रावधान का ट्रैफिक पुलिस द्वारा दुरुपयोग किया जा सकता है, जिससे बाल-सुरक्षा का यह उपाय सड़क पर उत्पीड़न का एक जरिया बन सकता है।
आगे की रूपरेखा
मंत्रियों के अनौपचारिक समूह से मंजूरी मिलने के बाद, अब विधेयक को अंतिम रूप देने की पूरी जिम्मेदारी सड़क परिवहन मंत्रालय के हाथों में है। अगर सब कुछ तय समय के अनुसार हुआ, तो संसद मानसून सत्र के दौरान इस पर विचार कर सकती है।
इसका सीधा मतलब यह है कि बार-बार नियम तोड़ने वाले, बिना बीमा वाले वाहन मालिक और सस्पेंशन के बाद तुरंत लाइसेंस रिन्यूअल की उम्मीद करने वालों को बहुत जल्द पूरी तरह से नए और सख्त नियमों के तहत गाड़ी चलानी होगी।
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