अहमदाबाद। गुजरात पुलिस के कई इंस्पेक्टर इन दिनों अजीबोगरीब और असहज स्थिति का सामना कर रहे हैं। उनके टेलीग्राम अकाउंट से सहकर्मियों और वरिष्ठ अधिकारियों को अचानक अश्लील (पॉर्न) लिंक भेजे जाने लगे हैं।
सीआईडी (क्राइम) साइबर सेल को अंदेशा है कि यह किसी खतरनाक मालवेयर अटैक का नतीजा हो सकता है, जिसने इन पुलिस अधिकारियों के अकाउंट्स में सेंधमारी की है। ऐसा माना जा रहा है कि यह वायरस यूजर्स द्वारा किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने के बाद तेजी से फैला है।
इस चौंकाने वाले घटनाक्रम के बाद जांचकर्ता अब इस बात की गहराई से पड़ताल कर रहे हैं कि क्या हैकर्स ने जानबूझकर पुलिस बल को ही अपना निशाना बनाया है।
राज्य की एक पुलिस एजेंसी में तैनात एक प्रभावित इंस्पेक्टर ने अपनी आपबीती साझा की। उन्होंने बताया कि उन्हें अपने एक परिचित कपड़ा व्यापारी के नंबर से टेलीग्राम पर एक मैसेज मिला था। मैसेज को सही समझकर उन्होंने दिए गए लिंक पर क्लिक कर दिया।
हालांकि, जैसे ही उन्हें एहसास हुआ कि इसमें आपत्तिजनक सामग्री है, उन्होंने तुरंत उस मैसेज को डिलीट कर दिया। अधिकारी ने आगे बताया कि अगले ही दिन उनके साथी पुलिसकर्मियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने उनसे पूछना शुरू कर दिया कि उन्होंने उन्हें अश्लील लिंक क्यों भेजे हैं। तब जाकर उन्हें यह समझ आया कि उनका टेलीग्राम अकाउंट पूरी तरह से हैक हो चुका है।
शुरुआत में इस अधिकारी ने एक निजी साइबर विशेषज्ञ की मदद ली। विशेषज्ञ ने उनके फोन को पूरी तरह फॉर्मेट किया और उसमें नया एंटीवायरस सॉफ्टवेयर भी इंस्टॉल कर दिया। इन तमाम कोशिशों के बावजूद उनके अकाउंट से अश्लील लिंक भेजे जाने का सिलसिला नहीं रुका। थक-हारकर उन्हें अंततः साइबर सेल का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
गांधीनगर में तैनात एक अन्य इंस्पेक्टर का भी यही हाल हुआ। उन्हें भी अपने एक साथी अधिकारी के हैक हुए अकाउंट से बिल्कुल वैसा ही पॉर्न लिंक मिला था। इस अधिकारी का कहना है कि वे भी साइबर सेल के पास यह समझने के लिए गए हैं कि आखिर यह सब कैसे और क्यों हो रहा है।
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों के भीतर कई इंस्पेक्टरों और अन्य पुलिसकर्मियों को ऐसे ही संदिग्ध लिंक प्राप्त हुए हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या हैकर्स का टारगेट विशेष रूप से पुलिस महकमा था, या फिर कुछ शुरुआती अकाउंट्स के हैक होने के बाद मालवेयर कॉन्टैक्ट लिस्ट के जरिए अपने आप फैलता चला गया।
इस पूरे मामले पर एक साइबर क्राइम अधिकारी ने विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस तरह के अनजान लिंक पर क्लिक करने से डिवाइस में मालवेयर इंस्टॉल हो सकता है और हैकर्स को फोन का पूरा एक्सेस मिल जाता है।
एक बार नियंत्रण मिलने के बाद, अपराधी मैसेजिंग ऐप्स का गलत इस्तेमाल करते हैं, पूरी कॉन्टैक्ट लिस्ट चुरा लेते हैं और स्वचालित रूप से सभी को वही खतरनाक लिंक भेजने लगते हैं। अगर समय रहते इस सेंधमारी पर ध्यान नहीं दिया गया, तो पीड़ित वित्तीय धोखाधड़ी का भी शिकार हो सकते हैं और उनके संपर्क में आने वाले सभी लोगों के लिए भी बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।
फिलहाल इस सनसनीखेज मामले में अब तक कोई एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की गई है। सीआईडी (क्राइम) की साइबर सेल इस पूरे मालवेयर की बारीकी से जांच कर रही है, इसके स्रोत का पता लगाने की कोशिश कर रही है और यह आंकलन कर रही है कि यह हैकिंग कितने बड़े पैमाने पर हुई है।
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