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भारत में चॉकलेट का बढ़ता क्रेज़: जेन-जी की डिमांड ने कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने पर किया मजबूर

| Updated: July 9, 2026 16:38

2030 तक 3.58 अरब डॉलर का होगा भारत का चॉकलेट बाजार, युवाओं (Gen Z) की बढ़ती मांग को पूरी करने के लिए अमूल जैसी दिग्गज कंपनियों ने बढ़ाई उत्पादन क्षमता।

वडोदरा/सूरत: भारत में अब चॉकलेट खाने का शौक केवल त्योहारों तक सीमित नहीं रह गया है। युवा उपभोक्ताओं और प्रीमियम उत्पादों की लगातार बढ़ती मांग को देखते हुए निर्माता अपनी उत्पादन क्षमता तेजी से बढ़ाने में जुट गए हैं।

उद्योग जगत के अनुमान इस बड़े बदलाव की साफ गवाही दे रहे हैं। साल 2025 में 2.48 अरब डॉलर का रहने वाला भारत का चॉकलेट बाजार 2030 तक 3.58 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। बाजार में यह उछाल मुख्य रूप से जेन-जी (Gen Z) उपभोक्ताओं, प्रीमियम उत्पादों की चाहत और चलते-फिरते खाए जा सकने वाले स्नैक्स की बढ़ती लोकप्रियता के कारण आ रहा है।

आंकड़ों के अनुसार, चॉकलेट की कुल बिक्री में लगभग 69 प्रतिशत हिस्सेदारी सुविधा स्टोर (Convenience stores) की है। वहीं कुल उपभोक्ता खर्च में अकेले जेन-जी वर्ग का योगदान करीब 43 प्रतिशत है।

इस सुनहरे अवसर को भांपते हुए देश की दिग्गज डेयरी कंपनी अमूल ने पिछले एक साल में अपनी चॉकलेट निर्माण क्षमता को दोगुना कर दिया है। मौजूदा तिमाही में साल-दर-साल 100 प्रतिशत की शानदार बिक्री वृद्धि दर्ज करने के बाद, कंपनी अब आनंद के पास स्थित अपने मोगर प्लांट में उत्पादन क्षमता को 25 प्रतिशत और बढ़ाने की योजना बना रही है।

गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (जीसीएमएमएफ) के प्रबंध निदेशक जयेन मेहता ने इस सफलता पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि पिछले साल निर्माण क्षमता दोगुनी करने के बाद, इस तिमाही में पिछले साल के मुकाबले बिक्री में 100 प्रतिशत का उछाल आया है। यह अमूल ब्रांड पर उपभोक्ताओं के अटूट भरोसे का सीधा परिणाम है।

भारत के डार्क चॉकलेट सेगमेंट में अमूल पहले से ही अग्रणी है। कंपनी का कहना है कि अब उसकी शुगर-फ्री डार्क चॉकलेट कुल बिक्री में लगभग 10 प्रतिशत का योगदान दे रही है। पोषण पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए, यह संस्था अब अपने पोर्टफोलियो का विस्तार करने के लिए जल्द ही एक हाई-प्रोटीन चॉकलेट वेफर बार लॉन्च करने की तैयारी भी कर रही है।

पिछले दो सालों से कोको की कीमतों में हो रही भारी बढ़ोतरी अब रुक गई है, जिसने निर्माताओं को राहत दी है। कीमतों में आए इस हालिया ठहराव ने कंपनियों को अपनी विस्तार योजनाओं में और तेजी लाने के लिए प्रोत्साहित किया है। जयेन मेहता के अनुसार, कोको की कीमतें पिछले चार से पांच महीनों से स्थिर बनी हुई हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए संस्था इस साल एक बार फिर क्षमता विस्तार का नया चरण शुरू करेगी।

अमूल डेयरी के प्रबंध निदेशक अमित व्यास ने बताया कि 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मोगर के त्रिभुवनदास फूड कॉम्प्लेक्स में प्लांट का उद्घाटन किए जाने के बाद से चॉकलेट व्यवसाय में जबरदस्त तेजी आई है। शुरुआत में इस प्लांट की क्षमता पांच गुना बढ़ाई गई थी, जिसका महज दो साल के भीतर पूरा इस्तेमाल होने लगा। बढ़ती मांग के कारण अमूल को अपनी क्षमता फिर से दोगुनी करके सालाना 24,000 मीट्रिक टन करनी पड़ी।

उत्पादन बढ़ाने की यह होड़ केवल सहकारी समितियों तक सीमित नहीं है। सूरत स्थित श्मिटेन लक्ज़री चॉकलेट्स भी विस्तार कर रही है और अपनी वर्तमान 600 टन की क्षमता में हर महीने 300 टन का अतिरिक्त इजाफा कर रही है।

श्मिटेन लक्ज़री चॉकलेट्स के चेयरमैन जयेश देसाई ने कहा कि अब चॉकलेट सिर्फ खास मौकों पर खाया जाने वाला उत्पाद नहीं रह गया है, बल्कि यह रोज़मर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। उनके अनुसार, युवा उपभोक्ता लगातार नए फ्लेवर, सुविधाजनक फॉर्मेट और प्रीमियम चॉकलेट अनुभव की मांग कर रहे हैं, जिससे पूरे पोर्टफोलियो में शानदार ग्रोथ देखने को मिल रही है।

जयेश देसाई ने इस बात पर जोर दिया कि चॉकलेट उद्योग में हो रहा यह निरंतर निवेश भारत में इस क्षेत्र की लंबी अवधि की संभावनाओं को दर्शाता है। बढ़ता प्रीमियम बाजार, रिटेल क्षेत्र की व्यापक पहुंच और युवाओं के बीच बढ़ती खपत, भविष्य में इस उद्योग के निरंतर विकास के लिए बड़े अवसर पैदा कर रहे हैं।

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