अहमदाबाद/पेरिस: अडानी ग्रुप की प्रमुख कंपनी अडानी एंटरप्राइज़ेज़ लिमिटेड (एईएल) ने रसायन निर्माण के क्षेत्र में एक बड़ा और अहम कदम उठाया है। कंपनी ने भारत में लो-कार्बन केमिकल के उत्पादन के लिए फ्रांस की जानी-मानी क्लीन-टेक्नोलॉजी कंपनी डायोक्सीकल के साथ एक दीर्घकालिक साझेदारी की घोषणा की है।
इस महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत अडानी ग्रुप के एक परिसर में स्थापित होने वाले पायलट संयंत्र से की जाएगी। इस प्लांट में कार्बन डाइऑक्साइड को कैप्चर किया जाएगा और फिर रिन्यूएबल एनर्जी की मदद से उससे फॉर्मिक एसिड का उत्पादन होगा।
पायलट प्रोजेक्ट के सफल परीक्षण के बाद दोनों साझेदार इस तकनीक को बड़े और व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन के लिए चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाएंगे।
फॉर्मिक एसिड और इससे जुड़े उत्पादों का इस्तेमाल टेक्सटाइल, कृषि और विनिर्माण सहित कई प्रमुख उद्योगों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य यह साबित करना है कि कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को स्वच्छ ऊर्जा की मदद से उपयोगी और मूल्यवर्धित उत्पादों में सफलतापूर्वक बदला जा सकता है।
यह नई साझेदारी डायोक्सीकल की बिजली आधारित आधुनिक रसायन निर्माण तकनीक को अडानी ग्रुप की स्वच्छ ऊर्जा क्षमता और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ जोड़ती है। इसका अंतिम लक्ष्य रसायन उत्पादन का एक ऐसा नया मॉडल तैयार करना है जो पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ लागत के मामले में भी बेहद प्रतिस्पर्धी हो।
अडानी ग्रुप के निदेशक जीत अडानी ने इस पहल पर कहा कि उन्हें भारत की पहली ऐसी फॉर्मिक एसिड उत्पादन इकाई शुरू करने पर गर्व है, जो पूरी तरह रिन्यूएबल एनर्जी और कैप्चर की गई कार्बन डाइऑक्साइड पर चलेगी।
जीत अडानी ने इसे एक बेहतरीन उदाहरण बताते हुए कहा कि रणनीतिक औद्योगिक सहयोग के जरिए कार्बन उत्सर्जन जैसी बड़ी चुनौती को भी एक स्थायी और किफायती आर्थिक अवसर में बदला जा सकता है।
वहीं, डायोक्सीकल की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और सह-संस्थापक डॉ. सारा लामैसन ने कहा कि स्वच्छ तकनीक और बड़े पैमाने की औद्योगिक क्षमता मिलकर आवश्यक रसायनों के उत्पादन का तरीका पूरी तरह बदल सकती हैं।
डॉ. सारा लामैसन ने भारत की विनिर्माण क्षमता और रिन्यूएबल एनर्जी के संकल्प की सराहना करते हुए कहा कि अडानी ग्रुप के साथ मिलकर उनका लक्ष्य कम-कार्बन रसायनों के उत्पादन का ऐसा मॉडल तैयार करना है, जो प्रतिस्पर्धी हो और जिसे बड़े स्तर पर अपनाया जा सके।
इस साझेदारी के तहत फॉर्मिक एसिड के अलावा, दोनों कंपनियां भविष्य में ऊर्जा, मटेरियल्स, पैकेजिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाले अन्य महत्वपूर्ण रसायनों के उत्पादन की संभावनाओं पर भी मिलकर काम करेंगी। इससे इन क्षेत्रों में जीवाश्म ईंधन आधारित कच्चे माल पर निर्भरता घटेगी और कार्बन उत्सर्जन कम होगा।
अडानी ग्रुप के लिए यह पूरी पहल रसायन क्षेत्र में रणनीतिक रूप से प्रवेश करने की दिशा में एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम है। यह विस्तार कंपनी की रिन्यूएबल एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की मजबूत क्षमताओं पर आधारित है।
साथ ही, यह साझेदारी स्वच्छ प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत और यूरोप के बीच तेजी से बढ़ते सहयोग को भी दर्शाती है। प्रचुर अक्षय ऊर्जा संसाधनों और मजबूत विनिर्माण क्षमता के कारण भारत अब उन्नत विनिर्माण के लिए दुनिया के पसंदीदा केंद्र के रूप में उभर रहा है।
तकनीक आधारित विकास को बढ़ावा देने वाली यह पहल घरेलू विनिर्माण क्षमता को मजबूत करेगी। इसके साथ ही यह ‘मेक इन इंडिया’ और ‘विकसित भारत 2047’ जैसे अहम राष्ट्रीय लक्ष्यों को भी नई ताकत देगी।
यह भी पढ़ें-
परिवार समेत 250 फीट गहरी खाई में टेस्ला कार गिराने वाले भारतीय मूल के डॉक्टर के सभी केस खारिज
H-1B, ग्रीन कार्ड और स्टूडेंट वीजा के नियम होंगे सख्त; भारतीय पेशेवरों की बढ़ेगी टेंशन











