गुजरात के अहमदाबाद और गांधीनगर में पिछले दो महीनों के दौरान पुलिस ने 13.82 लाख रुपये की अवैध शराब जब्त की है। पुलिस की यह बड़ी कार्रवाई पांच अलग-अलग मामलों में हुई है। हालांकि, सबसे हैरानी की बात यह है कि इस पूरी कवायद में एक भी आरोपी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ सका। हर बार तस्कर पुलिस को चकमा देकर फरार होने में कामयाब रहे।
मई से जुलाई के बीच दर्ज की गई पुलिस की प्राथमिकियों (FIR) का विश्लेषण करने पर एक बेहद दिलचस्प और एक जैसा पैटर्न सामने आता है। पुलिस भारी मात्रा में विदेशी शराब (IMFL) तो पकड़ लेती है, लेकिन कथित शराब तस्कर हर बार गिरफ्तारी से ठीक पहले हवा में गायब हो जाते हैं।
एफआईआर में दर्ज पुलिस की कहानियां लगभग एक जैसी ही लगती हैं। रिपोर्ट में बताया जाता है कि आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर भाग गए, या अपनी गाड़ियां छोड़कर पास की घनी झाड़ियों में छिप गए। कई बार पुलिस के पहुंचने से पहले ही शराब से लदी गाड़ियों को लावारिस हालत में छोड़ दिया जाता है।
चलती गाड़ियों के मामलों में पुलिस तेज रफ्तार से पीछा करने का दावा करती है। इन फिल्मी चेज का अंत हमेशा ड्राइवर के गाड़ी छोड़कर पैदल भागने पर होता है। वहीं, खड़ी गाड़ियों के मामलों में अधिकारी बताते हैं कि उन्हें गुप्त सूचना मिली थी, लेकिन मौके पर पहुंचने पर शराब से लदी गाड़ी तो मिली पर अंदर कोई मौजूद नहीं था।
हाल ही में सबसे बड़ी जब्ती गांधीनगर जिले के रणासन गांव के पास हुई। यहां पुलिस ने एक एसयूवी से शराब की 2,600 से अधिक बोतलें बरामद कीं। दर्ज रिपोर्ट के मुताबिक, एसएमसी के पीछा करने पर ड्राइवर ने नहर के पास गाड़ी छोड़ दी और अंधेरे का फायदा उठाकर झाड़ियों के रास्ते फरार हो गया।
ठीक एक दिन बाद अडालज के पास भी ऐसी ही घटना घटी। पुलिस के मुताबिक, एक एसयूवी चालक ने रुकने का इशारा नजरअंदाज किया और तेजी से गाड़ी भगा ले गया। बाद में वह वैष्णोदेवी सर्कल के पास गाड़ी का इंजन चालू छोड़कर ही भाग निकला, और पुलिस उसे पकड़ने में नाकाम रही।
इसी तरह 4 जुलाई की रात को थोल के पास पुलिस एक शराब से भरी एसयूवी का पीछा कर रही थी। तेज रफ्तार गाड़ी एक डिवाइडर से जा टकराई, जिसके बाद उसमें सवार दो लोग भारी बारिश और कम रोशनी के बीच झाड़ियों में घुसकर गायब हो गए।
एक अन्य मामले में, पुलिस ने थलतेज में एक बस स्टैंड के पास खड़ी लावारिस हैचबैक कार से शराब बरामद की। लेकिन हमेशा की तरह इस बार भी कार के मालिक का कोई सुराग नहीं मिल सका।
इन सभी पांच प्रमुख मामलों में जब्त की गई शराब की कुल कीमत 13.82 लाख रुपये से अधिक है। इसके बावजूद हर एफआईआर में यही लिखा गया है कि आरोपी गिरफ्तारी से पहले ही भाग निकले।
फिलहाल पुलिस का कहना है कि वाहन मालिकों की पहचान करने, सप्लाई नेटवर्क का पता लगाने और शराब परिवहन के लिए जिम्मेदार लोगों को पकड़ने की जांच लगातार चल रही है।
इस पूरे मामले पर एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने स्पष्ट किया कि पुलिस का मुख्य फोकस जब्ती पर होता है, क्योंकि ऐसे मामलों को “क्वालिटी डिटेक्शन” माना जाता है और यह उनके रिकॉर्ड को बेहतर बनाता है। अधिकारी ने उम्मीद जताई है कि आगे की जांच और वाहनों के रजिस्ट्रेशन नंबरों के आधार पर आरोपियों को बाद में गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
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