प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले सप्ताह केंद्रीय मंत्रालयों के सचिवों के साथ एक अहम बैठक की। करीब चार घंटे तक चली इस उच्च स्तरीय चर्चा में साइबर अपराधों पर नकेल कसने की दिशा में उठाए गए कदमों की जानकारी दी गई। पहली बार पीएम मोदी को बताया गया कि कैसे सरकार ने 25,095 करोड़ रुपये की साइबर धोखाधड़ी को विफल किया है। साथ ही पीड़ितों के पैसे लौटाने के लिए एक खास रिफंड मॉड्यूल और ई-जीरो एफआईआर पहल की शुरुआत की गई है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा पिछले साल शुरू की गई ई-जीरो एफआईआर प्रणाली इस लड़ाई में एक बड़ा हथियार बनकर उभरी है। अब नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दर्ज होने वाली शिकायतें सीधे कार्रवाई में बदल रही हैं। अगर किसी व्यक्ति के साथ 10 लाख रुपये से अधिक की ठगी होती है, तो यह आधुनिक सिस्टम अपने आप उस शिकायत को जीरो एफआईआर में तब्दील कर देता है।
देश में साइबर अपराधों के आंकड़े हमेशा से चिंताजनक रहे हैं। अगस्त 2019 से लेकर मई 2026 के बीच पूरे भारत में 98 लाख साइबर क्राइम की शिकायतें दर्ज की गईं। हालांकि, इस दौरान केवल 2.3 लाख मामलों में ही पुलिस थानों में एफआईआर दर्ज हो सकी। इसका सीधा मतलब है कि शिकायतों के एफआईआर में बदलने की दर महज 2.36 प्रतिशत रही है।
इसी धीमी प्रक्रिया को तेज करने और पीड़ितों को तुरंत न्याय दिलाने के लिए ई-जीरो एफआईआर की पहल की गई है। फिलहाल यह सिस्टम दिल्ली, हरियाणा, ओडिशा, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, चंडीगढ़, पश्चिम बंगाल, राजस्थान और असम में सफलतापूर्वक काम कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी को यह भी बताया गया कि कम से कम 19 अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इसे जल्द ही लागू करने की तैयारी जोरों पर है।
साइबर ठगी के कारण लोगों को हुए आर्थिक नुकसान के आंकड़े बेहद खौफनाक हैं। साल 2021 से लेकर मई 2026 तक देशवासियों ने 64,447 करोड़ रुपये के साइबर क्राइम नुकसान की रिपोर्ट दर्ज कराई है। इसमें से त्वरित कार्रवाई करते हुए 10,718 करोड़ रुपये को सफलतापूर्वक फ्रीज कर दिया गया। अब तक इस रिकवर किए गए पैसे में से पीड़ितों के बैंक खातों में 323 करोड़ रुपये का रिफंड वापस भेजा जा चुका है।
केंद्र सरकार के तुरंत एक्शन लेने की वजह से 25,095 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी होने से रोकी जा सकी है। इस दौरान संदिग्ध पाए गए 2.27 करोड़ लेनदेन को तकनीकी मदद से खारिज कर दिया गया। इसके अलावा, ठगों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे 12.1 लाख म्यूल खातों को भी डेबिट-फ्रीज किया गया है। सस्पेक्ट रजिस्ट्री की मदद से 31.6 लाख संदिग्ध पहचानकर्ताओं को भी खोजकर ब्लॉक किया गया है।
केवल आम लोगों के पैसे ही नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा भी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने बैठक में बताया कि पिछले पांच वर्षों में भारत की संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ सामग्री परोसने वाले डिजिटल मंचों पर कड़ी कार्रवाई हुई है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत लगभग 2.75 लाख यूआरएल, 233 मोबाइल ऐप्स और 3,691 वेबसाइटों को देश में ब्लॉक कर दिया गया है।
वित्तीय जालसाजी को रोकने के लिए बैंकिंग तंत्र को भी पुलिस के साथ सीधे तौर पर जोड़ा गया है। प्रधानमंत्री को दी गई जानकारी के अनुसार, अब तक 1,596 बैंकों और वित्तीय संस्थानों को एनसीआरपी के सिटिजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम के नेटवर्क पर लाया जा चुका है। इससे पुलिस और बैंकों के बीच का तालमेल पहले से कहीं ज्यादा बेहतर हुआ है।
गौरतलब है कि दो महीने से भी कम समय में शीर्ष नौकरशाहों के साथ पीएम मोदी का यह दूसरा बड़ा संवाद था। इससे पहले 21 मई को उन्होंने ‘विकसित भारत’ के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए केंद्रीय मंत्रिपरिषद और सचिवों की एक संयुक्त बैठक की अध्यक्षता की थी।
भविष्य की योजनाओं पर बात करते हुए गृह मंत्रालय ने एक बेहद मजबूत खाका पेश किया है। आने वाले समय में राज्य और क्षेत्रीय स्तर पर विशेष साइबर अपराध समन्वय केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा पुलिसकर्मियों को एडवांस लेवल की ट्रेनिंग देकर उन्हें आधुनिक ‘साइबर कमांडो’ के रूप में तैयार किया जाएगा, ताकि वे बदलते तकनीकी अपराधों का डटकर सामना कर सकें।
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