अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने पिछले छह महीनों के भीतर दो ऐसी हत्याओं की गुत्थी सुलझाई है, जिनका सुराग उन्हें स्थानीय ‘भूत-प्रेत की कहानियों’ से मिला था। इन सफलताओं के बाद अब पुलिस शहर भर से ऐसी डरावनी कहानियों की जानकारी व्यवस्थित रूप से जुटा रही है।
पुलिस को शक है कि इन अफवाहों के पीछे कई ऐसी हत्याओं के राज छिपे हो सकते हैं, जिनकी कभी रिपोर्ट ही दर्ज नहीं की गई।
इन दो बड़े मामलों में सरखेज और वटवा की घटनाएं शामिल हैं। पिछले साल नवंबर में सरखेज इलाके में एक व्यक्ति की हत्या कर दी गई थी और सुबूत मिटाने के लिए शव को उसी के घर के किचन प्लेटफॉर्म के नीचे दफना दिया गया था।
वहीं, वटवा के कुतुबनगर स्थित एक घर से पिछले महीने एक महिला के अवशेष बरामद किए गए, जिसकी हत्या 34 साल पहले की गई थी।
क्राइम ब्रांच के वरिष्ठ अधिकारियों ने सभी पुलिसकर्मियों को सख्त निर्देश दिया है कि वे भूत-प्रेत दिखने या ऐसी किसी भी कहानी की तह तक जाएं। इसके लिए मुखबिरों के नेटवर्क को भी पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है, ताकि कोई भी सुराग हाथ से न छूटे।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि अगर कोई व्यक्ति भूत देखने का दावा करता है या किसी तांत्रिक की मदद ले रहा है, तो इसके पीछे किसी अपराध का अपराधबोध या किसी पुरानी घटना की गुप्त जानकारी होना एक बड़ी वजह हो सकती है। इसी थ्योरी पर काम करते हुए वटवा और सरखेज के पीड़ितों के छिपे हुए अवशेषों तक पहुंचने में पुलिस को कामयाबी मिली।
अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस की जांच का तरीका पूरी तरह से वैज्ञानिक और सबूतों पर ही आधारित रहेगा। उनका मुख्य उद्देश्य यह है कि किसी भी स्थानीय अफवाह या जानकारी को महत्वहीन समझकर नजरअंदाज न किया जाए।
सरखेज मामले की बात करें तो, मृतक के लापता होने की कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं थी। यह एक भूत की कहानी ही थी जिसने इस बंद केस का दरवाजा खोला। क्राइम ब्रांच को एक गुप्त सूचना मिली थी कि मुख्य आरोपी इमरान वाघेला लोगों से बता रहा है कि उसे मृतक मोहम्मद अंसारी का भूत सता रहा है।
दरअसल, वाघेला के अंसारी की पत्नी रूबी के साथ संबंध थे। अपने साथियों के साथ मिलकर अंसारी की हत्या करने के बाद से ही वाघेला को अपराधबोध और डर सता रहा था। हत्या के बाद इन दोनों ने उस घर पर ताला लगा दिया था, जिसे कुछ ही समय में स्थानीय लोगों ने ‘भूत बंगला’ कहना शुरू कर दिया था।
टिप मिलने के बाद पुलिस ने लापता व्यक्ति की तलाश शुरू की। उन्होंने सच्चाई उगलवाने के लिए आरोपी के पास एक मौलवी को भेजा, जिसने उसे कबूलनामा करने के लिए राजी कर लिया। इसके बाद अंसारी का शव आखिरकार रसोई के प्लेटफॉर्म के नीचे से बरामद किया गया।
दूसरी ओर, वटवा के कुतुबनगर में एक घर की खुदाई के बाद अप्रैल के आखिरी सप्ताह में फरजाना राधनपुरी की हत्या का चौंकाने वाला खुलासा हुआ। पुलिस की यह कार्रवाई भी एक गुप्त सूचना के आधार पर ही की गई थी, जिसने 34 साल पुराने राज से पर्दा उठा दिया।
इस मामले में पुलिस ने जमालपुर से मृतका के पति शम्सुद्दीन खेड़ावाला (61 वर्ष) और उसके बड़े भाई इकबाल खेड़ावाला (63 वर्ष) को गिरफ्तार कर लिया है। इन दोनों आरोपियों पर हत्या, आपराधिक साजिश रचने और सबूत मिटाने के गंभीर आरोप दर्ज किए गए हैं।
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