पचास गार्ड, चौबीसों घंटे निगरानी, सील की गई सड़कें और विशेष रूप से बनाए गए वॉचटावर जैसी कड़ी व्यवस्थाएं भी नाकाफी साबित हुईं। लगभग एक दशक में गुजरात के जंगलों में जन्म लेने वाला ग्रेट इंडियन बस्टर्ड का पहला चूजा अब लापता हो गया है। यह बहुप्रतीक्षित नन्हा पक्षी अपने जन्म के महज 26 दिन बाद ही गायब हो गया है।
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, इस चूजे को 18 अप्रैल के बाद से नहीं देखा गया है। उसकी माँ को एक ट्रैकिंग टैग लगाया गया है और उसके सिग्नल लगातार मिल रहे हैं। इसके बावजूद, कई बार गहन तलाशी अभियान चलाने के बाद भी चूजा अपनी टैग लगी हुई माँ के आसपास कहीं नहीं मिला।
इस चूजे का जन्म 24 मार्च को कच्छ में हुआ था। दुनिया के सबसे गंभीर रूप से लुप्तप्राय पक्षियों में से एक इस प्रजाति के लिए यह एक बड़ी उम्मीद की किरण थी। इसकी सुरक्षा के लिए वीवीआईपी लोगों को दी जाने वाली ‘Z+’ श्रेणी जैसी अभेद्य व्यवस्था की गई थी। अब इसके अचानक गायब होने से राज्य के संरक्षण तंत्र और वन विभाग की कार्यप्रणाली गंभीर जांच के घेरे में आ गई है।
गुजरात में इस दुर्लभ प्रजाति के लिए यह घटना लगातार मिल रहे झटकों की कड़ी में सबसे ताज़ा मामला है। इससे पहले दिसंबर 2018 में राज्य का एकमात्र नर बस्टर्ड लापता हो गया था, जिसका आज तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। तब से इनकी आबादी घटकर सिर्फ तीन मादाओं तक सिमट गई है। हाल ही में हुए जन्म के बाद, बेहतर निगरानी के लिए बची हुई दो मादाओं को ट्रैकिंग टैग लगाए गए थे।
वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) से जुड़े एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस संभावित नुकसान का मुख्य कारण घोंसले वाले क्षेत्र की सुरक्षा में देरी और खामियां हो सकती हैं।
सूत्रों का कहना है कि अब सुरक्षा उपायों की बारीकी से समीक्षा की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि पूर्ण स्तरीय सुरक्षा लागू करने में कोई चूक तो नहीं हुई। अब यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या चूजे के अंडे से बाहर आने के बाद ही सुरक्षा के असल इंतजाम किए गए थे? क्या फेंसिंग में कोई ऐसी जगह छूट गई थी जहां से घोंसले तक शिकारियों की पहुंच आसान हो गई?
इस चूजे का गायब होना सरकारी विभागों के बीच एक बड़े आपसी तालमेल के अभाव को भी उजागर करता है। वन विभाग के एक पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने राज्य के ऊर्जा विभाग द्वारा सुप्रीम कोर्ट में सौंपे गए 2022 के एक हलफनामे का जिक्र किया।
इस हलफनामे में कच्छ में हाई-टेंशन बिजली लाइनों और नवीकरणीय ऊर्जा बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए बचे हुए पक्षियों को दूसरी जगह स्थानांतरित करने का प्रस्ताव दिया गया था। हैरानी की बात यह है कि इस अहम फैसले के बारे में वन विभाग से कोई सलाह ही नहीं ली गई थी।
फिलहाल ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के इस चूजे का कोई सुराग नहीं मिलने से उसके जीवित होने की उम्मीदें अब खत्म होती जा रही हैं। पर्यावरण संरक्षणकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि इस नुकसान की आधिकारिक पुष्टि हो जाती है, तो यह इस प्रजाति की अत्यधिक संवेदनशीलता को दर्शाता है।
यह घटना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि हमें अग्रिम योजना बनाने और इन पक्षियों के प्राकृतिक आवास को मजबूत सुरक्षा देने की तत्काल आवश्यकता है।
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