अहमदाबाद: गुजरात पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ी जानकारी के रखरखाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दरअसल, वेबसाइट पर विदेशी पर्यटकों की सहायता के लिए जिम्मेदार पहले नोडल अधिकारी के रूप में एक दिवंगत आईपीएस अधिकारी एम. के. नायक का नाम अभी भी प्रदर्शित हो रहा है।
सीआईडी (क्राइम) के ‘इन योर सर्विस’ अनुभाग के अंतर्गत मौजूद इस सूची में विभिन्न जिलों के 32 नामित नोडल अधिकारियों का विवरण शामिल है। एम. के. नायक 2006 बैच के आईपीएस अधिकारी थे, जो वडोदरा में डीआईजी सशस्त्र इकाइयों के रूप में कार्यरत थे।
अप्रैल 2021 में अहमदाबाद के एलिसब्रिज स्थित एसवीपी अस्पताल में कोविड-19 के कारण उनका निधन हो गया था। वे इस संक्रमण से जान गंवाने वाले राज्य के पहले आईपीएस अधिकारियों में से थे और उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई थी।
उनके निधन को चार साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन इसके बावजूद निर्देशिका में उनका नाम जस का तस बना हुआ है। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि विदेशी पर्यटकों की सहायता के लिए बनाई गई संपर्क सूची को लंबे समय से अपडेट ही नहीं किया गया है।
इस पूरे मामले पर गुजरात के डीजीपी के. एल. एन. राव, जो सीआईडी (क्राइम) के प्रमुख भी हैं, से जवाब मांगने का प्रयास किया गया लेकिन उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
इस आधिकारिक दस्तावेज की समीक्षा करने पर कई अन्य विसंगतियां भी सामने आती हैं। कई जिलों में नोडल संपर्क के रूप में सूचीबद्ध अधिकारी अब उन स्थानों पर तैनात ही नहीं हैं। वहीं कुछ मामलों में तो दर्शाए गए पद पूरी तरह से खाली प्रतीत होते हैं, जहां वर्तमान में कोई भी अधिकारी सेवा नहीं दे रहा है।
ये खामियां आपात स्थिति के दौरान विदेशी नागरिकों की मदद के लिए बनाए गए आधिकारिक माध्यमों की विश्वसनीयता पर गहरी चिंता पैदा करती हैं। यह लापरवाही ऐसे समय में उजागर हुई है जब गुजरात में विदेशी पर्यटकों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है।
‘इंडिया टूरिज्म डेटा कम्पेंडियम 2025’ के आंकड़ों के अनुसार, साल 2024 में विदेशी पर्यटकों के आगमन के मामले में गुजरात देश में तीसरे स्थान पर रहा है। इस दौरान राज्य में 2.27 मिलियन (22.7 लाख) से अधिक विदेशी पर्यटकों ने दौरा किया।
राज्य में अहमदाबाद, गिर राष्ट्रीय उद्यान और कच्छ का रण पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण के केंद्र हैं। पर्यटन क्षेत्र के विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि बाहर से आने वाले आगंतुकों की सुरक्षा के लिए सटीक और तुरंत प्रतिक्रिया देने वाले संपर्क सूत्रों का होना बेहद आवश्यक है।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने भी इस बात को स्वीकार किया कि सार्वजनिक सुरक्षा निर्देशिका में पुरानी और गलत जानकारी होने से उन अंतरराष्ट्रीय यात्रियों का विश्वास टूट सकता है, जो किसी संकट के समय मदद के लिए पूरी तरह से ऐसे संपर्कों पर ही निर्भर होते हैं।
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