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कभी थे ममता के सबसे खास, अब सिर सजेगा बंगाल का ताज; शुभेंदु अधिकारी होंगे राज्य के नए CM

| Updated: May 8, 2026 18:26

ममता बनर्जी का 15 साल का राज खत्म, नंदीग्राम के बाद अब पूरे बंगाल की सत्ता पर शुभेंदु अधिकारी का कब्जा

शुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभालने जा रहे हैं। कोलकाता में आयोजित भाजपा विधायक दल की बैठक में उन्हें औपचारिक रूप से नेता चुन लिया गया है। विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत के बाद अब अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।

कोलकाता में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह केंद्रीय पर्यवेक्षक के तौर पर शामिल हुए। उनके साथ ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी भी सह-पर्यक्षक के रूप में मौजूद रहे। इसी बैठक के दौरान राज्य की भावी सरकार की रूपरेखा पर मुहर लगाई गई।

वरिष्ठ भाजपा नेता दिलीप घोष ने बैठक के दौरान शुभेंदु अधिकारी के नाम का प्रस्ताव रखा। इसके तुरंत बाद अमित शाह ने आधिकारिक तौर पर उनके भाजपा विधायक दल का नेता चुने जाने की घोषणा की। इस निर्णय के साथ ही बंगाल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत हो गई है।

यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल में एक बड़े राजनीतिक बदलाव का प्रतीक है। इसके साथ ही राज्य में पिछले 15 वर्षों से चला आ रहा ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस का शासन समाप्त हो गया है। पिछले महीने के चुनाव परिणामों ने राज्य की सत्ता संरचना को पूरी तरह बदल दिया है।

भाजपा की इस जबरदस्त जीत को भारतीय चुनावी इतिहास के सबसे बड़े उलटफेरों में से एक माना जा रहा है। विशेष रूप से उस राज्य में जहां पार्टी दशकों तक खुद को मुख्य चुनौती देने वाली शक्ति के रूप में स्थापित करने के लिए संघर्ष कर रही थी, वहां यह बहुमत बेहद मायने रखता है।

शुभेंदु अधिकारी का मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचना बंगाल की राजनीति के सबसे नाटकीय सफर का समापन है। कभी ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में शामिल रहे अधिकारी ग्रामीण बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के संगठन को मजबूत करने वाले प्रमुख रणनीतिकार माने जाते थे।

पूर्व मेदिनीपुर और आसपास के जिलों में उनके परिवार का गहरा प्रभाव रहा है। तृणमूल के उदय के दौरान उन्होंने जमीनी स्तर पर पार्टी को वाम मोर्चे के खिलाफ खड़ा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। हालांकि, समय के साथ आंतरिक संघर्षों के कारण उन्होंने दिसंबर 2020 में तृणमूल का साथ छोड़ दिया था।

उनका राजनीतिक कद तब और बढ़ गया जब उन्होंने 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट पर खुद ममता बनर्जी को पराजित किया। इस जीत ने उन्हें बंगाल में भाजपा का सबसे प्रमुख चेहरा बना दिया। हाल ही में उन्होंने ममता के गढ़ माने जाने वाले भवानीपुर से भी 15,000 से अधिक वोटों से जीत दर्ज कर अपनी स्थिति और मजबूत की है।

भाजपा के भीतर अधिकारी को तृणमूल के खिलाफ सबसे आक्रामक और प्रभावी प्रचारक के रूप में देखा जाता है। उन्होंने भ्रष्टाचार, राजनीतिक हिंसा और शासन के मुद्दों पर ममता सरकार को लगातार घेरा, जिससे मतदाताओं के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत हुई।

पश्चिम बंगाल में भाजपा का उत्थान क्रमिक लेकिन बेहद प्रभावशाली रहा है। दशकों तक यहां की राजनीति पर पहले वाम मोर्चे और फिर तृणमूल कांग्रेस का वर्चस्व रहा। 2019 के लोकसभा चुनाव में पहली बड़ी सफलता मिलने के बाद पार्टी ने 2021 में मुख्य विपक्षी दल का स्थान लिया और अब सत्ता तक पहुंच गई है।

रणनीतिकारों का मानना है कि भ्रष्टाचार के आरोप, बेरोजगारी और 15 साल के शासन के बाद उपजी सत्ता विरोधी लहर ने भाजपा को बहुमत दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई है। तृणमूल कांग्रेस के भीतर की गुटबाजी भी भाजपा के पक्ष में गई।

प्रशासनिक संतुलन बनाए रखने के लिए भाजपा राज्य में दो उपमुख्यमंत्री नियुक्त कर सकती है। माना जा रहा है कि पार्टी इसके जरिए क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को साधने की कोशिश करेगी। चर्चा है कि उपमुख्यमंत्री के पदों में से एक पद किसी महिला नेता को दिया जा सकता है।

इस दौड़ में आसनसोल दक्षिण से चुनाव जीतने वाली अग्निमित्रा पॉल और सिलीगुड़ी से विजयी उम्मीदवार शंकर घोष के नाम सबसे आगे चल रहे हैं। अमित शाह ने इस संभावित शक्ति-साझाकरण व्यवस्था को लेकर कोलकाता में दोनों नेताओं के साथ अलग से चर्चा भी की है।

यदि इन नियुक्तियों पर अंतिम मुहर लगती है, तो बंगाल में लगभग दो दशकों के बाद उपमुख्यमंत्री देखने को मिलेंगे। राज्य में आखिरी बार बुद्धदेव भट्टाचार्य ने ज्योति बसु के शासनकाल में उपमुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया था, जिसके बाद वे खुद मुख्यमंत्री बने थे।

दूसरी ओर, चुनावी हार के बावजूद ममता बनर्जी ने पीछे हटने के संकेत नहीं दिए हैं। निवर्तमान मुख्यमंत्री ने परिणामों के बाद वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की और स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी अब सड़क से लेकर सदन तक एक आक्रामक विपक्ष की भूमिका निभाएगी।

जानकारों का कहना है कि आने वाले समय में बंगाल की राजनीति और अधिक ध्रुवीकृत हो सकती है। अब शुभेंदु अधिकारी और ममता बनर्जी के बीच की प्रतिद्वंद्विता ही राज्य के अगले राजनीतिक अध्याय की दिशा तय करेगी।

नई भाजपा सरकार का शपथ ग्रहण समारोह शनिवार को कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित किया जाएगा। इस भव्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल होंगे।

संवैधानिक प्रक्रिया के तहत राज्यपाल आर.एन. रवि ने गुरुवार को मौजूदा विधानसभा को भंग कर दिया है। इसके साथ ही नई सरकार के गठन का आधिकारिक मार्ग प्रशस्त हो गया है। अब शुभेंदु अधिकारी के सामने सबसे बड़ी चुनौती चुनावी जीत को एक स्थिर और सुशासन वाली सरकार में बदलने की होगी।

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