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क्रूज शिप के यात्रियों में मिला हंतावायरस का ‘एंडीज़ स्ट्रेन’ इतना जानलेवा क्यों है?

| Updated: May 7, 2026 13:40

इंसानों के बीच फैलने वाला हंतावायरस का दुर्लभ 'एंडीज़ स्ट्रेन' कितना खतरनाक है? जानिए इसके लक्षण, कारण और इस पर WHO का क्या कहना है।

समुद्र के बीच एक डच क्रूज शिप पर दहशत का माहौल है। अधिकारियों को इस शिप के मरीजों में हंतावायरस का एक दुर्लभ स्ट्रेन मिला है। यह स्ट्रेन करीबी संपर्क में आने वाले लोगों के बीच फैलने के लिए जाना जाता है।

एमवी होंडियस (MV Hondius) नाम का यह क्रूज अगले कुछ दिनों में स्पेन के टेनेरिफ़ (Tenerife) पहुंचेगा। इस शिप पर हंतावायरस से तीन यात्रियों की मौत के बाद दुनियाभर में हड़कंप मच गया है।

संक्रमण के खतरे को देखते हुए तीन अन्य लोगों को शिप से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। इनमें चालक दल के दो बीमार सदस्य और एक ऐसा व्यक्ति शामिल है जो पुष्ट मामलों में से एक के संपर्क में आया था।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अधिकारियों के अनुसार, वायरस से पीड़ित लोग एंडीज़ वायरस नामक दुर्लभ स्ट्रेन से संक्रमित हुए हैं। यह हंतावायरस का एकमात्र ऐसा प्रकार है जो एक इंसान से दूसरे इंसान में फैल सकता है।

आखिर यह स्ट्रेन क्या है और यह इतनी बड़ी चिंता का विषय क्यों बना हुआ है? आइए इसे विस्तार से समझते हैं।

हंतावायरस का एंडीज़ स्ट्रेन क्या है?

हंतावायरस के कई अलग-अलग स्ट्रेन मौजूद हैं। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि एमवी होंडियस पर मौजूद मरीजों में एंडीज़ हंतावायरस स्ट्रेन की पहचान की गई है। चूहों से फैलने वाला यह स्ट्रेन एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से जा सकता है।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि हंतावायरस मुख्य रूप से चूहों से पैदा होने वाली बीमारी है। यह तब फैलता है जब लोग संक्रमित चूहों के मल, मूत्र या लार से दूषित हवा में सांस लेते हैं।

यह सामान्य मानवीय संपर्क से नहीं फैलता है। लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के रोजर हेवसन के अनुसार, हंतावायरस को आमतौर पर लोगों के बीच आसानी से फैलने वाला नहीं माना जाता है।

एंडीज़ हंतावायरस दक्षिण अमेरिका, विशेष रूप से अर्जेंटीना में एक स्थानिक बीमारी (endemic) है। इसी देश से यह क्रूज शिप 1 अप्रैल को रवाना हुआ था।

न्यूयॉर्क के माउंट सिनाई में इकाॅन स्कूल ऑफ मेडिसिन के माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉ. गुस्तावो पलासियोस का कहना है कि इस वायरस से निपटने के तरीकों के बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है।

सीएनएन (CNN) को दिए एक बयान में उन्होंने बताया कि इतिहास में एंडीज़ वायरस के इंसान से इंसान में फैलने के शायद 300 से भी कम मामले सामने आए हैं। वहीं, इसके कुल मामलों की संख्या लगभग 3,000 है।

शोध के अनुसार, एंडीज़ वायरस मानव लार में मौजूद उन एंटीवायरल तत्वों के प्रति असाधारण रूप से प्रतिरोधी हो सकता है, जो अक्सर अन्य स्ट्रेन को फैलने से पहले ही बेअसर कर देते हैं।

यह एंडीज़ स्ट्रेन कितना जानलेवा है?

विशेषज्ञों का मानना है कि जो चीज एंडीज़ स्ट्रेन को इतना घातक बनाती है, वह इसका इंसानों के बीच फैलने का गुण है।

ज्यादातर मामलों में हंतावायरस एक ‘डेड-एंड’ संक्रमण होता है। इसका मतलब है कि इंसान चूहों के मल के संपर्क में आने के बाद संक्रमित तो हो जाता है, लेकिन वह इसे आगे किसी और को नहीं फैलाता।

हालांकि, एंडीज़ स्ट्रेन के मामले में ऐसा नहीं है। यह लोगों के बीच फैल सकता है, जिससे इसके व्यापक प्रकोप में बदलने का खतरा बना रहता है।

डॉ. पलासियोस के अनुसार, एंडीज़ हंतावायरस के मामले में ट्रांसमिशन विंडो (फैलने का समय) बहुत छोटी होती है, जो लगभग एक दिन की है। जिस दिन मरीज को बुखार आता है, उसी दिन उसके द्वारा संक्रमण फैलाने का खतरा सबसे ज्यादा होता है।

सास्काचेवान विश्वविद्यालय के वैक्सीन और संक्रामक रोग संगठन के शोध वैज्ञानिक ब्राइस वार्नर ने हंतावायरस पर व्यापक काम किया है। उनका कहना है कि एंडीज़ स्ट्रेन का लोगों के बीच फैलना बेहद दुर्लभ है।

एंडीज़ स्ट्रेन से संक्रमित होने का सबसे अधिक खतरा उन लोगों को होता है, जो लंबे समय तक किसी संक्रमित व्यक्ति के बहुत करीबी संपर्क में रहे हों।

जॉन्स हॉपकिन्स ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में मॉलिक्यूलर माइक्रोबायोलॉजी और इम्यूनोलॉजी विभाग की प्रोफेसर सबरा क्लेन ने एनबीसी न्यूज (NBC News) को बताया कि एंडीज़ वायरस को फैलने के लिए शारीरिक तरल पदार्थों के साथ महत्वपूर्ण संपर्क की आवश्यकता होती है।

उन्होंने बताया कि 2000 के दशक की शुरुआत में आई मूल रिपोर्टों और केस स्टडीज से पता चलता है कि यह शादीशुदा जोड़ों, एक साथ रहने वाले लोगों और अंतरंग संबंधों वाले व्यक्तियों के बीच ही फैलता है।

हंतावायरस का यह एंडीज़ स्ट्रेन ‘हंतावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम’ का कारण बन सकता है। यह एक ऐसी स्थिति है जो बुखार और ठंड लगने जैसे फ्लू के लक्षणों से शुरू होती है, लेकिन तेजी से फेफड़ों की समस्याओं और सांस लेने में कठिनाई में बदल सकती है।

यूएस सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार, हंतावायरस के सभी स्ट्रेन गंभीर हो सकते हैं, लेकिन एंडीज़ स्ट्रेन सबसे अधिक जानलेवा है। इस स्ट्रेन की चपेट में आने वाले 40 प्रतिशत लोगों की मौत हो चुकी है।

इसके विपरीत, 1993 में दक्षिण-पश्चिमी अमेरिका में खोजे गए इसके सबसे आम प्रकार ‘सिन नोम्ब्रे स्ट्रेन’ की मृत्यु दर 25 प्रतिशत है। हंतावायरस के अन्य स्ट्रेन की तरह ही, एंडीज़ स्ट्रेन के इलाज के लिए भी अब तक कोई वैक्सीन या दवा उपलब्ध नहीं है।

एमवी होंडियस पर कैसे फैला हंतावायरस?

जब अधिकारी जहाज पर हंतावायरस के प्रसार को रोकने की कोशिश कर रहे हैं, तो एक बड़ा सवाल अभी भी कायम है कि आखिर यह संक्रमण वहां पहुंचा कैसे?

अर्जेंटीना के अधिकारियों का मानना है कि जहाज पर वायरस का स्रोत वह डच जोड़ा है, जिनकी मौत 11 अप्रैल से 2 मई के बीच हुई थी। अधिकारियों को आशंका है कि यह जोड़ा मध्य मार्च में उशुआइया (Ushuaia) में बर्ड-वाचिंग (पक्षी दर्शन) के दौरान हंतावायरस के संपर्क में आया होगा।

इसके बाद उन्होंने एमवी होंडियस जहाज में सवार होकर अपनी यात्रा शुरू की होगी। यह क्रूज 20 मार्च को अर्जेंटीना के बंदरगाह से 35 दिनों की लंबी अभियान यात्रा पर रवाना हुआ था।

सबसे पहले डच व्यक्ति को 6 अप्रैल को बुखार, सिरदर्द, पेट दर्द और डायरिया जैसे लक्षण महसूस हुए। बाद में उसे सांस लेने में गंभीर तकलीफ हुई और 11 अप्रैल को उसकी मृत्यु हो गई।

कई हफ्तों तक उसकी मौत को इस दुर्लभ हंतावायरस से नहीं जोड़ा गया। उस व्यक्ति का शव अगले दो हफ्तों तक जहाज पर ही रखा गया था, जिस दौरान उसकी पत्नी भी बीमार पड़ गई।

25 अप्रैल को वह अपने पति के शव के साथ दक्षिण अफ्रीका चली गई। बाद में जोहान्सबर्ग के एक अस्पताल में उसकी भी मौत हो गई। हालांकि, इस सिद्धांत के साथ एक बड़ी समस्या यह है कि उस इलाके और टिएरा डेल फुएगो (Tierra del Fuego) के आसपास के प्रांत में पहले कभी हंतावायरस का कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है।

अन्य विशेषज्ञों का ध्यान इस ओर गया है कि अर्जेंटीना में हंतावायरस के मामलों में अचानक वृद्धि हुई है। WHO का भी कहना है कि लैटिन अमेरिका में इस दुर्लभ और चूहों से फैलने वाली बीमारी का सबसे अधिक प्रकोप अर्जेंटीना में ही है।

अर्जेंटीना के एक प्रमुख संक्रामक रोग विशेषज्ञ ह्यूगो पिज़ी ने एसोसिएटेड प्रेस (AP) को बताया कि जलवायु परिवर्तन के कारण अर्जेंटीना अधिक उष्णकटिबंधीय (ट्रॉपिकल) हो गया है। इससे डेंगू और पीले बुखार जैसी बीमारियों के साथ-साथ नए उष्णकटिबंधीय पौधे भी उगे हैं, जो चूहों के पनपने के लिए बीज पैदा करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि समय बीतने के साथ हंतावायरस तेजी से फैल रहा है।

क्या हंतावायरस का यह प्रकोप अगला कोविड बन सकता है?

WHO के अनुसार, एमवी होंडियस पर मौजूद 150 यात्रियों में से कुल आठ मामले सामने आए हैं। इनमें से तीन में लैब टेस्टिंग के जरिए हंतावायरस की पुष्टि हो चुकी है। इस घटना ने लोगों के बीच दहशत पैदा कर दी है, और कुछ लोग इसकी तुलना कोविड-19 महामारी से कर रहे हैं।

हालांकि, WHO ने स्पष्ट किया है कि हंतावायरस के इन मामलों की तुलना कोरोनावायरस के प्रकोप से नहीं की जा सकती है। WHO की शीर्ष महामारी विशेषज्ञ मारिया वैन केरखोव ने कहा कि यह कोई नया कोविड नहीं है, लेकिन यह एक गंभीर संक्रामक बीमारी जरूर है। उन्होंने आश्वासन दिया कि ज्यादातर लोग कभी भी इसके संपर्क में नहीं आएंगे।

WHO के प्रमुख टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस ने भी इस खतरे को कम आंकते हुए जोर दिया कि बाकी दुनिया के लिए जोखिम बहुत कम है। जब उनसे पूछा गया कि क्या WHO को कोविड-19 संकट की शुरुआत और इस आपातकाल में समानताएं दिखती हैं, तो उन्होंने साफ इंकार कर दिया।

न्यू मैक्सिको हेल्थ साइंसेज सेंटर विश्वविद्यालय के इम्यूनोलॉजिस्ट और हंतावायरस शोधकर्ता स्टीवन ब्रैडफ्यूट ने भी इस बात पर सहमति व्यक्त की है। नेशनल जियोग्राफिक की एक रिपोर्ट में उन्होंने कहा कि यह वायरस बहुत धीमी गति से फैलता है। इसलिए, भले ही यह एक खतरनाक वायरस है, लेकिन यह बहुत बड़े पैमाने पर नहीं फैलता है।

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