गुजरात सरकार के डिजिटल गवर्नेंस और एआई-संचालित प्रशासन के दावों को जमीनी स्तर पर बड़ा झटका लगता दिख रहा है। राज्य के परिवहन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर मौजूद पुरानी और सीमित जानकारी ने व्यवस्था को लेकर कई गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।
इस पोर्टल पर जाने वाले आम नागरिकों को अक्सर आरटीओ (RTO) और एआरटीओ (ARTO) अधिकारियों के पुराने संपर्क नंबर ही मिलते हैं। इसके कारण लोगों के लिए अधिकारियों से संपर्क करना या समय पर किसी तरह की मदद प्राप्त करना बेहद मुश्किल हो जाता है।
वेबसाइट पर मौजूद वाहनों से जुड़े डेटा की विश्वसनीयता पर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं। कई रिपोर्ट्स के मुताबिक, पोर्टल पर मौजूद वाहनों से संबंधित कुछ जानकारी लगभग पांच साल पुरानी है।
ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन पंजीकरण जैसी जरूरी सेवाओं के लिए भी यह वेबसाइट बहुत मददगार साबित नहीं हो रही है। यह साइट आम तौर पर केवल बुनियादी नोटिस दिखाती है या फिर उपयोगकर्ताओं को सीधे केंद्र सरकार के ‘परिवहन’ (Parivahan) पोर्टल पर रीडायरेक्ट कर देती है।
नागरिकों का स्पष्ट कहना है कि इस सरकारी वेबसाइट पर आम जनता के लिए शायद ही कोई सार्थक या प्रासंगिक जानकारी सीधे तौर पर उपलब्ध है। इस पूरी स्थिति ने गुजरात के डिजिटल प्रशासन के बड़े-बड़े दावों और जनता से जुड़े सरकारी पोर्टलों की वास्तविक स्थिति के बीच के भारी अंतर को उजागर कर दिया है।
आज के समय में लाखों गुजराती नागरिक ऑनलाइन सरकारी सेवाओं पर पूरी तरह निर्भर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य की वेबसाइटों को केवल एक स्थिर नोटिस बोर्ड की तरह काम नहीं करना चाहिए, बल्कि उन्हें अपडेटेड संपर्क विवरण और रियल-टाइम ट्रांसपोर्ट डेटा प्रदान करना चाहिए।
ध्यान देने वाली बात यह है कि फरवरी 2026 में ही गुजरात के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने ‘डेटा गवर्नेंस फ्रेमवर्क’ और ‘एथिकल एआई’ जैसी उन्नत पहलों की घोषणा की थी।
हालांकि, जब लाखों नागरिकों की रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ा कोई विभाग अपनी ही आधिकारिक वेबसाइट पर नवीनतम जानकारी अपडेट रखने में विफल रहता है, तो राज्य के हाई-टेक गवर्नेंस के दावों की जांच होना पूरी तरह से लाजमी है।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए गुजरात परिवहन विभाग की वेबसाइट महज एक ऑनलाइन नोटिस बोर्ड सिमट कर रह गई प्रतीत होती है। अगर गुजरात वास्तव में खुद को एक डिजिटल लीडर के रूप में स्थापित करना चाहता है, तो सरकारी वेबसाइटों को बुनियादी ढांचों से आगे बढ़कर साल 2026 की जरूरतों के हिसाब से सटीक और नागरिक-अनुकूल जानकारी उपलब्ध करानी होगी।
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