वित्तीय वर्ष 2026 (FY26) में मुथूट फाइनेंस का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा है। कंपनी के कंसोलिडेटेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में सालाना आधार पर 98 प्रतिशत की जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है, जो 10,607 करोड़ रुपये के आंकड़े तक पहुंच गया है।
वहीं, कंसोलिडेटेड लोन एसेट्स अंडर मैनेजमेंट भी सालाना आधार पर 49 प्रतिशत बढ़कर 1,81,916 करोड़ रुपये हो गया है। इसके साथ ही कंपनी के बोर्ड ने निवेशकों के लिए प्रति शेयर 30 रुपये के डिविडेंड का भी ऐलान किया है।
पश्चिम एशिया विवाद के कारण वर्तमान में कई सेक्टर्स बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में भी मुथूट फाइनेंस लिमिटेड के गोल्ड लोन व्यवसाय में FY26 के दौरान 48 प्रतिशत की शानदार बढ़ोतरी देखी गई है। कंपनी का मानना है कि इस संकट की घड़ी में बाजार में गोल्ड लोन की मांग लगातार बढ़ रही है।
मुथूट फाइनेंस लिमिटेड के प्रबंध निदेशक (MD) जॉर्ज अलेक्जेंडर मुथूट ने एक साक्षात्कार में बताया कि वर्तमान में लोगों की क्रय शक्ति कम हो रही है और उनकी आय पर भी असर पड़ा है। हालांकि, उनके व्यवसाय पर इस स्थिति का कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं दिखा है।
उन्होंने कहा कि जब आम लोगों और व्यापारियों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है, तो उन्हें तुरंत फंड की आवश्यकता होती है। यही वजह है कि अब अधिक से अधिक लोग अपने सोने के गहनों को गिरवी रखकर कर्ज ले रहे हैं।
प्रबंध निदेशक के अनुसार, पिछले पांच तिमाहियों में व्यापार काफी अच्छा रहा है और इसमें लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। लोग अपनी व्यक्तिगत जरूरतों और छोटे व्यवसाय से जुड़ी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अपने गहनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके अलावा सोने की बढ़ती कीमतों ने भी इसमें एक अहम भूमिका निभाई है।
पिछले दो वर्षों में सोने के दाम लगभग दोगुने हो गए हैं, जिससे घरों में रखा सोना अब पहले के मुकाबले काफी मूल्यवान हो गया है। इसलिए लोग आसानी से फंड जुटाने के लिए अपने खाली रखे सोने का सहारा ले रहे हैं। सरकार द्वारा हाल ही में सोने के आयात और गहनों की खरीद को नियंत्रित करने के लिए लगाए गए प्रतिबंधों पर भी उन्होंने स्पष्टीकरण दिया।
उन्होंने बताया कि इन नए सरकारी प्रतिबंधों का उनकी कंपनी के कारोबार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। कंपनी केवल घरों में रखे पुराने गहनों को संपार्श्विक (collateral) के रूप में इस्तेमाल करती है। वे सोने की खरीद या उसके आयात के लिए किसी तरह की फाइनेंसिंग नहीं करते हैं, इसलिए यह नियम उनके व्यवसाय के लिए पूरी तरह से तटस्थ (neutral) है।
तिमाही के आंकड़ों पर नजर डालें तो कंसोलिडेटेड लोन एसेट्स अंडर मैनेजमेंट सालाना आधार पर 10 प्रतिशत बढ़कर 17,196 करोड़ रुपये हो गया है।
वहीं, स्टैंडअलोन लोन एसेट्स अंडर मैनेजमेंट 1,62,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है, जिसमें सालाना आधार पर 50 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। FY26 के लिए स्टैंडअलोन प्रॉफिट आफ्टर टैक्स भी सालाना आधार पर 95 प्रतिशत बढ़कर 10,134 करोड़ रुपये हो गया है।
बोर्ड द्वारा घोषित प्रति इक्विटी शेयर 30 रुपये का डिविडेंड निवेशकों का भरोसा बढ़ाने वाला कदम है। साल 2011 में कंपनी के आईपीओ (IPO) के बाद से यह लगातार 14वां साल है जब लाभांश की घोषणा की गई है।
इसके अतिरिक्त, कंपनी ने इस साल 17.71 लाख नए ग्राहकों को 29,347 करोड़ रुपये का अब तक का सबसे अधिक गोल्ड लोन एडवांस भी दिया है। यह भारत के संगठित गोल्ड लोन उद्योग में एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में कंपनी की स्थिति को और मजबूत करता है।
जॉर्ज अलेक्जेंडर मुथूट ने कहा कि उनका ध्यान पारदर्शी और ग्राहक-केंद्रित ऋण समाधान प्रदान करने पर केंद्रित है। कोर गोल्ड लोन बिजनेस के साथ-साथ उनके माइक्रोफाइनेंस, पर्सनल लोन और होम लोन जैसे गैर-गोल्ड ऋण विकल्पों को भी ग्राहकों से काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है, जो उनके लोन बुक को विविधता प्रदान कर रहे हैं।
व्यापार विस्तार की बात करें तो कंपनी ने इस साल 177 नई शाखाएं खोली हैं। इसके साथ ही FY26 तक कुल शाखाओं की संख्या बढ़कर 1,312 हो गई है। कलेक्शन एफीशिएंसी (वसूली दक्षता) में भी सुधार देखने को मिला है। FY25 में यह 99.16 प्रतिशत थी, जो FY26 में 0.69 प्रतिशत बढ़कर 99.85 प्रतिशत के बेहतरीन स्तर पर आ गई है।
कंपनी का मानना है कि गोल्ड लोन के नए दिशानिर्देश उद्योग के लिए एक बेहद सकारात्मक कदम हैं। इन नियमों से पारदर्शिता और प्रशासन में सुधार होगा, जिससे संगठित क्षेत्र के खिलाड़ियों में ग्राहकों का विश्वास और अधिक मजबूत होगा।
पिछले वर्ष के शानदार प्रदर्शन पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए एमडी ने कहा कि पिछला साल उनके लिए बहुत अच्छा रहा। सभी कर्मचारियों ने बेहतरीन काम किया और सभी हितधारकों ने पूरा समर्थन दिया। कंपनी अपने इस बेमिसाल प्रदर्शन और विकास से पूरी तरह संतुष्ट है।
यह भी पढ़ें-
केरल में सतीसन की जीत से गांधी परिवार में क्यों है खुशी?
आखिर प्रधानमंत्री मोदी क्यों चाहते हैं कि आप सोना खरीदना बंद कर दें?








