नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के पश्चिमी इलाके नांगलोई में एक झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। पुलिस ने एक प्राइवेट स्लीपर बस के अंदर 30 वर्षीय महिला के साथ कथित तौर पर गैंगरेप के आरोप में बस के ड्राइवर और कंडक्टर को गिरफ्तार किया है। यह वारदात तीन दिन पहले की बताई जा रही है।
पीड़िता चार बच्चों की मां है और अपने परिवार के साथ बाहरी दिल्ली के पास एक झुग्गी बस्ती में रहती है। मजिस्ट्रेट और पुलिस के सामने दिए गए अपने बयान में महिला ने बताया कि यह घटना तब हुई जब वह 11 मई की रात करीब 12:15 बजे अपने भाई की मदद करने के बाद घर लौट रही थी।
महिला ने दावा किया कि वह मधुबन चौक की ओर जा रही थी और पैदल ही सरस्वती विहार बस स्टैंड के पास पहुंची थी। तभी वहां एक प्राइवेट स्लीपर बस आई, जिसकी खिड़कियों पर पर्दे लगे हुए थे। महिला जब बस में चढ़ी तो उसने अंदर तीन लोगों को मौजूद पाया।
कुछ देर बाद उनमें से एक व्यक्ति बस से उतर गया। महिला का आरोप है कि इसके बाद बाकी बचे दोनों आरोपी बस को नांगलोई के एक सुनसान इलाके में ले गए। यह जगह उस स्थान से कम से कम 7 किलोमीटर दूर थी, जहां से वह बस में सवार हुई थी।
पीड़िता का आरोप है कि दोनों आरोपियों ने बस के अंदर उसके साथ यौन उत्पीड़न किया। हालांकि, आरोपियों ने दावा किया है कि यह “पैसे के लेन-देन का विवाद” था और पुलिस ने भी कहा है कि यह मामला फिलहाल जांच का विषय है।
आरोपियों की पहचान उत्तर प्रदेश के आगरा निवासी उमेश और हाथरस निवासी रामेंद्र के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, दोनों पिछले 5-6 सालों से दिल्ली में बस चला रहे हैं और बारी-बारी से इस बस को चलाते थे।
जांचकर्ताओं ने बताया कि महिला और आरोपियों के बीच कथित तौर पर पैसों को लेकर बहस हुई थी। महिला ने पहले उमेश के फोन का इस्तेमाल करके रामेंद्र (जो कुछ समय बाद बस से बाहर निकल गया था) से पैसे मांगे। जब उसने पैसे देने से मना कर दिया, तो महिला ने उसी फोन से पुलिस को कॉल करके कथित हमले की जानकारी दी।
इस मामले में दिल्ली पुलिस ने इस बात से साफ इनकार किया है कि चलती बस में महिला के साथ यौन उत्पीड़न हुआ है। घटना की सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और दोनों आरोपियों को उसी जगह से गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के बाद महिला को मेडिकल जांच के लिए ले जाया गया। मेडिकल के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64 (बलात्कार), 70 (सामूहिक बलात्कार) और 3(5) (समान इरादे) के तहत एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
अदालत में CrPC की धारा 164 के तहत पीड़िता का बयान भी दर्ज करा लिया गया है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों द्वारा किए गए दावों का सत्यापन किया जा रहा है और जांच के हिस्से के रूप में सभी पहलुओं की गहराई से पड़ताल की जा रही है।
फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम को समझने का प्रयास कर रही है। बस द्वारा लिए गए रूट और आरोपियों की पृष्ठभूमि की जांच करने के लिए सीसीटीवी फुटेज को खंगाला जा रहा है। अपराध में कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए वाहन को सीज कर लिया गया है और सबूत जुटाने के लिए उसकी फोरेंसिक जांच भी कराई गई है।
इस गंभीर मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने दिल्ली पुलिस प्रमुख को पत्र लिखकर इस मामले में सख्त और समयबद्ध कार्रवाई का निर्देश दिया है। इसके साथ ही महिला आयोग ने सात दिनों के भीतर विस्तृत ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ भी मांगी है।
राष्ट्रीय महिला आयोग ने अधिकारियों को दिल्ली में सार्वजनिक और निजी परिवहन प्रणालियों के माध्यम से यात्रा करने वाली महिलाओं की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भी निर्देश दिए हैं।
आयोग ने कहा है कि विशेष रूप से देर रात के दौरान महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रस्तावित निवारक और सुधारात्मक उपायों का पूरा विवरण प्रस्तुत किया जाए।
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