9 अप्रैल का दिन 28 वर्षीय मोहम्मद मियां सेथवाला के लिए एक और बुरी खबर लेकर आया। ब्रिटेन के गृह मंत्रालय (होम ऑफिस) ने उन्हें ईमेल भेजकर उनका वीज़ा आवेदन खारिज कर दिया है। यह कानूनी झटका उन्हें ऐसे समय में लगा है, जब करीब नौ महीने पहले ही अहमदाबाद से लंदन के गैटविक जा रहे एयर इंडिया एआई-171 बोइंग ड्रीमलाइनर विमान हादसे में उन्होंने अपनी पत्नी और इकलौती बच्ची को हमेशा के लिए खो दिया था।
ब्रिटिश अधिकारियों ने उन्हें 22 अप्रैल तक ‘इमिग्रेशन बेल’ (आव्रजन जमानत) दी है, ताकि इस तय अवधि में वह देश छोड़कर भारत लौट सकें। मूल रूप से वडोदरा के रहने वाले सेथवाला अभी भी अपनी पत्नी सादिका और मासूम बेटी फातिमा की मौत के सदमे से बाहर नहीं आ पाए हैं।
अब उनकी आखिरी उम्मीद ब्रिटेन की एक स्थानीय अदालत से है, जहां उनके वकील इस जमानत आदेश को रद्द करवाने के लिए याचिका दायर करने की तैयारी कर रहे हैं। उनका मानना है कि अगर अदालत से राहत मिलती है, तो वह नए वीज़ा के लिए सिरे से आवेदन कर सकेंगे।
मोहम्मद मियां का ब्रिटेन का सफर साल 2022 में शुरू हुआ था। वह अपनी पत्नी सादिका के साथ डिपेंडेंट वीज़ा पर वहां गए थे, जो वहां इंटरनेशनल बिजनेस मैनेजमेंट की पढ़ाई करने गई थीं। अपनी किस्मत बदलने की आस में यह जोड़ा अप्रैल 2025 में इंग्लैंड के रग्बी शहर में शिफ्ट हो गया था। सादिका को वहां एक अच्छी नौकरी मिल गई थी और उन्हें तीन महीने के प्रोबेशन के बाद अपना वर्क परमिट मिलने का बेसब्री से इंतजार था।
दोनों पति-पत्नी की आर्थिक पृष्ठभूमि बहुत मजबूत नहीं थी। उनके परिवारों के पास विदेश भेजने के लिए पैसे नहीं थे, इसलिए पड़ोसियों ने चंदा इकट्ठा करके उनके इस सपने को साकार किया था।
रग्बी में नौकरी मिलने के बाद सादिका ने अपने पति के लिए भी उसी जगह काम का बंदोबस्त कर लिया था। दोनों ने अपना भविष्य संवारने और पड़ोसियों का कर्ज चुकाकर ब्रिटेन में बसने के सपने बुनने शुरू कर दिए थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
नई नौकरी के महज एक महीने बाद ही, सादिका ने सेथवाला के छोटे भाई की शादी में शामिल होने के लिए वडोदरा जाने की छुट्टी मांगी। सेथवाला भी उनके साथ भारत आना चाहते थे, लेकिन एक ही जगह काम करने की वजह से मैनेजर ने दोनों को एक साथ छुट्टी देने से साफ मना कर दिया।
मजबूरी में सादिका को अपनी बेटी फातिमा के साथ अकेले ही सफर पर निकलना पड़ा, क्योंकि उस मनहूस उड़ान के टिकट पहले से ही बुक हो चुके थे।
जैसे ही 12 जून को विमान हादसे की दर्दनाक खबर सेथवाला तक पहुंची, उन्होंने तुरंत अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया। नियोक्ता की शर्तों के कारण उन्हें ऐसा करना पड़ा, जिसके बाद वह फौरन भारत लौट आए। कई दिनों के लंबे और तकलीफदेह इंतजार के बाद सादिका और फातिमा के पार्थिव शरीर वडोदरा में उनके परिवार को सौंपे गए।
वडोदरा में हर चीज उन्हें सादिका और फातिमा की याद दिलाती थी, इसलिए वह जून के अंत में वापस ब्रिटेन चले गए। लेकिन रग्बी के उस सूने घर में वापसी उनके लिए और भी भारी पड़ी।
चंद महीनों पहले तक जिस घर में उनकी पत्नी की महक और बेटी की किलकारियां गूंजती थीं, वह अब बिल्कुल खामोश था। हर तरफ उनके कपड़े और सामान बिखरे थे। डिप्रेशन के कारण उनकी रातों की नींद उड़ गई। आखिरकार दोस्तों की सलाह पर उन्होंने एक निजी मनोचिकित्सक से मदद ली और लंदन शिफ्ट हो गए, जहां उनके चचेरे भाइयों और दोस्तों ने उन्हें संभाला है।
इस मुश्किल दौर में सेथवाला ने नए वीज़ा के लिए आवेदन करने और वर्क वीज़ा प्रायोजित करने वाली नौकरी तलाशने की बहुत कोशिश की। दुर्भाग्य से कोई सफलता नहीं मिली और जनवरी में उनका डिपेंडेंट वीज़ा भी समाप्त हो गया।
उनके वकील ने उन्हें बताया कि वह ‘शोक संतप्त जीवनसाथी’ (bereaved spouse) की श्रेणी में फिट नहीं बैठते हैं, क्योंकि विमान हादसे में किसी ब्रिटिश निवासी वीज़ा धारक की जान जाने का यह एक बेहद दुर्लभ मामला है।
इसी बीच, एयर इंडिया ने भी सेथवाला से संपर्क किया था। एयरलाइन ने उन्हें लंदन के ताज ग्रुप ऑफ होटल्स में नौकरी की पेशकश की थी। हालांकि, जनवरी में वीज़ा समाप्त होने के कारण उन्हें यह बड़ा प्रस्ताव मजबूरी में ठुकराना पड़ा।
ब्रिटेन जाने से पहले सेथवाला ने कंपनी सेक्रेटरी (CS) का फाउंडेशन कोर्स पास कर लिया था और वह टैक्सेशन के क्षेत्र में काम कर रहे थे। वहीं सादिका भी सीए (CA) फाउंडेशन कर चुकी थीं।
सेथवाला बताते हैं कि एक बेहतर जिंदगी का सपना ही उन्हें ब्रिटेन लाया था। उनका कहना है कि अब सादिका के न होने पर भी उन्हें उन दयालु पड़ोसियों का कर्ज जरूर चुकाना है, जिन्होंने जरूरत के वक्त उनकी आर्थिक मदद की थी।
पीड़ा से घिरे सेथवाला को लगता है कि फिलहाल ब्रिटेन में अकेले रहना ही उनके लिए सबसे बेहतर विकल्प है। उनका मानना है कि भारत लौटने पर सादिका की मां (जो उनकी मौसी भी हैं) और घर के बच्चों को देखकर उनका दुख और गहरा होगा।
उन्होंने अपने परिवार को जिस भयानक तरीके से खोया है और आखिरी बार उनका चेहरा तक नहीं देख पाए, वह सच डरावना है। उन्हें अभी भी जांच रिपोर्ट का इंतजार है, ताकि दुर्घटना का असली सच सामने आ सके। उनका मानना है कि ब्रिटेन में अपने करीबियों के साथ रहकर ही वह अपने आगे के जीवन और काम पर ध्यान केंद्रित कर पाएंगे।
गौरतलब है कि 12 जून 2025 को अहमदाबाद से लंदन जाने वाला एयर इंडिया का बोइंग 787-8 विमान उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। यह विमान एक मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल की इमारत से जा टकराया और उसमें भीषण आग लग गई।
इस दिल दहला देने वाले हादसे में कुल 260 लोगों की जान चली गई थी। मृतकों में 241 यात्री और चालक दल के सदस्य शामिल थे, जबकि जमीन पर मौजूद 19 अन्य लोगों को भी अपनी जान गंवानी पड़ी।
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