गांधीनगर/नई दिल्ली: गुजरात को अक्सर भारत के ‘ग्रोथ इंजन’ के रूप में पेश किया जाता रहा है, लेकिन हाल ही में सामने आए आंकड़े राज्य के औद्योगिक माहौल को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। पिछले 12 वर्षों में, 846 कंपनियों ने अपने पंजीकृत कॉर्पोरेट कार्यालय (Registered Corporate Offices) गुजरात से बाहर स्थानांतरित कर लिए हैं।
यह जानकारी लोकसभा में पेश की गई एक रिपोर्ट में सामने आई है, जो ‘वाइब्रेंट गुजरात समिट’ जैसे प्रमुख निवेश कार्यक्रमों के दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को स्पष्ट करती है।
वाइब्रेंट गुजरात बनाम पलायन की हकीकत
एक स्थानीय दैनिक समाचार पत्र ‘संदेश’ की रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात लंबे समय से ‘वाइब्रेंट गुजरात समिट’ के माध्यम से वैश्विक मंच पर खुद को निवेश के लिए सबसे पसंदीदा जगह के रूप में प्रदर्शित करता आया है। लेकिन, डेटा कंपनियों के पलायन की एक विपरीत प्रवृत्ति (Trend) की ओर इशारा करता है।
आंकड़ों के मुताबिक, जून 2014 से नवंबर 2025 के बीच, कुल 846 कंपनियों ने अपने रजिस्टर्ड ऑफिस गुजरात से हटाकर दूसरे राज्यों में शिफ्ट कर लिए। इन कंपनियों ने सबसे ज्यादा महाराष्ट्र का रुख किया है, जिसके बाद दिल्ली और पश्चिम बंगाल का नंबर आता है। गौर करने वाली बात यह है कि इनमें से कुछ राज्यों में निवेश प्रोत्साहन कार्यक्रम ‘वाइब्रेंट गुजरात’ के काफी बाद शुरू हुए थे।
नीतियों और इंफ्रास्ट्रक्चर के बावजूद मोहभंग
पिछले 12 सालों में राज्य सरकार ने औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए कई नीतियां और विशेष प्रोत्साहन (Incentives) पेश किए हैं। गांधीनगर के पास गिफ्ट सिटी (GIFT City) का विकास भी इसीलिए किया गया था ताकि वैश्विक और घरेलू कॉर्पोरेट इकाइयां गुजरात से अपना कामकाज चला सकें।
सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम और विश्वस्तरीय सुविधाओं के दावों के बावजूद, पिछले एक दशक में नौकरशाही बाधाओं (Bureaucratic Hurdles) का असर अब साफ दिखाई देने लगा है।
आने वालों से ज्यादा जाने वालों की संख्या
लोकसभा में दिए गए जवाब के अनुसार, जहां एक तरफ 846 कंपनियां गुजरात से बाहर गईं, वहीं दूसरे राज्यों से गुजरात आने वाली कंपनियों की संख्या काफी कम रही। इसी अवधि के दौरान:
- मध्य प्रदेश से केवल 42 कंपनियां,
- महाराष्ट्र से 680 कंपनियां, और
- उत्तर प्रदेश से सिर्फ 38 कंपनियों ने अपना रजिस्ट्रेशन गुजरात में शिफ्ट किया।
यह संख्या राज्य छोड़ने वाली कंपनियों की तुलना में काफी कम है। बाहर जाने वाली कंपनियों में से 36 ने तो गुजरात में अपना पंजीकरण पूरी तरह रद्द कर दिया और दूसरी जगह फिर से रजिस्ट्रेशन कराया। इनमें से एक बड़ा हिस्सा धातु (Metals), रसायन (Chemicals) और उससे जुड़े विनिर्माण क्षेत्रों की कंपनियों का था।
हजारों कंपनियों का रजिस्ट्रेशन रद्द
राष्ट्रीय स्तर पर भी कंपनियों के नियमों के उल्लंघन के मामले सामने आए हैं। वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच कंपनी अधिनियम, 2023 के उल्लंघन के चलते देश भर में 1,89,293 कंपनियों का पंजीकरण रद्द (Deregistered) किया गया। इसमें से अकेले गुजरात की 7,834 कंपनियां शामिल थीं। इसका सबसे ज्यादा असर 2021-22 में देखा गया, जिसका मुख्य कारण पंजीकरण के बाद वार्षिक रिटर्न और वित्तीय विवरण दाखिल करने में विफलता थी।
कंपनियां गुजरात क्यों छोड़ रही हैं?
विशेषज्ञों और उद्योग जगत के अनुसार, इस पलायन के पीछे कई प्रमुख कारण हैं:
- बिजली की दरें: महाराष्ट्र जैसे राज्यों में बिजली की दरें कम हैं, जिसने कपड़ा (Textile) जैसे ज्यादा बिजली खपत वाले उद्योगों को वहां शिफ्ट होने के लिए प्रेरित किया है।
- लागत में कमी: अन्य राज्यों में सस्ती जमीन और औद्योगिक भूखंड उत्पादन की कुल लागत को कम करते हैं। साथ ही, कुछ क्षेत्रों में श्रमिकों की कम मजदूरी भी एक बड़ा आकर्षण है।
- कुशल कामगारों की कमी: गुजरात में अत्यधिक कुशल श्रमिकों (Highly Skilled Workers) की कमी और प्रवासी मजदूरों के पलायन से भी लेबर गैप पैदा हुआ है।
- बाजार और सब्सिडी: दूसरे राज्यों द्वारा दी जाने वाली आकर्षक सब्सिडी, वित्तीय प्रोत्साहन और बड़े उपभोक्ता बाजारों तक आसान पहुंच भी कंपनियों को गुजरात से बाहर जाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
विशेषज्ञ की राय
राजनीतिक और आर्थिक मामलों के विश्लेषक हेमंत शाह ने वाइब्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए कहा कि 846 उद्योगों का जाना एक बहुत बड़ी संख्या है।
उन्होंने कहा, “जीएसटी (GST) के बाद वैट (VAT) की व्यवस्था खत्म हो चुकी है, ऐसे में इन उद्योगों द्वारा अपने कॉर्पोरेट कार्यालयों को शिफ्ट करने के कारणों की गहन जांच की जानी चाहिए।”
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