असम विधानसभा चुनाव की गहमागहमी के बीच कांग्रेस पार्टी को एक बड़ा और करारा झटका लगा है। सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और पार्टी के कद्दावर नेता भूपेन कुमार बोरा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
इस इस्तीफे के पीछे की सबसे बड़ी वजह कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई की ‘मनमानी’ और उनका रवैया बताया जा रहा है। यह सियासी भूचाल ऐसे समय में आया है, जब प्रियंका गांधी का असम दौरा कुछ ही दिनों में प्रस्तावित है।
खड़गे और राहुल को भेजी चिट्ठी, बयां किया दर्द
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, भूपेन बोरा ने अपना इस्तीफा सीधे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजा है। इसके अलावा, उन्होंने राहुल गांधी को भी एक पत्र लिखकर अपनी व्यथा साझा की है।
अपने पत्र में बोरा ने साफ तौर पर कहा कि पार्टी नेतृत्व द्वारा उन्हें लगातार नजरअंदाज किया जा रहा था और प्रदेश इकाई में उन्हें वो सम्मान नहीं मिल रहा था, जिसके वे हकदार थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने आलाकमान को पहले ही आगाह कर दिया था कि राज्य में पार्टी किस ढर्रे पर चल रही है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इन हालातों ने उनके आत्मसम्मान और गरिमा को गहरी चोट पहुंचाई है।
‘यह फैसला व्यक्तिगत नहीं, पार्टी के भविष्य की चिंता है’
इस्तीफे के बाद भूपेन बोरा ने मीडिया से बातचीत में अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा, “मैंने आज सुबह 8 बजे कांग्रेस आलाकमान को अपना इस्तीफा भेज दिया है। मैंने विस्तार से बताया है कि आखिर मैं यह कदम उठाने के लिए क्यों मजबूर हुआ। यह कोई मेरा निजी फैसला नहीं है।”
भावुक होते हुए उन्होंने आगे कहा, “मैंने इस पार्टी को अपने जीवन के 32 साल दिए हैं। मैं 1994 में कांग्रेस में शामिल हुआ था। मेरा यह कदम सिर्फ व्यक्तिगत नाराजगी नहीं है, बल्कि यह पार्टी के भविष्य की चिंता से प्रेरित है। इसीलिए मैंने आलाकमान के सामने सारी बातें खोलकर रख दी हैं।”
दिलचस्प बात यह है कि इस्तीफा सौंपने की खबर मिलते ही सांसद गौरव गोगोई, भूपेन बोरा को मनाने उनके घर पहुंच गए।
गौरव गोगोई पर फोड़ा ठीकरा
बोरा ने अपने इस सख्त फैसले के लिए गौरव गोगोई की नीतियों, उनकी मनमानी और भाई-भतीजावाद को जिम्मेदार ठहराया है। गौरतलब है कि भूपेन बोरा 2021 से 2025 तक असम कांग्रेस के अध्यक्ष रहे थे, लेकिन पिछले साल उनकी जगह गौरव गोगोई को कमान सौंप दी गई थी।
बोरा असम में दो बार विधायक रह चुके हैं। चर्चा थी कि वे नवगठित ‘रंगानादी’ (Ranganadi) निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने वाले थे। साथ ही, गठबंधन के लिए विपक्षी दलों से बातचीत की जिम्मेदारी भी उनके कंधों पर थी। लेकिन बताया जा रहा है कि टीम में सांसद रकीबुल हुसैन को शामिल किए जाने से वे काफी नाराज थे।
क्या बीजेपी का दामन थामेंगे भूपेन बोरा?
असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष के रूप में बोरा राज्य में पार्टी का एक बड़ा चेहरा रहे हैं। खास तौर पर ऊपरी असम (Upper Assam) में उनका अच्छा खासा प्रभाव है, इसलिए उनका जाना कांग्रेस की उम्मीदों पर पानी फेरने जैसा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उम्मीदवारों की घोषणा से ठीक पहले दिया गया यह इस्तीफा एक सोची-समझी रणनीति है, जो कांग्रेस के भीतर बढ़ते असंतोष को उजागर करता है।
सूत्रों का दावा है कि भूपेन बोरा आने वाले दिनों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हो सकते हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में उनकी पार्टी में एंट्री हो सकती है। अगर ऐसा होता है, तो यह बीजेपी के लिए बड़ी कामयाबी होगी, जो विपक्ष के मजबूत नेताओं को अपने साथ जोड़कर अपनी स्थिति और मजबूत करना चाहती है।
रंगानादी सीट से लड़ सकते हैं चुनाव
माना जा रहा है कि बीजेपी में शामिल होने के बाद बोरा आगामी विधानसभा चुनाव रंगानादी सीट से ही लड़ेंगे। यह एक रणनीतिक बदलाव होगा, क्योंकि रंगानादी एक महत्वपूर्ण सीट मानी जाती है। यहां बोरा का अपना निजी नेटवर्क और बीजेपी की सांगठनिक ताकत मिलकर विरोधियों के लिए कड़ी चुनौती पेश कर सकते हैं।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी सार्वजनिक रूप से बोरा के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि बीजेपी के दरवाजे उन सभी नेताओं के लिए खुले हैं जो विकास और मजबूत शासन में विश्वास रखते हैं।
सरमा ने यह भी भरोसा दिलाया कि अगर बोरा पार्टी में आते हैं, तो रंगानादी से उनकी जीत सुनिश्चित करने के लिए बीजेपी पूरा जोर लगा देगी। यह बयान साफ इशारा करता है कि बीजेपी नेतृत्व ने अपनी चुनावी रणनीति में उन्हें पहले ही शामिल कर लिया है।
इस घटनाक्रम के साथ ही असम का सियासी परिदृश्य पूरी तरह बदलता दिख रहा है। भूपेन बोरा का जाना न केवल कांग्रेस को संरचनात्मक रूप से कमजोर करेगा, बल्कि यह धारणा भी मजबूत करेगा कि इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले में हवा का रुख अब बीजेपी की ओर मुड़ गया है।
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