भारत के प्रमुख ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ (AI Impact Summit) को उस समय एक बड़ा झटका लगा, जब टेक दिग्गज बिल गेट्स ने गुरुवार को अपने निर्धारित मुख्य भाषण से ठीक कुछ घंटे पहले कार्यक्रम से नाम वापस ले लिया। गेट्स के बाद एनवीडिया (Nvidia) के सीईओ जेन्सेन हुआंग ने भी अपना दौरा रद्द कर दिया।
इन बड़े नामों के हटने से इस आयोजन की शुरुआत फीकी पड़ गई है, जिसे ‘ग्लोबल साउथ’ के पहले सबसे बड़े आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फोरम के रूप में प्रचारित किया गया था और जिसके जरिए भारत खुद को वैश्विक एआई गवर्नेंस में एक अग्रणी आवाज़ के तौर पर स्थापित करना चाहता है।
गेट्स फाउंडेशन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि अरबपति कारोबारी अपना संबोधन इसलिए नहीं देंगे ताकि “एआई समिट की प्रमुख प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित रहे।”
दिलचस्प बात यह है कि कुछ दिन पहले ही फाउंडेशन ने उनके न आने की अफवाहों का खंडन किया था और उनके शामिल होने की पुष्टि की थी। गेट्स का यह अचानक लिया गया फैसला अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा पिछले महीने जारी किए गए उन ईमेल के बाद आया है, जिनमें फाइनेंसर और यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन और गेट्स फाउंडेशन के कर्मचारियों के बीच बातचीत का खुलासा हुआ था।
हालांकि, गेट्स पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि उनके बीच केवल परोपकारी कार्यों पर चर्चा हुई थी और एपस्टीन से मिलना उनकी एक बड़ी गलती थी।
एआई प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों की सुरक्षा: पीएम मोदी
गुरुवार को इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एआई प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का कड़ा आह्वान किया। इस दौरान मंच पर फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई, ओपनएआई (OpenAI) के सीईओ सैम ऑल्टमैन और एंथ्रोपिक (Anthropic) के सीईओ डारियो एमोडेई जैसे दिग्गज मौजूद थे।
इन शीर्ष एआई अधिकारियों के साथ मंच पर एकजुटता दिखाते हुए हाथ उठाकर तस्वीरें खिंचवाने के बाद पीएम मोदी ने कहा, “हमें बच्चों की सुरक्षा के प्रति और अधिक सतर्क रहना होगा। जिस तरह स्कूलों का पाठ्यक्रम तय होता है, उसी तरह एआई स्पेस को भी बच्चों और परिवारों द्वारा निर्देशित होना चाहिए।”
रोबोट डॉग विवाद और प्रबंधन की कमियां
भारत का यह पहला बड़ा एआई शिखर सम्मेलन प्रबंधन की भारी कमियों के कारण भी चर्चा में है। उपस्थित लोगों ने भारत सरकार की योजना और व्यवस्था को लेकर हैरानी और नाराजगी जताई है।
गुरुवार को एक चौंकाने वाले फैसले में प्रदर्शनी हॉल को आम जनता के लिए बंद कर दिया गया। इससे उन कंपनियों में काफी नाराजगी देखी गई जिन्होंने वहां अपने स्टॉल लगाए थे। तीन दिनों की भारी भीड़ के बाद आयोजन स्थल लगभग सुनसान नजर आया।
इससे पहले बुधवार को भी एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया था, जब भारतीय विश्वविद्यालय ‘गलगोटिया’ (Galgotias) को अपना स्टॉल खाली करने के लिए कह दिया गया। दरअसल, विश्वविद्यालय के एक कर्मचारी ने चीन में बने और बाजार में आसानी से उपलब्ध एक रोबोटिक कुत्ते (Robotic Dog) को अपनी खुद की रचना बताकर पेश किया था, जिससे वहां भारी सार्वजनिक आक्रोश फैल गया।
वीआईपी मूवमेंट से दिल्ली की सड़कों पर ट्रैफिक जाम
समिट के दौरान वीआईपी मूवमेंट को प्राथमिकता देने के लिए पुलिस ने कई सड़कें बंद कर दीं, जिससे 2 करोड़ की आबादी वाले दिल्ली शहर में भारी अफरातफरी और जाम का माहौल बन गया। बुधवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में देखा गया कि कैब या शटल सेवा न होने के कारण समिट में आए सैकड़ों लोग मध्य दिल्ली की सड़कों पर मीलों तक पैदल चलने को मजबूर थे।
विपक्षी नेता महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर एक ऐसा ही वीडियो रीपोस्ट करते हुए लिखा कि इस खराब प्रबंधन ने वैश्विक स्तर पर भारत की छवि को धूमिल किया है।
100 अरब डॉलर से अधिक का निवेश
तमाम विवादों और अव्यवस्थाओं के बावजूद, इस शिखर सम्मेलन में भारत के एआई प्रोजेक्ट्स के लिए 100 अरब डॉलर से अधिक के निवेश के वादे किए गए हैं। इनमें अडानी ग्रुप (Adani Group), टेक दिग्गज माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) और डेटा सेंटर कंपनी योट्टा (Yotta) शामिल हैं।
भारत सरकार ने उम्मीद जताई है कि अगले दो वर्षों में कुल निवेश 200 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर जाएगा। हालांकि, विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के इतने तेजी से विस्तार के कारण भारत के पावर ग्रिड (बिजली ढांचे) और जल आपूर्ति पर भारी दबाव पड़ सकता है।
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