नींद हमारी मानसिक स्पष्टता, शारीरिक स्वास्थ्य और भावनात्मक संतुलन की नींव है। जब भी नींद की बात आती है, तो आमतौर पर चर्चा सिर्फ इस बात पर सिमट कर रह जाती है कि हम कितने घंटे सोते हैं। बेशक यह जरूरी है, लेकिन सुकून भरी और बेहतरीन नींद के लिए सिर्फ इतना ही काफी नहीं है।
अपनी नींद की गुणवत्ता (Sleep Quality) में सुधार करने के लिए हमें अपने सोने के तरीके यानी ‘स्लीप रूटीन’ पर गहराई से ध्यान देना होगा। स्लीप मेडिसिन और पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी (बाल रोग न्यूरोलॉजी) में 20 साल का शानदार अनुभव रखने वाले विशेषज्ञ डॉ. क्रिस्टोफर जे एलन (Dr Christopher J Allen) ने इंस्टाग्राम पर एक बेहद व्यावहारिक स्लीप रूटीन साझा किया।
उन्होंने बताया कि नींद को बेहतर बनाने में दो सबसे बड़े फैक्टर अहम भूमिका निभाते हैं— सोने और उठने का तय समय।
शरीर को पसंद है एक तय रूटीन
डॉ. क्रिस समझाते हैं, “आपके शरीर को एक तय पैटर्न पसंद होता है। जब आप एक रात 10 बजे बिस्तर पर जाते हैं और अगली रात 1 बजे, तो आपकी बायोलॉजिकल क्लॉक (आंतरिक घड़ी) कनफ्यूज हो जाती है।” अगर आपके सोने का तरीका अनियमित है, तो आपको रात में नींद आने में परेशानी हो सकती है, नींद बार-बार टूट सकती है और अगले दिन आप दिनभर सुस्ती महसूस कर सकते हैं।
खराब नींद की इन आदतों को सुधारने के लिए डॉ. क्रिस ने कुछ बेहद आसान नियम बताए हैं। अगर आप लगातार कुछ हफ्तों तक इनका सख्ती से पालन करते हैं, तो आपकी नींद में जबरदस्त सुधार देखने को मिलेगा।
नियम 1: हर दिन एक ही समय पर उठें
नींद के इस विशेषज्ञ का पहला नियम यह है कि आप रोजाना सुबह एक ही समय पर उठें, यहां तक कि वीकेंड (शनिवार और रविवार) पर भी। उन्होंने खास तौर पर वीकेंड का जिक्र किया, क्योंकि अक्सर लोग छुट्टियों के दिन देर तक सोना पसंद करते हैं।
हालांकि, जब आपके उठने का समय रोज एक ही होता है, तो आपका शरीर उस तय समय पर खुद-ब-खुद एक्टिव महसूस करने लगता है। इससे सुबह उठने पर होने वाला भारीपन या आलस कम होता है और ओवरऑल स्लीप क्वालिटी बेहतर होती है।
नियम 2: सोने के समय में 30 मिनट से ज्यादा का बदलाव न करें
दूसरा जरूरी नियम यह है कि आपके रोज के सोने और उठने के समय में 30 मिनट से ज्यादा का हेरफेर नहीं होना चाहिए। डॉ. क्रिस के मुताबिक, समय में बहुत ज्यादा बदलाव आपके शरीर की आंतरिक घड़ी को बिगाड़ सकता है।
जैसा कि पहले बताया गया है, एक दिन रात 10 बजे और दूसरे दिन रात 1 बजे सोने से शरीर को गलत संकेत (Mixed Signals) मिलते हैं। इससे आपके शरीर के लिए यह समझना बेहद मुश्किल हो जाता है कि उसे कब एक्टिव रहना है और कब सोने की तैयारी करनी है।
पाठकों के लिए नोट: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूजर द्वारा साझा की गई जानकारी पर आधारित है। इस लेख के दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है। यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है और किसी भी तरह से पेशेवर चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है।
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